मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

प्रोजेक्ट जागृति से TB उन्मूलन अभियान को मिली नई गति 155 निक्षय मित्रों ने 638 मरीजों को लिया गोद

On: July 5, 2026 8:29 PM
Follow Us:
Untitled Design 20 1
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

Netaji 2 1

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में TB उन्मूलन को लेकर चलाया जा रहा “प्रोजेक्ट जागृति – बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” अब एक प्रभावी जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से संचालित इस विशेष अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी अधिकारियों, स्वास्थ्य संस्थानों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी समूहों तथा सक्षम नागरिकों के सहयोग से टीबी मरीजों को उपचार के साथ-साथ पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और जनसहभागिता पर आधारित एक व्यापक अभियान बनती जा रही है।

Headlines

Netaji 3

जिले में टीबी मरीजों के उपचार, पोषण और मनोबल को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक 155 व्यक्ति एवं संस्थाओं ने 638 टीबी मरीजों को गोद लिया है। इन मरीजों को नियमित रूप से पोषण सहायता दी जा रही है, ताकि वे उपचार के दौरान शारीरिक रूप से मजबूत रहें और समय पर दवा लेकर पूरी तरह स्वस्थ हो सकें। प्रशासन का मानना है कि यदि समाज के सक्षम लोग इस अभियान से इसी तरह जुड़ते रहे, तो पश्चिमी सिंहभूम को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

प्रोजेक्ट जागृति बना जनभागीदारी आधारित स्वास्थ्य अभियान

पश्चिमी सिंहभूम जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर चलाया जा रहा प्रोजेक्ट जागृति अब एक ऐसे मॉडल के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें सरकार और समाज मिलकर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती से लड़ रहे हैं। टीबी जैसी बीमारी केवल दवा से नहीं, बल्कि नियमित पोषण, परामर्श, सामाजिक सहयोग और निरंतर निगरानी से नियंत्रित होती है। इसी सोच के साथ जिला प्रशासन ने “बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” की अवधारणा पर आधारित यह अभियान शुरू किया, जिसमें समाज के सक्षम व्यक्तियों और संस्थानों को “निक्षय मित्र” बनाकर टीबी मरीजों की सहायता के लिए जोड़ा गया।

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ मरीजों को आर्थिक या पोषण सहायता देना नहीं है, बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाना भी है कि समाज उनके साथ खड़ा है। टीबी जैसी बीमारी से जूझ रहे मरीज अक्सर शारीरिक कमजोरी के साथ-साथ सामाजिक संकोच, मानसिक दबाव और आर्थिक कठिनाइयों से भी गुजरते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति या संस्था उन्हें गोद लेकर नियमित पोषण सहायता और नैतिक सहयोग प्रदान करती है, तो मरीजों के उपचार की सफलता की संभावना और बढ़ जाती है।

जिले में 3,320 टीबी मरीज उपचाररत, बेहतर पोषण पर प्रशासन का विशेष फोकस

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अप्रैल 2026 से 1 जुलाई 2026 के बीच पश्चिमी सिंहभूम जिले में 3,320 टीबी मरीज उपचाररत हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसके लिए व्यापक सामाजिक सहयोग और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। यही वजह है कि जिला प्रशासन ने मरीजों के इलाज के साथ-साथ उनके पोषण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है।

TB एक ऐसी बीमारी है जिसमें दवाओं के नियमित सेवन के साथ पौष्टिक आहार की भी बेहद अहम भूमिका होती है। कमजोर पोषण स्थिति मरीज के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है, जिससे स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इस चुनौती को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने निक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों तक पोषाहार टोकरी पहुंचाने की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज दवा के साथ पर्याप्त पोषण भी प्राप्त करें और उपचार के दौरान शारीरिक रूप से कमजोर न पड़ें।

155 निक्षय मित्रों ने 638 मरीजों को गोद लेकर पेश की सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल

प्रोजेक्ट जागृति के तहत अब तक जिले में 155 निक्षय मित्र सामने आए हैं, जिन्होंने 638 टीबी मरीजों को गोद लेकर समाज के सामने एक प्रेरक उदाहरण पेश किया है। निक्षय मित्र बनने वाले लोगों और संस्थाओं में सरकारी अधिकारी, निजी अस्पताल, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी समूह, महिला समूह, औद्योगिक प्रतिष्ठान तथा अन्य जागरूक नागरिक शामिल हैं।

इन निक्षय मित्रों की भूमिका केवल औपचारिक नहीं है। वे गोद लिए गए मरीजों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे मरीजों के उपचार को मजबूती मिल रही है। यह सहयोग टीबी मरीजों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपचार की लंबी अवधि के दौरान उन्हें दवा के साथ पौष्टिक भोजन की निरंतर जरूरत होती है।

जिला प्रशासन का कहना है कि निक्षय मित्रों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि जिले में टीबी उन्मूलन को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और समाज इस बीमारी को केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखने लगा है।

उपायुक्त मनीष कुमार ने 51 मरीजों को गोद लेकर पेश किया प्रेरक उदाहरण

प्रोजेक्ट जागृति की सबसे खास बात यह है कि इस अभियान को प्रशासनिक स्तर पर केवल निर्देशों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि शीर्ष अधिकारी स्वयं इसमें भागीदारी निभा रहे हैं। उपायुक्त मनीष कुमार ने खुद 51 टीबी मरीजों को गोद लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह कदम न केवल प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि समाज के अन्य सक्षम लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।

उपायुक्त के अलावा उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने 21 मरीजों, झींकपानी बीडीओ सीमा आइंद ने 22 मरीजों, आरईओ चक्रधरपुर के कार्यपालक अभियंता विकास खलखो ने 20 मरीजों तथा अंचलाधिकारी नितेश खलखो ने 17 मरीजों को गोद लिया है। इसके अतिरिक्त सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने भी 11-11 मरीजों की जिम्मेदारी उठाई है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकारी केवल प्रशासनिक निगरानी नहीं कर रहे, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी टीबी उन्मूलन अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इससे अभियान को नैतिक बल भी मिलता है और जनता के बीच सकारात्मक संदेश भी जाता है।

निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों ने भी निभाई अहम भूमिका

इस अभियान की सफलता में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। कई निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड केंद्रों और चिकित्सा संस्थानों ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए टीबी मरीजों को गोद लिया है। इनमें सृष्टि अल्ट्रासाउंड एवं आई क्लिनिक, प्रवीण अल्ट्रासाउंड एवं आई क्लिनिक, गायत्री सेवा सदन, लाइफ नर्सिंग होम, संजीव नेत्रालय, सनराइज अस्पताल तथा सीएलएफ सोनुवा ने 11-11 टीबी मरीजों को गोद लिया है।

इसके अलावा मूंदड़ा अस्पताल, जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनीला खलखो, जिला कल्याण पदाधिकारी गोपी उरांव तथा जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने 10-10 मरीजों की जिम्मेदारी ली है। यह सहयोग बताता है कि टीबी उन्मूलन अभियान अब केवल सरकारी प्रयास नहीं रह गया, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र और सामाजिक संस्थानों की भी प्रभावी साझेदारी बन रही है।

प्रशासन का मानना है कि यदि इसी प्रकार निजी संस्थान, औद्योगिक इकाइयां और सामाजिक संगठन आगे आते रहे, तो जिले के अधिक से अधिक टीबी मरीजों को बेहतर पोषण सहायता और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा।

छह माह तक पोषाहार टोकरी और दवा सेवन की निगरानी से बढ़ रही सफलता की संभावना

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निक्षय मित्र द्वारा गोद लिए गए प्रत्येक टीबी मरीज को छह माह तक पोषाहार टोकरी उपलब्ध कराई जाती है। यह पोषण सहायता मरीज की उपचार अवधि के दौरान उसकी शारीरिक मजबूती बनाए रखने में मदद करती है। टीबी मरीजों के लिए नियमित और संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि बीमारी और दवा दोनों शरीर पर प्रभाव डालते हैं।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क टीबी रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मरीजों को यह सुनिश्चित कराया जाता है कि वे दवा का नियमित सेवन करें और बीच में उपचार न छोड़ें। स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी, पोषण सहायता और निक्षय मित्रों के सहयोग से मरीजों के पूर्ण स्वस्थ होने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में केवल दवा देना पर्याप्त नहीं है। यदि मरीज को समय पर दवा, पर्याप्त पोषण, परामर्श और सामाजिक सहयोग एक साथ मिले, तभी उपचार पूरी तरह सफल होता है। प्रोजेक्ट जागृति इसी समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है।

जनभागीदारी को सबसे बड़ी ताकत मान रहा जिला प्रशासन

इस अभियान के अवसर पर उपायुक्त मनीष कुमार ने जिले के सभी सक्षम नागरिकों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, निजी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं से निक्षय मित्र बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं जीती जा सकती। जब तक समाज का हर सक्षम व्यक्ति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक टीबी उन्मूलन की गति सीमित रह सकती है।

उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि “टीबी के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस अभियान से जुड़े। जनसहभागिता ही पश्चिमी सिंहभूम को टीबी मुक्त बनाने की सबसे बड़ी ताकत है।”

उनकी यह अपील बताती है कि जिला प्रशासन टीबी उन्मूलन को केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित करना चाहता है। यही सोच प्रोजेक्ट जागृति की सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है।

TB के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने में भी सफल हो रहा अभियान

प्रोजेक्ट जागृति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह अभियान केवल मरीजों को पोषण सहायता नहीं दे रहा, बल्कि समाज में टीबी के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता भी बढ़ा रहा है। लंबे समय तक टीबी को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां, डर और सामाजिक दूरी देखने को मिलती रही है। कई मरीज बीमारी छिपाने की कोशिश करते हैं, जिससे उपचार में देरी होती है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।

ऐसे में जब प्रशासन, अधिकारी, अस्पताल, सामाजिक संगठन और आम नागरिक खुले तौर पर टीबी मरीजों के साथ खड़े होते हैं, तो इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। लोगों को यह समझ में आता है कि टीबी का इलाज संभव है, दवा उपलब्ध है और समय पर उपचार व पोषण मिलने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

इस प्रकार प्रोजेक्ट जागृति न केवल मरीजों की सहायता कर रहा है, बल्कि समाज में टीबी को लेकर जागरूकता, स्वीकार्यता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत कर रहा है। यही कारण है कि यह अभियान स्वास्थ्य सेवा से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का अभियान बनता जा रहा है।

पश्चिमी सिंहभूम को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में मजबूत कदम

जिला प्रशासन का मानना है कि यदि निक्षय मित्रों की संख्या और जनभागीदारी इसी तरह बढ़ती रही, तो पश्चिमी सिंहभूम को टीबी मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य अधिक तेजी से हासिल किया जा सकेगा। अभी 3,320 मरीज उपचाररत हैं, जो चुनौती का संकेत देते हैं, लेकिन 155 निक्षय मित्रों द्वारा 638 मरीजों को गोद लेना यह भी दर्शाता है कि समाज इस चुनौती से लड़ने के लिए तैयार है।

यह अभियान एक ऐसा मॉडल बनकर उभर रहा है, जिसमें प्रशासनिक इच्छाशक्ति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सामाजिक संवेदनशीलता और सामुदायिक सहयोग एक साथ दिखाई देते हैं। यदि यही मॉडल आगे और मजबूत होता है, तो आने वाले समय में पश्चिमी सिंहभूम टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में राज्य के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

प्रोजेक्ट जागृति ने TB उन्मूलन को बनाया सामूहिक जिम्मेदारी का अभियान

पश्चिमी सिंहभूम में चल रहा प्रोजेक्ट जागृति इस बात का प्रमाण है कि यदि स्वास्थ्य संबंधी किसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन और समाज मिलकर काम करें, तो उसके सकारात्मक परिणाम तेजी से सामने आ सकते हैं। 155 निक्षय मित्रों द्वारा 638 टीबी मरीजों को गोद लेना, अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, निजी संस्थानों का सहयोग, छह माह तक पोषण सहायता और नियमित दवा सेवन की निगरानी—ये सभी पहलू इस अभियान को प्रभावी और परिणामकारी बना रहे हैं।

Netaji 4

और पढ़ें

Untitled Design 17 1

IPTA की ओर से रक्त जांच शिविर का आयोजन शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने उठाया लाभ

Untitled Design 9 3

ग्रामीण इलाकों में Ayush विभाग का स्वास्थ्य अभियान सफल 104 लोगों को मिला नि:शुल्क उपचार

IMG 20260704 175106

TMH में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के लिए अत्याधुनिक iNO थेरेपी की शुरुआत

Untitled Design 11 1

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी का Chaibasa में औचक निरीक्षण होटलों-भोजनालयों में मिलावट की जांच कई अनियमितताओं पर जारी हुआ नोटिस

Untitled Design 5

जमशेदपुर में Yashoda सिकंदराबाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस एडवांस्ड कार्डियक केयर और ECMO सेवाओं पर दिया विशेष जोर

Untitled Design 16 7

Polio दिवस पर विधायक सुखराम उरांव ने अनुमंडल अस्पताल में पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम का किया उद्घाटन बच्चों को पिलाई जीवनरक्षक खुराक

Leave a Comment