
Vocal for Local : कहावत है – “अपने लोकल के लिए वोकल बनिए!” और इस बात को सच कर दिखाया है जमशेदपुर बारीडीह बस्ती के रहने वाले 67 साल के राजेंद्र कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मीना वर्मा ने। रिटायरमेंट के बाद ये दोनों पति-पत्नी अब अपने बगइचे में लगे आम के पेड़ों और देसी जिंदगी को पूरी तरह एन्जॉय कर रहे हैं।

इस साल इनके बागान में मल्लिका किस्म के आमों की जबरदस्त पैदावार हुई है। बड़े-बड़े पीले आम देखकर जो कोई इनके घर आता है, खुश होकर बिना फोटो लिए नहीं जाता। आम की मिठास और खुशबू से पूरा मोहल्ला महक उठा है।
मीना वर्मा आम से अचार और मुरब्बा बनाने में माहिर हैं। हर साल वो नए-नए तरह के अचार और रेसिपी बनाकर लोगों को चखाती हैं। उनका कहना है –
“अचार बनाना सिर्फ स्वाद की बात नहीं है, ये तो दिल से जुड़ी चीज है।”
राजेंद्र बाबू बताते हैं,
“रिटायरमेंट के बाद गांव-जैसी जिंदगी जीने में जो सुकून है, वो कहीं और नहीं मिलता। बगइचे में समय बिताना, पेड़ों से बातें करना और फिर उन्हीं पेड़ों से फल मिलना – ये सबसे बड़ा सुख है।“
आम को यूं ही फल का राजा नहीं कहते। इसमें विटामिन A, C और E होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं।
इनके पेड़ पर लगे आम मल्लिका वैरायटी के हैं, जो अपने सुनहरे रंग, हल्की हरियाली और मीठे रस के लिए जाने जाते हैं। आम की किस्म चाहे दशहरी हो, लंगड़ा हो या अल्फांसो – हर किस्म की अपनी पहचान है।
लोकल चीजों को अपनाना, उनका प्रचार करना और उन्हें सम्मान देना ही असली “लोकल फॉर वोकल” है। राजेंद्र-मीना वर्मा दंपती हम सबके लिए मिसाल हैं कि उम्र कोई मायने नहीं रखती अगर मन में कुछ अच्छा करने की लगन हो।
तो इस गर्मी अगर आपके पास भी आम है या कोई देसी शौक है – तो गर्व से बताइए, दिखाईए और प्रचार करिए।
– रिपोर्ट: सौरभ कुमार, जादूगोड़ा








































