मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

Yug-चारण माखनलाल चतुर्वेदी साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: April 4, 2026 10:26 PM
Follow Us:
Yug
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

पत्रकारिता कवि:आज जब हम स्वतंत्र भारत के गौरवशाली अतीत को याद करते हैं, तो माखनलाल चतुर्वेदी जैसे Yug पुरुषों का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी ने साहित्य की कोमलता, पत्रकारिता की निर्भीकता और राष्ट्रीय चेतना की ज्वाला से देश को आलोकित किया। 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के बाबई में जन्मे ये महान कवि-देशभक्त आज भी अपनी रचनाओं से हमें प्रेरित करते हैं। साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक के रूप में उनका जीवन एक जीवंत दस्तावेज है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। इस ब्लॉग में हम Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन, संघर्षों और योगदान को विस्तार से जानेंगे।

A 2

माखनलाल चतुर्वेदी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। होशंगाबाद जिले के बाबई गांव में 4 अप्रैल 1889 को उनका आगमन हुआ। बचपन से ही स्वाध्यायी स्वभाव के थे। औपचारिक शिक्षा सीमित रही, लेकिन उन्होंने संस्कृत, बंगाली, गुजराती और अंग्रेजी भाषाओं का गहन अध्ययन किया। मात्र 16 वर्ष की उम्र में शिक्षक बन गए, लेकिन राष्ट्रसेवा का जज्बा उन्हें अध्यापन से अलग ले गया।

उनके जीवन की शुरुआत संघर्षपूर्ण रही। 1907 में खंडवा तबादले के बाद हिंदी काव्य जगत में नाम कमाया। आठ वर्ष अध्यापन करने के बाद नौकरी छोड़ साहित्य और पत्रकारिता को समर्पित हो गए। विवाह 15 वर्ष की आयु में हो गया, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियां उन्हें राष्ट्रहित से कभी विचलित न होने दी। राष्ट्रीय चेतना के साधक बनने का सफर यहीं से शुरू हुआ।

साहित्यिक योगदान राष्ट्रभक्ति का ओजस्वी स्वर

Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, प्रकृति चित्रण और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम संगम है। प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ मातृभूमि के लिए बलिदान की भावना का प्रतीक है। इसमें फूल की अभिलाषा के माध्यम से देशसेवा का संदेश है।

अन्य प्रमुख कृतियां हैं:

  • हिम किरीटिनी – हिमालय की भव्यता और राष्ट्रनिष्ठा का चित्रण।
  • हिम तरंगिणी – 1955 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त।
  • साहित्य देवतायुगचरणदीप से दीप जलेसमर्पण

साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक के रूप में उनकी कविताओं में वीर रस, करुणा और क्रांतिकारी चेतना झलकती है। भाषा सरल, ओजस्वी और प्रभावशाली। छायावादी प्रवृत्ति होते हुए भी राष्ट्रवाद प्रधान रहा।

Yug पत्रकारिता में निर्भीक संघर्ष

Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को राष्ट्रजागरण का हथियार बनाया। 1913 में ‘प्रभा’ पत्रिका का संपादन शुरू किया। गणेश शंकर विद्यार्थी से प्रेरित होकर ब्रिटिश शासन का खुला विरोध किया। राजद्रोह के आरोप में जेल यात्राएं सहीं।

फिर ‘प्रताप’ और ‘कर्मवीर’ का संपादन संभाला। 1924 में विद्यार्थी की गिरफ्तारी के बाद ‘प्रताप’ की कमान थामी। उनकी लेखनी अन्याय के विरुद्ध साहस का प्रतीक बनी। हिंदी साहित्य सम्मेलन और संपादक सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे। पत्रकारिता केवल समाचार न होकर राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनी।

स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका

राष्ट्रीय चेतना के साधक माखनलाल चतुर्वेदी गांधीजी से प्रभावित थे। असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में भाग लिया। कई बार जेल गए। क्रांतिकारी साहस के साथ अहिंसक संघर्ष को अपनाया। ‘प्रभा’ पर पाबंदी लगने के बाद भी स्वदेश संदेश पहुंचाया।

उनकी कविताएं स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा बनीं। “जाओ, जाओ, जाओ प्रभु को पहुँचाओ स्वदेश संदेश” जैसी पंक्तियां ब्रिटिश अत्याचारों के विरुद्ध ज्वाला जगाती हैं। कांग्रेस के कार्यों में सक्रिय रहे।

सम्मान और विरासत1963 में पद्मभूषण मिला, लेकिन हिंदी की उपेक्षा के विरोध में लौटा दिया।

मध्य प्रदेश सरकार ने उनके नाम पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय स्थापित किया। 30 जनवरी 1968 को भोपाल में निधन।

उनका काव्य आज भी प्रासंगिक। देशप्रेम, प्रकृति प्रेम, सामाजिक चेतना और भावुकता का समन्वय है।

आज के दौर में प्रासंगिकता

आज जब साहित्य और पत्रकारिता चुनौतियों से घिरी हैं, Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी साहस सिखाते हैं। उनकी लेखनी फेक न्यूज और विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध हथियार है। युवा पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाती हैं। साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक का जीवन हमें बताता है कि सच्चाई कभी पराजित नहीं होती।

उदाहरणस्वरूप, ‘पुष्प की अभिलाषा’ आज भी स्कूलों में पढ़ी जाती है, जो बलिदान की भावना जगाती है। उनकी रचनाएं सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक का जीवंत उदाहरण है। उनकी लेखनी ने गुलामी की जंजीरें तोड़ीं और स्वतंत्रता का द्वार खोला। आज भी साहित्य, पत्रकारिता और राष्ट्रीय चेतना के साधक के रूप में वे प्रेरित करते हैं। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को साहस देंगी। Yug -चारण माखनलाल चतुर्वेदी अमर रहें!

THE NEWS FRAME

वरुण कुमार
लेखन एवं कवि

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

और पढ़ें

Leave a Comment

Link copied