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Kumirmudi गांव से राष्ट्रीय पुरस्कार तक टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से फिल्म निर्माता बने रवि राज मुर्मू की प्रेरणादायक कहानी

On: July 24, 2026 5:13 PM
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झारखंड: के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा स्थित छोटे से गांव Kumirmudi में जन्मे रवि राज मुर्मू ने बचपन से ही बड़े सपने देखने की हिम्मत दिखाई। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद उन्होंने अपने जुनून और मेहनत के दम पर भारतीय फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। आज रवि एक सफल फिल्ममेकर, वीडियो एडिटर और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे उनकी लगन के साथ-साथ टाटा स्टील फाउंडेशन का निरंतर सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।

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24 जुलाई 2026 को साझा की गई उनकी सफलता की कहानी न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

2008 में ज्योति फेलोशिप से शुरू हुआ सफर

रवि राज मुर्मू का टाटा स्टील फाउंडेशन से जुड़ाव वर्ष 2008 में शुरू हुआ, जब उनका चयन ज्योति फेलोशिप के लिए हुआ। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें माध्यमिक शिक्षा के दौरान शैक्षणिक सहायता, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला।

इस सहयोग ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद रवि ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया और वीडियो प्रोडक्शन को अपना विशेषज्ञता विषय चुना। यहीं से उनके फिल्म निर्माण के सपने को नई दिशा मिली।

समुदाय के साथ पहल ने दिखाई नई राह

मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान रवि की मुलाकात टाटा स्टील फाउंडेशन की महत्वपूर्ण पहल ‘समुदाय के साथ (Samuday Ke Saath – SKS)’ से हुई।

यह पहल सिनेमा के माध्यम से भारत के आदिवासी और स्वदेशी समुदायों की कहानियों, संस्कृति और जीवन को सामने लाने का कार्य करती है।

रवि ने इस मंच के माध्यम से अपनी पहली फिल्मों का प्रदर्शन किया। उनकी एक फिल्म को कम्युनिटी कैटेगरी में पुरस्कार भी मिला। यह सम्मान उनके लिए बेहद खास था क्योंकि इसी ने उन्हें फिल्म निर्माण को अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।

प्रतिभागी से मेंटर बनने तक का सफर

समय के साथ रवि का संबंध केवल प्रतिभागी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने SKS कार्यक्रम में मेंटोर की भूमिका भी निभाई।

उन्होंने नए फिल्म निर्माताओं को मार्गदर्शन दिया और अपने अनुभव साझा किए। इस मंच ने उन्हें देशभर के फिल्म निर्माताओं से जुड़ने, उद्योग विशेषज्ञों से सीखने और नई तकनीकों को समझने का अवसर दिया।

रवि का मानना है कि SKS ने उन्हें केवल मंच ही नहीं दिया, बल्कि एक ऐसा परिवार दिया जिसने हर कदम पर उनका साथ निभाया।

टाटा स्टील फाउंडेशन के साथ इंटर्नशिप से मिला वास्तविक अनुभव

रवि ने टाटा स्टील रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (TSRDS), जो अब टाटा स्टील फाउंडेशन के नाम से जानी जाती है, में इंटर्नशिप भी की।

इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया और वहां चल रही विकास परियोजनाओं का दस्तावेजीकरण किया। समुदायों के बीच रहकर उन्होंने महसूस किया कि कैमरे के माध्यम से समाज की वास्तविक कहानियों को दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।

यहीं से उनकी सोच और अधिक परिपक्व हुई और उन्होंने तय कर लिया कि वे फिल्मों के माध्यम से समाज की आवाज बनेंगे।

फिल्म निर्माण के सपने को पूरा करने के लिए किया लगातार संघर्ष

रवि ने अपने करियर में कई तरह के कार्य किए। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई, वेडिंग फोटोग्राफी की और साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी की।

उन्हें प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश भी मिला, लेकिन उनका दिल हमेशा फिल्म निर्माण में ही लगा रहा। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपने सपने को नहीं छोड़ा।

उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन ने उनका सहयोग जारी रखा।

टाटा स्टील स्कॉलर बनकर पहुंचे FTII पुणे

टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से रवि को टाटा स्टील स्कॉलर बनने का अवसर मिला।

इसके बाद उनका चयन भारत के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों में से एक फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे में हुआ।

यहां उन्होंने फिल्म निर्माण में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। FTII में अध्ययन के दौरान उन्होंने सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, पटकथा लेखन और निर्देशन की बारीकियां सीखीं।

नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टार और अमेज़न प्राइम वीडियो के साथ किया काम

शिक्षा पूरी करने के बाद रवि ने कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

उन्होंने डॉक्यूमेंट्री, रिसर्च आधारित फिल्में, प्रमोशनल वीडियो और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनकी एडिटिंग क्षमता ने उन्हें देश की प्रमुख प्रोडक्शन कंपनियों के साथ काम करने का अवसर दिया।

उन्होंने एसोसिएट एडिटर और ट्रेलर एडिटर के रूप में Netflix, Jio Hotstar और Amazon Prime Video जैसे विश्वस्तरीय मनोरंजन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी काम किया।

इन परियोजनाओं ने उनके अनुभव और रचनात्मकता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

आंगेन फिल्म से मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

वर्ष 2026 रवि राज मुर्मू के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ।

उनकी फिल्म ‘आंगेन (Angen)’, जो आदिवासी संस्कृति और जीवन पर आधारित थी, को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से सम्मानित किया गया।

यह उपलब्धि केवल रवि के लिए नहीं बल्कि पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय बनी।

फिल्म ने यह साबित किया कि स्थानीय कहानियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों के दिलों को छू सकती हैं।

रवि राज मुर्मू ने टाटा स्टील फाउंडेशन के लिए जताया आभार

अपनी सफलता पर रवि कहते हैं कि टाटा स्टील फाउंडेशन हमेशा उनके लिए एक परिवार की तरह रहा।

उनके अनुसार, जब भी उन्हें शिक्षा, करियर या व्यक्तिगत जीवन में किसी मार्गदर्शन की जरूरत पड़ी, फाउंडेशन के मेंटर्स हमेशा उनके साथ खड़े रहे।

उन्होंने कहा कि सम्वाद (Samvaad) और टाटा स्टील फाउंडेशन ने उन्हें अवसर, आत्मविश्वास और ऐसा सहयोग दिया जिसने हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया।

अब झारखंड की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का सपना

राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद भी रवि की मंजिल यहीं खत्म नहीं होती।

उनका सपना है कि वे आदिवासी और स्वदेशी समुदायों की कहानियों पर आधारित फीचर फिल्में बनाएं, झारखंड में अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित करें और यहां की संस्कृति, परंपरा और लोककथाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएं।

वे चाहते हैं कि झारखंड की असली पहचान उसकी कहानियों के माध्यम से पूरी दुनिया जाने।

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

रवि राज मुर्मू की कहानी यह संदेश देती है कि यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

कुमिरमुड़ी जैसे छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा किसी शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

आज रवि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

रवि राज मुर्मू की सफलता की कहानी संघर्ष, मेहनत, लगन और सही सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। टाटा स्टील फाउंडेशन ने उनकी शिक्षा से लेकर पेशेवर जीवन तक हर चरण में उनका मार्गदर्शन किया, जिससे वे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता बनने का सपना साकार कर सके।

आज रवि न केवल एक सफल फिल्ममेकर हैं, बल्कि झारखंड की आदिवासी संस्कृति और समाज की आवाज बनकर देश-दुनिया तक अपनी मिट्टी की कहानियां पहुंचा रहे हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि अवसर, विश्वास और निरंतर प्रयास किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकते हैं।

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