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गोप समुदाय के परिवारों पर Social Boycott: मौलिक अधिकारों का गंभीर हनन, उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन

On: July 13, 2025 9:22 AM
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गोप समुदाय के परिवारों पर Social Boycott: मौलिक अधिकारों का गंभीर हनन, उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन

Social Boycott: जिले के चक्रधरपुर प्रखंड के गुलकेड़ा पंचायत अंतर्गत चिरूबेड़ा गांव के लुपुंगबेड़ा टोला में गोप (ग्वाला) समुदाय के करीब 10 गरीब परिवारों को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि ग्राम मुण्डा बागुन जामुदा द्वारा ढाकुवा के माध्यम से उनके ऊपर असंवैधानिक और अमानवीय प्रतिबंध थोपे गए हैं, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।

Social Boycott: बातचीत, दुकान, स्कूल, पूजा – सब कुछ पर पाबंदी

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आवेदन में बताया गया है कि पीड़ित परिवारों को निम्नलिखित कार्यों से रोका गया है:

  • ग्रामीणों से बातचीत और लेनदेन पर रोक
  • गांव की दुकानों से खरीदारी पर मनाही
  • विद्यालय में Mid-Day Meal पकाने पर रोक
  • धार्मिक पूजा-पाठ में भागीदारी या आयोजन पर प्रतिबंध
  • किसी दस्तावेज़ में हस्ताक्षर कराने की मनाही
  • रैयती जमीन पर चलना, शौच जाना और पशु चराना मना
  • जंगल से लकड़ी लाना वर्जित
  • निजी व्यवसाय शुरू करने से मना
  • कब्रिस्तान के उपयोग और नदी से पानी लेने पर रोक

Social Boycott: आर्थिक दंड भी, मानसिक प्रताड़ना भी

इन आदेशों का उल्लंघन करने पर ₹5,000 से ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। अब तक तीन लोगों से दंड वसूला जा चुका है। भोजन, जल और शौच जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए परिवारों को अन्य गांवों का रुख करना पड़ रहा है। इससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।

Social Boycott: संविधान और मानवाधिकारों की खुली अवहेलना

यह सामाजिक बहिष्कार भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में वर्णित अधिकारों जैसे समानता का अधिकार, जीवन जीने का अधिकार, आजीविका का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है। जातीय पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति या समुदाय को इस तरह बहिष्कृत करना अमानवीय और आपराधिक कृत्य है।

जिला प्रशासन और मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग

पीड़ितों ने उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तत्काल निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को संरक्षण और पुनर्वास दिलाने की मांग की गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी, चक्रधरपुर थाना, पुलिस निरीक्षक और झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग को भी प्रेषित की गई है।

आजादी के 75 वर्षों बाद भी असंवैधानिक दबाव

ज्ञापन में कहा गया है कि

आज भी कुछ लोग संविधान से ऊपर खुद को समझकर दूसरों पर तानाशाही तरीके से नियम थोप रहे हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत में कोई भी नागरिक अपनी मर्जी से जीने और रोज़गार करने से रोका नहीं जा सकता। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे असंवैधानिक कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे ताकि भविष्य में किसी निर्दोष समुदाय को इस प्रकार के सामाजिक बहिष्कार का सामना न करना पड़े।

रिपोर्ट: जय कुमार, चक्रधरपुर

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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