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कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य: भावनात्मक खुशहाली की संस्कृति बनाने की जरूरत

On: May 27, 2026 5:46 PM
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टाटा स्टील के चीफ वेलनेस ऑफिसर मुकेश अग्रवाल ने मानसिक स्वास्थ्य पर रखे विचार

जमशेदपुर: आज की तेज़ रफ्तार और डिजिटल दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और भावनात्मक खुशहाली (Emotional Well-being) कार्यस्थलों पर सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो चुके हैं। मई महीने में दुनिया भर में मनाए जाने वाले “मेंटल हेल्थ अवेयरनेस मंथ” के अवसर पर यह संदेश दिया जा रहा है कि मानसिक स्वास्थ्य अब कोई व्यक्तिगत या सीमित विषय नहीं रह गया, बल्कि यह लोगों के जीवन, कामकाज, रिश्तों और प्रदर्शन से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है।

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Tata Steel के चीफ वेलनेस ऑफिसर Mukesh Agarwal ने कहा कि पिछले एक दशक में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जिन विषयों पर लोग खुलकर बात करने से हिचकिचाते थे, आज वही विषय सार्वजनिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल की प्राथमिकता बनते जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। निजी और पेशेवर जीवन की सीमाएं धुंधली पड़ गई हैं, जिससे कर्मचारियों पर काम का दबाव, असुरक्षा, पारिवारिक जिम्मेदारियां और लगातार सूचना के बोझ जैसी नई मानसिक चुनौतियां बढ़ी हैं।

कर्मचारी खुशहाली अब सिर्फ HR का विषय नहीं

मुकेश अग्रवाल के अनुसार, दुनिया भर की कंपनियां अब यह समझने लगी हैं कि कर्मचारियों की खुशहाली केवल HR विभाग या स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व, व्यापार और संगठनात्मक संस्कृति से जुड़ा अहम मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि अब मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि “भावनात्मक खुशहाली”, “लचीलापन”, “खुशी” और “मनोवैज्ञानिक सुरक्षा” जैसे सकारात्मक पहलुओं पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे लोगों में झिझक कम हो रही है और वे खुलकर मदद लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

टाटा स्टील की पहल

मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता महीने की शुरुआत में टाटा स्टील द्वारा “साइंस ऑफ हैप्पीनेस” (Science of Happiness) विषय पर एक वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें माइंडफुल लिविंग और भावनात्मक मजबूती पर चर्चा हुई।

इसके बाद “हैप्पीनेस रिचार्ज” नाम से 15 दिनों का वेलनेस चैलेंज चलाया गया। इस अभियान में कर्मचारियों को रोजमर्रा की छोटी लेकिन सकारात्मक आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जैसे:

  • आभार व्यक्त करना
  • माइंडफुल ब्रेक लेना
  • परिवार के साथ समय बिताना
  • दयालुता के छोटे कार्य करना

इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए 24×7 Employee Assistance Programme और गोपनीय काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

सहानुभूति और विश्वास से बनेगा बेहतर कार्यस्थल

मुकेश अग्रवाल ने कहा कि भविष्य के कार्यस्थलों में केवल संकट आने पर प्रतिक्रिया देने से काम नहीं चलेगा। कंपनियों को ऐसे माहौल तैयार करने होंगे जहां कर्मचारी बिना डर और झिझक के अपनी समस्याओं पर बात कर सकें और मदद मांग सकें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मानसिक खुशहाली केवल नीतियों से नहीं आएगी, बल्कि इसे कार्यस्थल की संस्कृति में शामिल करना होगा। इसके लिए सहानुभूति, विश्वास, समावेशिता और मानवीय संबंध सबसे जरूरी हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि जो संगठन प्रदर्शन के साथ इंसानियत को भी महत्व देंगे, वही भविष्य में मजबूत, खुशहाल और अधिक संवेदनशील कार्यस्थलों और समाज का निर्माण कर पाएंगे।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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