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बिहार में औद्योगिक जागृति की राह में ‘खौफ का काला साया’ – निशिकांत ठाकुर

On: July 28, 2025 10:16 PM
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पटना: बिहार की राजधानी पटना में उद्योगपति गोपाल खेमका की सरेशाम गोली मारकर की गई हत्या ने न केवल राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि औद्योगिक विकास की उम्मीदों को भी करारा झटका दिया है। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बिहार में कभी सुरक्षित और स्थायी औद्योगिक वातावरण बन पाएगा?

बाहुबलियों के डर में घुटता उद्योग जगत

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गोपाल खेमका की निर्मम हत्या से एक बार फिर यह बात उजागर हुई है कि राज्य में अपराधियों का हौसला कितना बुलंद है। यह पहली बार नहीं है जब खेमका परिवार को निशाना बनाया गया। कुछ वर्षों पहले उनके बेटे की भी इसी तरह हत्या की गई थी। अब उनकी भी सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई।

यह साफ दर्शाता है कि प्रशासनिक व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी खामी है।

सवाल यह है कि:  हत्याएं रोकने के लिए खुफिया तंत्र क्या कर रहा है?

अपराधी खुलेआम अस्पतालों और सड़कों पर गोलियां बरसाकर निकल जाते हैं और सुरक्षा व्यवस्था नाकाम दिखती है?

क्या बिहार में उद्योग लगाना ‘जान का सौदा’ है?

बिहार में निवेश को लेकर देश के अन्य राज्यों के उद्योगपतियों की राय भी चिंताजनक है। एक बाहरी राज्य के कारोबारी ने बताया कि वे बिहार में युवाओं के लिए एक रोजगारपरक परियोजना शुरू करना चाहते थे, लेकिन हाल की घटनाओं ने उन्हें निर्णय बदलने पर मजबूर कर दिया।

गुंडा टैक्स, जबरन वसूली, और जान का डर… यह सब किसी भी उद्यमी को बिहार में निवेश करने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर करता है।

युवाओं का भविष्य और पलायन की मजबूरी

राज्य के पूर्व उद्योग मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार अब नए सरकारी उद्योग नहीं खोलती। ऐसे में प्राइवेट उद्योगों को ही आगे आना होगा, लेकिन जब तक राज्य में कानून-व्यवस्था, बिजली, सड़क, सुरक्षा और टैक्स की स्पष्ट नीति नहीं होगी, कोई भी बड़ा निवेशक यहां आने का जोखिम नहीं लेगा।

बिहार के लाखों युवा आज देश के अन्य राज्यों में मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं, और कई बार अपमान भी झेल रहे हैं। यह स्थिति तब बदल सकती थी, अगर बिहार में ही पर्याप्त उद्योग विकसित हुए होते।

अन्य राज्यों से सीखने की जरूरत

महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य इसलिए विकसित हुए क्योंकि वहां सरकार, समाज और उद्योगपतियों ने मिलकर औद्योगिक क्रांति को अपनाया। वहां का प्रशासन उद्योगपतियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं बिहार में, राजनीतिक अस्थिरता और अपराध-प्रशासन गठजोड़ औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

बदलाव जरूरी है, वरना…

बिहार में औद्योगिक विकास तभी संभव होगा जब राज्य की सरकार:

  • अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे,
  •  पुलिस-प्रशासन को जवाबदेह बनाए,
  •  उद्योगों के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करे।

शिक्षा, ईमानदारी और सुशासन – यही वो तीन स्तंभ हैं जो बिहार को फिर से जागरूक और समृद्ध बना सकते हैं।

विशेष बिंदु:

  • राज्य में लगातार हो रही हत्याएं उद्योगों के लिए खतरे की घंटी
  •  निवेशकों में भय, योजनाएं बदलने को मजबूर
  •  बिहार के युवाओं का पलायन जारी रहेगा अगर ठोस बदलाव नहीं लाया गया

सवाल यही है: कब बदलेगा बिहार?

 लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार और स्‍तंभकार हैं। यह रिपोर्ट उनके मूल लेख पर आधारित है, जिसमें बिहार के औद्योगिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

– निशिकांत ठाकुर के लेख पर आधारित विशेष रिपोर्ट

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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