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SANSKAR: ‘संस्कार जीवन आर्ष कन्या गुरुकुल, गौरी गांव की बालिकाएं पहुंचीं चांडिल डैम

On: July 15, 2025 9:47 PM
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SANSKAR: ‘संस्कार जीवन आर्ष कन्या गुरुकुल, गौरी गांव की बालिकाएं पहुंचीं चांडिल डैम

Sanskar: संस्कार जीवन आर्ष कन्या गुरुकुल, गौरी (कपाली, चांडिल) इसी उद्देश्य के साथ संचालित हो रहा है, जहां बालिकाओं को न केवल शास्त्रीय ज्ञान बल्कि जीवन के हर पहलू से जोड़ने वाली शिक्षा दी जाती है।

संस्कार, संस्कृति और शिक्षा – जब यह तीनों तत्व मिलते हैं, तो केवल पढ़ाई नहीं, जीवन जीने की कला सिखाई जाती है।

हाल ही में गुरुकुल की सभी कन्याओं को चांडिल डैम का शैक्षिक परिदर्शन कराया गया, जिसमें उनके साथ गुरुकुल की आचार्या श्रीमती शेफाली शास्त्री, आचार्य पंडित रत्नाकर शास्त्री और अन्य सहयोगी भी उपस्थित थे।

प्रकृति के सान्निध्य में ज्ञान का अनुभव- चांडिल डैम, केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि झारखंड की प्रकृति और मानव निर्माण की संतुलित मिसाल है।

THE NEWS FRAME
SANSKAR: ‘संस्कार जीवन आर्ष कन्या गुरुकुल, गौरी गांव की बालिकाएं, आचार्या श्रीमती शेफाली शास्त्री जी के चरणस्पर्श करते हुए।
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बालिकाओं ने इस परिदर्शन के दौरान:

  • जल संरक्षण की महत्ता को प्रत्यक्ष रूप से देखा,
  •  बांध के कार्यप्रणाली को जाना,
  •  नदी, जलचक्र और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों को सजीव रूप में समझा। 

इस अनुभव ने उनके पाठ्यक्रम को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि जीवनोपयोगी शिक्षा से समृद्ध किया।

 Sanskar और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा

गुरुकुल की आचार्या श्रीमती शेफाली शास्त्री ने इस अवसर पर कहा:

“हमारा उद्देश्य केवल शास्त्र पढ़ाना नहीं, बल्कि कन्याओं को इस योग्य बनाना है कि वे आधुनिक समाज में भी अपने मूल्यों और संस्कृति से जुड़े रहें।”

आचार्य पंडित रत्नाकर शास्त्री ने कहा:

“कन्याओं को प्रकृति, समाज और संस्कृति – तीनों से जोड़ा जाए, यही सच्चा शिक्षा संकल्प है।”

क्या था इस परिदर्शन का उद्देश्य?

1. प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता को समझाना

2. सामूहिकता और अनुशासन का अभ्यास कराना

3. बाहरी दुनिया से संवाद और समझ को बढ़ाना

4. स्त्री शिक्षा को सशक्तिकरण की दिशा देना

5. जीवन में संतुलन, सदाचार और विवेक का भाव जाग्रत करना

बालिकाओं के अनुभव

परिदर्शन के बाद कई कन्याओं ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतने बड़े बांध को देखा और जाना कि पानी के सही प्रबंधन से कैसे गांव-गांव में जीवन बहता है। कई बालिकाओं ने चित्र बनाकर और अनुभव साझा करके इस परिदर्शन को यादगार बना दिया।

संस्कार और समर्पण से ही बनता है सशक्त समाज

 गुरुकुलों की परंपरा भारत की आत्मा रही है। आज जब दुनिया आधुनिकता की दौड़ में नैतिकता से दूर जा रही है, ऐसे में संस्कार जीवन आर्ष कन्या गुरुकुल, गौरी जैसी संस्थाएं हमारे समाज की संस्कारशील नींव को मजबूत कर रही हैं।

यह परिदर्शन सिर्फ एक भ्रमण नहीं था, यह एक संदेश था –

“शिक्षा वही जो जीवन को गढ़े, और संस्कृति वही जो आत्मा को निखारे।”

गुरुकुल की यह पहल बालिकाओं को संवेदनशील, संस्कारित और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम है। ऐसे प्रयासों को और बढ़ावा देना आज की जरूरत है, ताकि अगली पीढ़ी ज्ञान के साथ-साथ मूल्यों से भी युक्त हो।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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