रांची: झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और जेएसएससी (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलनरत अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल अपनी नौकरी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और राज्य में ईमानदार एवं पारदर्शी भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप निष्पक्ष एवं पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया सुनिश्चित कराना है।
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर आंदोलन
आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे केवल यह चाहते हैं कि राज्य की सभी भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित हों। उनका मानना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता होगी, तो योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और वे अपनी मेहनत के बल पर भविष्य बना सकेंगे।
छात्रों का आरोप है कि सरकार युवाओं की इस मूलभूत मांग को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनका कहना है कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था प्रत्येक अभ्यर्थी का संवैधानिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार पर विश्वास खोने का आरोप
आंदोलन के दौरान छात्रों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि झारखंड की गठबंधन सरकार युवाओं का विश्वास खो चुकी है और भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्ष जांच कराने में विफल रही है।
छात्रों का दावा है कि सरकार की जांच एजेंसियों की कार्यशैली को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच विश्वास की कमी है। उनका कहना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी द्वारा नहीं कराई जाएगी, तब तक विवाद समाप्त नहीं होगा।
सीआईडी और एसीबी की जांच पर उठे सवाल
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वे राज्य की जांच एजेंसियों सीआईडी और एसीबी की जांच पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
उनका आरोप है कि पूर्व में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से जुड़े मामलों में प्रारंभिक जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद बाद में मामले को अलग दिशा दी गई। छात्रों का सवाल है कि यदि शुरुआती जांच में बड़ी संख्या में प्रश्नों के समान होने की बात सामने आई थी, तो बाद में उस मामले को पूरी तरह गलत कैसे बताया गया।
छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मिलना आवश्यक है, ताकि युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सके।
जेपीएससी नियुक्ति मामले को लेकर भी उठे सवाल
आंदोलन के दौरान छात्रों ने जेपीएससी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति को कथित रूप से भर्ती घोटाले का प्रमुख आरोपी बता रही हैं, तो उससे जुड़े अन्य मामलों और पूरी भर्ती प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की आशंका है, तो केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई हो।
भर्ती प्रक्रियाओं में कई गंभीर आरोप
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने हाल के वर्षों में हुई विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में कई प्रकार की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
छात्रों का कहना है कि उन्हें निम्नलिखित मुद्दों पर लगातार शिकायतें रही हैं—
- परीक्षा परिणाम घोषित करने में अत्यधिक देरी।
- नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब।
- ओएमआर शीट में कथित हेरफेर की आशंका।
- कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं करना।
- मेरिट सूची की पारदर्शिता पर सवाल।
- परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर संदेह।
- पेपर लीक की घटनाएं।
- सीटों की कथित सेटिंग एवं बिक्री जैसे आरोप।
छात्रों का कहना है कि इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
सभी नियुक्तियों की सीबीआई जांच की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग यह है कि हाल के वर्षों में हुई सभी विवादित नियुक्ति प्रक्रियाओं की जांच सीबीआई से कराई जाए।
उनका कहना है कि यदि जांच स्वतंत्र एजेंसी द्वारा होगी, तो युवाओं का विश्वास बहाल होगा और दोषियों की पहचान भी निष्पक्ष तरीके से हो सकेगी। छात्रों का मानना है कि पारदर्शी जांच से भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में भी सुधार आएगा।
युवाओं के भविष्य को लेकर जताई चिंता
छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार विवाद होने से हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते रहते हैं।
उनका कहना है कि समय पर परीक्षा, निष्पक्ष मूल्यांकन और समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया लागू करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। इससे युवाओं का मनोबल बढ़ेगा और वे अपने करियर को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करेंगे।
नगड़ी भूमि विवाद का भी किया उल्लेख
आंदोलन के दौरान कुछ वक्ताओं ने रांची के नगड़ी क्षेत्र में भूमि से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा ग्राम सभा के निर्णय और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई है।
उनका कहना है कि यदि किसानों, आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन से जुड़े मामलों में उनकी सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाएगा, तो भविष्य में व्यापक जन आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सरकार से पारदर्शी कार्रवाई की मांग
छात्रों ने सरकार से मांग की है कि भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े सभी विवादों का शीघ्र समाधान किया जाए तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की आवश्यकता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि योग्य युवाओं को समय पर न्याय नहीं मिला, तो उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
झारखंड में JPSC और जेएसएससी की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन राज्य के युवाओं के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है। आंदोलनरत अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और सभी विवादित भर्ती मामलों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने की है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह छात्रों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाती है।
















