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Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा को नम आंखों से दी गई बिदाई

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On: April 7, 2026 11:14 PM
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Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा का निधन होते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। डॉक्टर ब्रह्म दत्त शर्मा जी, जिन्हें सब प्यार से डॉ. बी. डी. शर्मा कहते थे, अपने ब्रह्म निवास पर 3:00 बजे दुनिया को अलविदा कह गए। उनका जाना शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इस Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा को नम आंखों से दी गई बिदाई के मौके पर हम उनके जीवन, संघर्षों और योगदान को करीब से जानेंगे। आइए, इस विशेष लेख में उनके जीवन की झलक देखें और समझें कि क्यों वे एक प्रेरणा स्रोत बने रहे।

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डॉक्टर बी डी शर्मा का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा के प्रति समर्पण

डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उनका मन हमेशा से शिक्षा और समाज सेवा की ओर झुका रहा। बचपन से ही वे किताबों के प्रति आकर्षित थे। Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद शिक्षक बनने का फैसला किया। 1960 में वे गुरु नानक स्कूल, मानगो से एक साधारण शिक्षक के रूप में जुड़े। वहां उन्होंने कड़ी मेहनत से प्रधानाचार्य के पद तक का सफर तय किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी रुकने वाले नहीं थे वे। उन्होंने Govind विद्यालय की स्थापना की, जो आज क्षेत्र का एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है।

उनका मानना था कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम है। डॉ. शर्मा जी बच्चों को हमेशा नैतिक मूल्यों, अनुशासन और समाज सेवा की प्रेरणा देते थे। उनके Govind विद्यालय में हर बच्चा एक परिवार का सदस्य लगता था। वे कहते थे, “शिक्षा वह दीपक है जो अंधेरे को दूर कर समाज को नई दिशा देती है।” इस तरह, Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा ने शिक्षा को एक मिशन बना दिया। उनके प्रयासों से सैकड़ों बच्चे आज समाज में सम्मानित पदों पर हैं।

उनके शिक्षण शैली की खासियतें

डॉ. शर्मा जी की शिक्षण शैली अनोखी थी। वे क्लासरूम को जीवंत बनाते थे। कहानियों, उदाहरणों और व्यावहारिक गतिविधियों से बच्चों को पढ़ाते। खेल-कूद को भी शिक्षा का हिस्सा मानते थे। Govind विद्यालय में बास्केटबॉल कोर्ट हो या साहित्यिक कार्यक्रम, सब कुछ उनके सपनों का हिस्सा था। वे रिटायर्ड होने के बाद भी सुबह-सुबह विद्यालय पहुंचते और बच्चों से बातचीत करते। उनका यह समर्पण आज भी याद किया जाता है।

साहित्य और पत्रकारिता में योगदान

Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि साहित्यकार भी थे। उन्होंने कई वर्षों तक राजस्थानी पत्रिका कुरजां का संपादन किया। इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने राजस्थानी भाषा, संस्कृति और लोकगीतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनके संपादकीय लेख समाज के विभिन्न मुद्दों पर गहन चिंतन करते थे। शिक्षा, समाज सुधार और सांस्कृतिक संरक्षण पर उनके लेख आज भी प्रासंगिक हैं।

डॉ. शर्मा जी को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिले। वे सम्मेलनों में वक्ता के रूप में आमंत्रित होते। कुरजां पत्रिका के जरिए उन्होंने युवाओं को लेखन के प्रति प्रोत्साहित किया। मानगो क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया। उनके निधन पर साहित्य जगत ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा को नम आंखों से दी गई बिदाई में साहित्यकारों की उपस्थिति इसका प्रमाण है।

प्रमुख प्रकाशन और सम्मान

  • कुरजां पत्रिका: कई वर्षों तक संपादन, जिसमें 100 से अधिक अंक प्रकाशित।
  • पुरस्कार: राज्य स्तर के शिक्षा पुरस्कार और साहित्य सम्मान।
  • पुस्तकें: शिक्षा और राजस्थानी साहित्य पर कई ग्रंथ लिखे।

ये योगदान उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व बनाते हैं।

निधन की खबर और शोक सभा

3 अप्रैल को दोपहर 3:00 बजे ब्रह्म निवास पर Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा का देहांत हो गया। यह खबर फैलते ही पूरे मानगो और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। ऑल इंडिया बास्केटबॉल कोच जेपी सिंह, मानगो नगर निगम के ब्रांड एम्बेसडर मुख्तार आलम खान, केंद्रीय शांति समिति के सदस्य मोहम्मद मोइनुद्दीन अंसारी, ह्यूमन वेलफेयर ट्रस्ट के शाहिद परवेज, डॉक्टर ताहिर हुसैन, रिटायर्ड शिक्षक खुर्शीद अखमद खान, कांग्रेस नेता शानूर रहमान ने अंतिम यात्रा में भाग लिया।

शहर के प्रमुख व्यक्तियों ने भी शोक व्यक्त किया। केरल पब्लिक स्कूल की एक्स प्रिंसिपल अलका सिंहा, करीम सिटी कॉलेज बीएड की इंचार्ज सुचेता भुइयां, अहसीन इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर आसिफ महमूद, आजादनगर थाना प्रभारी चंदन कुमार, कॉमी तंजीम के ब्यूरो चीफ शाकिर अज़ीमाबादी, नारबेराम स्कूल की शिक्षिका सुचित्रा राय ने गहरा शोक प्रकट किया। Govind विद्यालय परिवार ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरा क्षेत्र मानो ठहर सा गया था।

प्रमुख हस्तियों के श्रद्धांजलि संदेश

जेपी सिंह ने कहा, “डॉ. शर्मा जी बास्केटबॉल के भी कोच थे, उनके बिना खेल का मैदान सूना लगेगा।” मुख्तार आलम खान बोले, “समाज सेवा के सच्चे सिपाही खो दिए।” इस तरह, हर किसी ने उनके सिद्धांतों और आदर्शों को याद किया।

समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में योगदान

डॉ. बी. डी. शर्मा जी समाजसेवी के रूप में भी प्रसिद्ध थे। वे विभिन्न ट्रस्टों और समितियों से जुड़े रहे। Govind विद्यालय को उन्होंने समाज सुधार का केंद्र बनाया। गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा, खेल सुविधाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम उनके प्रयासों का नतीजा थे। मानगो नगर निगम और शांति समितियों में उनकी सलाह महत्वपूर्ण रही।

वे पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और अल्पसंख्यक कल्याण के पक्षधर थे। रिटायरमेंट के बाद भी सक्रिय रहे। Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा ने हमेशा कहा, “समाज सेवा ही सच्ची शिक्षा है।” उनके इस दर्शन ने कई युवाओं को प्रेरित किया। शिक्षा जगत में वे एक कीमती सितारे थे, जिनका जाना सबको स्तब्ध कर गया।

प्रमुख समाजसेवी कार्य

  • गरीब छात्रों के लिए स्कॉलरशिप योजना।
  • खेल और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन।
  • शांति समितियों में योगदान।
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Govind विद्यालय का भविष्य और उनकी विरासत

Govind विद्यालय आज डॉ. शर्मा जी की देन है। उनकी विरासत को संभालने के लिए विद्यालय परिवार संकल्पित है। नए प्रबंधन ने वादा किया है कि उनके सपनों को पूरा करेंगे। आधुनिक शिक्षा, डिजिटल क्लासरूम और खेल सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा। Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा को नम आंखों से दी गई बिदाई के बाद भी उनका प्रभाव बना रहेगा।

छात्र-छात्राएं उनके नाम पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। साहित्य और शिक्षा पर उनके विचारों को पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाएगा। यह विरासत सदियों तक चलेगी।

Govind विद्यालय के संस्थापक डॉक्टर बी डी शर्मा को नम आंखों से दी गई बिदाई ने हमें सिखाया कि महान लोग कभी नहीं मरते, वे अपनी विरासत में जीते हैं। डॉ. ब्रह्म दत्त शर्मा जी जैसे व्यक्तित्व दुर्लभ होते हैं। उनके सिद्धांत, आदर्श और विचार आज भी प्रेरणा देते हैं। शिक्षा जगत ने एक कीमती सितारा खो दिया, लेकिन Govind विद्यालय उनकी मशाल जलाए रखेगा।

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