
धरती आबा की जन्मभूमि
झारखंड पावन मिट्टी है।
9’जून आज उन विभूति का
पावन पुण्य तिथि है।।

फिरंगी के छक्का छुड़ाते
अपने तीर कमान से।
वंचितों के रखवाले वो थे
आए थे जो आसमान से।।
जल-जंगल-जमीन पर
अधिकार अपने रखे सिद्ध।
अपने तीर के नोक से जो
भगाते रहे फिरिंगी गिद्ध।।
वंचितों के आवाज बनकर
उन्हें दिलाए जो सम्मान।
धरती आबा वो कहलाए
कहलाए बिरसा भगवान।।
आज उनके पुण्य तिथि है
नमन उनके चरणों में।
बने झारखंड सुंदर समृद्ध
उनके आशीष झरनों में।।”
यह कविता धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। कवि ने बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए उनके महान व्यक्तित्व और बलिदान का वर्णन किया है।
कवि कहते हैं कि झारखंड की पवित्र धरती भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि है और 9 जून उनकी पुण्यतिथि का पावन दिन है। बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष किया और अपने तीर-कमान के बल पर विदेशी शासकों को चुनौती दी। उन्होंने आदिवासी समाज तथा वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
कविता में बताया गया है कि बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकार की लड़ाई लड़ी। वे शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों की आवाज बनकर उभरे तथा उन्हें सम्मान और स्वाभिमान दिलाने का कार्य किया। उनके महान कार्यों और संघर्षों के कारण लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक “धरती आबा” और “बिरसा भगवान” के नाम से पुकारते हैं।
कवि उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए प्रार्थना करते हैं कि उनके आशीर्वाद से झारखंड राज्य सुंदर, समृद्ध और खुशहाल बने। अंत में कवि भगवान बिरसा मुंडा के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संदेश देते हैं।
कविता का संदेश
- भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के महान नायक और प्रेरणास्रोत हैं।
- उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
- शोषित और वंचित वर्गों को सम्मान दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- उनके आदर्श आज भी समाज को न्याय, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं।
- उनकी स्मृति में हमें समाज और राष्ट्र के विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।
“जयतु बिरसा भगवान” 🙏🌹
— करुणामय मंडल
पूर्व जिला पार्षद पोटका
पूर्वी सिंहभूम झारखंड





























