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कपाली थाना में युवती को बेहोश होने तक पीटा, रात 11:00 बजे तक कपाली थाना में रुक-रुक कर पिटाई की गई, 3 पुलिसकर्मी निलंबित

On: June 16, 2026 10:49 PM
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आदिवासी युवती से कथित मारपीट का मामला: कानून की चौखट पर कई गंभीर सवाल

जमशेदपुर, 16 जून। सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली थाना से एक गंभीर मामला सामने आया है। एक आदिवासी युवती ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के बहाने उसे कई घंटों तक थाने में बैठाकर रखा गया और इस दौरान उसके साथ मारपीट की गई। मामला सामने आने के बाद जिले की पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही और अनुचित आचरण की बात सामने आने पर कपाली थाना प्रभारी धीरंजन कुमार, एएसआई मुकलेसुर रहमान तथा महिला आरक्षी कंचन को निलंबित कर दिया गया है।

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मिली जानकारी के अनुसार, कपाली क्षेत्र की रहने वाली करीब 26 वर्षीय अल्पना महाली को रविवार की शाम पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि ब्रह्मानंद फ्लैट्स निवासी फुरकन खान की बेटी तस्कीन खानम पिछले दिनों घर से चली गई थी। इस संबंध में परिजनों ने कपाली थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस को शक था कि अल्पना महाली को तस्कीन के बारे में कुछ जानकारी हो सकती है। इसी आधार पर उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया।

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युवती का आरोप है कि वह शाम करीब छह बजे थाना पहुंची थी। वहां पहुंचने के बाद उससे लगातार सवाल-जवाब किए गए। उसने पुलिस को बताया कि उसे लापता युवती के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद उससे बार-बार एक ही बात पूछी जाती रही। अल्पना का कहना है कि रात बढ़ने के साथ पूछताछ का तरीका भी सख्त होता गया।

रात 11:00 बजे तक कपाली थाना में रुक-रुक कर उसकी पिटाई की गई

पीड़िता के अनुसार, उसे करीब रात 11 बजे तक थाना परिसर में रखा गया। इस दौरान कई बार उससे पूछताछ की गई और उस पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया। युवती का दावा है कि पूछताछ के दौरान महिला आरक्षी और एक पुलिस अधिकारी ने थाना में रुक-रुक कर उसकी पिटाई की। उसने आरोप लगाया कि डंडे से पीठ, जांघ, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किए गए, जिससे उसे काफी चोटें आईं।

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परिजनों का कहना है कि जब युवती घर पहुंची तो वह बेहद डरी हुई और दर्द से परेशान थी। उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। परिवार वालों ने जब उससे पूरी घटना की जानकारी ली तो मामला सामने आया। अगले दिन उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसे इलाज के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद मामले की जानकारी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। बताया जाता है कि एक वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और पीड़िता का बयान दर्ज किया। चिकित्सकों द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। फिलहाल उसका इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि पूछताछ के दौरान किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के दायरे में रहकर व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

महिला का बाइट देखें

उधर, सरायकेला-खरसावां की एसपी निधि द्विवेदी ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद थाना प्रभारी धीरंजन कुमार, एएसआई मुकलेसुर रहमान और महिला आरक्षी कंचन को निलंबित कर दिया गया। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वहीं पीड़िता और उसके परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

संपादकीय संदेश:

कपाली थाना में एक आदिवासी युवती के साथ पूछताछ के दौरान मारपीट किए जाने के आरोप सत्य साबित होते हैं, तो यह मामला बेहद गंभीर है और केवल पुलिसिया दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं माना जा सकता। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है। वहीं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 और सुप्रीम कोर्ट के डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से बताते हैं कि हिरासत या पूछताछ के दौरान किसी व्यक्ति के साथ शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना नहीं की जा सकती। विशेष रूप से जब मामला एक आदिवासी महिला से जुड़ा हो, तब प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनों में विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि किसी आदिवासी महिला को अवैध रूप से घंटों तक थाने में रोककर रखा गया, उसके साथ मारपीट हुई, उसे अपमानित किया गया या उसकी शारीरिक गरिमा को ठेस पहुंचाई गई, तो यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। कानून की रक्षा करने वाली संस्था से समाज को न्याय और सुरक्षा की अपेक्षा होती है, भय और अत्याचार की नहीं। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाना आवश्यक है।

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि एक आदिवासी महिला को सच उगलवाने या जानकारी हासिल करने के नाम पर कथित रूप से प्रताड़ित किया जाए। न्याय तभी सार्थक होगा जब पीड़िता की आवाज सुनी जाए, उसके अधिकारों की रक्षा हो और दोषियों को उनके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना सख्त कानूनी जवाबदेही का सामना करना पड़े।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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