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जम्मू-कश्मीर ने भारत के चुनावी इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।

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On: May 28, 2024 5:00 PM
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जम्मू-कश्मीर ने भारत के चुनावी इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।
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पिछले 35 वर्षों में किसी आम चुनाव में सबसे अधिक मतदान के साथ जम्मू-कश्मीर ने भारत के चुनावी इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी है।

कश्मीर घाटी में वर्ष 2019 की तुलना में इस बार चुनावी भागीदारी में तुलनात्मक रूप से 30 अंकों की भारी बढ़ोतरी देखी गई।

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आम चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के लोगों की सक्रिय भागीदारी इस केंद्र-शासित प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ी सकारात्मक बात है।

जम्मू-कश्मीर के लोगों ने लोकतंत्र को गले लगाया है और शासन में अपनी हिस्सेदारी का दावा किया है।

लोकसभा चुनाव 2024:भारत की चुनावी राजनीति में एक बड़ी छलांग लगाते हुए, जम्मू और कश्मीर में पिछले 35 वर्षों में सबसे अधिक मतदान हुआ है। आम चुनाव 2024 में केंद्र शासित प्रदेश (5 लोकसभा सीटों) के मतदान केंद्रों पर कुल मिलाकर 58.46 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनाव में यह महत्वपूर्ण मतदान क्षेत्र के लोगों की मजबूत लोकतांत्रिक भावना और नागरिक भागीदारी का प्रमाण है। मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों श्री ज्ञानेश कुमार और श्री सुखबीर सिंह संधू के साथ केंद्र शासित प्रदेश में शांतिपूर्ण मतदान कराने के लिए मतदान कर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

चुनाव आयोग की ओर से जम्मू-कश्मीर के मतदाताओं को बधाई देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री राजीव कुमार ने कहा, “यह उपलब्धि 2019 के बाद चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि, सी-विजिल शिकायतों में नागरिकों की बढ़ी हुई भागीदारी, सुविधा पोर्टल पर रैलियों के लिए 2455 अनुरोधों आदि की मजबूत नींव पर आधारित है, जो लगातार मतदान और प्रचार के क्षेत्र में झिझक से लेकर पूर्ण भागीदारी तक के तेज़ बदलाव को दर्शाता है। चुनावी लामबंदी और भागीदारी की स्तरित गहराई के साथ इस परिणाम की तुलना कश्मीरी कारीगर बुनकरों की प्रसिद्धि और कौशल की याद दिलाती है। चुनाव में यह सक्रिय भागीदारी राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक बहुत बड़ी सकारात्मक बात है।”

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 5 संसदीय क्षेत्र अर्थात् श्रीनगर, बारामूला, अनंतनाग राजौरी, उधमपुर और जम्मू हैं। पिछले कुछ चुनावों में इन 5 संसदीय क्षेत्रों में संयुक्त वीटीआर नीचे दिया गया है:

तुलना के लिए लद्दाख संसदीय सीट को हटा दिया गया है जो पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था।

ग्राफ़ 1996-2019 के लिए सकल वीटीआर दर्शाता है; 2024 के लिए मतदान केंद्रों पर वीटीआर उपलब्ध है

कश्मीर घाटी के तीन संसदीय क्षेत्रों में 50.86 प्रतिशत मतदान हुआ, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की आस्था को दर्शाता है। 2019 के पिछले आम चुनाव में 19.16 प्रतिशत की तुलना में चुनाव भागीदारी प्रतिशत में 30 अंकों की वृद्धि देखी गई। घाटी के तीन संसदीय क्षेत्रों श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग-राजौरी में क्रमशः 38.49 प्रतिशत, 59.1 प्रतिशत और 54.84 प्रतिशत वीटीआर दर्ज किया गया, जो पिछले 3 दशकों में सबसे अधिक है। केंद्र शासित प्रदेश के अन्य दो संसदीय क्षेत्रों उधमपुर और जम्मू में क्रमशः 68.27 प्रतिशत और 72.22 प्रतिशत मतदान हुआ।

ध्यान दें: परिसीमन प्रक्रिया के कारण, इन संसदीय क्षेत्रों के लिए पिछले चुनावों से मतदाता मतदान संबंधी आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं हो सकती है।

ग्राफ़ 1996-2019 के लिए सकल वीटीआर को दर्शाता है; 2024 के लिए मतदान केंद्रों पर वीटीआर उपलब्ध है

केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों में ऐतिहासिक मतदान चुनाव और सुरक्षा अधिकारियों के ईमानदार प्रयासों के कारण संभव हुआ, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों, खासकर युवाओं को चुनाव में भाग लेने के लिए सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास किए। बड़ी संख्या में युवाओं ने लोकतंत्र में आस्था व्यक्त की है और बड़े पैमाने पर लोकतंत्र को अपनाया है। एक और दिलचस्प परिप्रेक्ष्य 18 से 59 वर्ष की आयु के मतदाताओं का है, जो केंद्र शासित प्रदेश में मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा हैं। आम चुनाव 2024 में उच्च मतदान प्रतिशत लोकतंत्र में उनकी आस्था को दर्शाता है जो एक सकारात्मक और सुखद बदलाव है।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मूकश्मीर में पंजीकृत निर्वाचकों का आयुवार विवरण (किसी संसदीय क्षेत्र में कुल निर्वाचकों का प्रतिशत)

आयु समूह बारामूला श्रीनगर अनंतनाग-राजौरी उधमपुर जम्मू
18 – 39 वर्ष  56.02  48.57  54.41  53.57  47.66
40 – 59 वर्ष  30.85  34.87  31.59 32.65  35.28
18 – 59 वर्ष  86.87  83.44  86.00  86.22  82.94
60 वर्ष और अधिक  13.13 16.56 14.00 13.78 17.06

चुनाव आयोग ने दिल्ली, जम्मू और उधमपुर में विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे कश्मीरी प्रवासी मतदाताओं को भी नामित विशेष मतदान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से या डाक मतपत्र का उपयोग करके मतदान करने में सक्षम बनाया है। जम्मू में 21, उधमपुर में 1 और दिल्ली में 4 विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं।

लद्दाख, जिसे 2019 में एक अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में गठित किया गया था, ने भी लोकतंत्र के आह्वान पर उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया दी जो 71.82 प्रतिशत की वीटीआर में परिलक्षित होता है।

प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में पिछले कुछ चुनावों में सकल मतदान प्रतिशत

संसदीय क्षेत्र/वर्ष 2019 2014 2009 2004 1999 1998 1996 1989
श्रीनगर 14.43 प्रतिशत 25.86 प्रतिशत 25.55 प्रतिशत 18.57 प्रतिशत 11.93 प्रतिशत 30.06 प्रतिशत 40.94 प्रतिशत निर्विरोध
बारामूला  34.6 प्रतिशत 39.14 प्रतिशत 41.84 प्रतिशत 35.65 प्रतिशत 27.79 प्रतिशत 41.94 प्रतिशत 46.65 प्रतिशत  5.48 प्रतिशत
अनंतनाग 8.98 प्रतिशत 28.84 प्रतिशत 27.10 प्रतिशत 15.04 प्रतिशत 14.32 प्रतिशत 28.15 प्रतिशत 50.20 प्रतिशत 5.07 प्रतिशत
उधमपुर 70.15 प्रतिशत 70.95 प्रतिशत 44.88 प्रतिशत 45.09 प्रतिशत 39.65 प्रतिशत 51.45 प्रतिशत 53.29 प्रतिशत 39.45 प्रतिशत
जम्मू 72.5 प्रतिशत 67.99 प्रतिशत 49.06 प्रतिशत 44.49 प्रतिशत 46.77 प्रतिशत 54.72 प्रतिशत 48.18 प्रतिशत 56.89 प्रतिशत

जागरूकता और आउटरीच के हिस्से के रूप में, आम चुनाव 2024 के लिए जम्मू-कश्मीर में स्वीप (एसवीईईपी) के हिस्से के रूप में व्यापक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जम्मू-कश्मीर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदान करने का संदेश प्रचारित करने के लिए साहसिक खेल कार्यक्रमों, संगोष्ठियों, जागरूकता रैलियों, नुक्कड़ नाटकों और ऐसे ही कई अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया। विभिन्न प्रयासों के बीच, बारामूला में इग्लू को डमी मतदान केंद्र के रूप में बनाना, कठुआ में पैरा स्कूटर कार्यक्रम, सुचेतगढ़ सीमा पर बीटिंग द रिट्रीट समारोह में जागरूकता, एलओसी के पास टीटवाल में विशाल जागरूकता रैली, श्रीनगर में डल झील के पास किश्तवाड़ चौगान तक जागरूकता रैली और सबसे ऊंचे रेलवे पुल पर निर्वाचन आयोग के गीत का वाद्य संस्करण बजाने जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं। लाल चौक, गुलमर्ग, कुलगाम, अनंतनाग सहित कई स्थानों पर प्रसिद्ध गायकों द्वारा संगीत कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां आयोजित की गईं। इस केंद्र-शासित प्रदेश के कोने-कोने ने लोकतंत्र का कायाकल्प और मतदान में भागीदारी से भारी मतों से मतपत्र की जीत देखी, जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्ड मतदान हुआ।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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