
- झारखंड के जमशेदपुर में दो सगी बहनों ने JAC परीक्षा में दिखाया कमाल
- आर्थिक तंगी के बावजूद 1st डिवीजन हासिल कर रचा इतिहास
📍 जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर शहर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां दो सगी बहनों ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत कर Jharkhand Academic Council (JAC) की परीक्षा में प्रथम श्रेणी (1st डिवीजन) प्राप्त कर अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया है। श्रुति गिरि ने 68% और सुकन्या गिरि ने 67% अंक प्राप्त किए हैं। दोनों बहनें साकची स्थित गुरुनानक स्कूल की छात्राएं हैं।

✨ बहनों के बीच था सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल
श्रुति और सुकन्या गिरि ने न केवल एक-दूसरे के साथ पढ़ाई की, बल्कि आपसी प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक दिशा में मोड़ा। एक-दूसरे से प्रेरणा लेकर दोनों ने परीक्षा की तैयारी की और शानदार प्रदर्शन किया। श्रुति ने 68% अंक प्राप्त कर बहन सुकन्या को मात्र 1% से पीछे छोड़ा, जिसने 67% अंक अर्जित किए।
📚 आर्थिक तंगी बनी शिक्षा का मजबूत आधार
इन बहनों की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वे बेहद कठिन आर्थिक हालात से गुजर रही थीं। उनके परिवार की आय सीमित है, लेकिन दोनों ने कभी पढ़ाई से मुंह नहीं मोड़ा। उन्होंने ठान लिया था कि शिक्षा ही उनकी आर्थिक तंगी से निकलने की राह बनेगी, और आज उन्होंने यह बात सिद्ध कर दिखाई है।
श्रुति और सुकन्या के माता-पिता ने भी अपनी क्षमता से बढ़कर बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी। कहीं से किताबें जुटाईं, कहीं से फीस भरवाई, लेकिन हौसला कभी नहीं टूटा।
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💬 छात्राओं की प्रतिक्रिया
श्रुति गिरि ने बताया, “हम जानते थे कि हमारा भविष्य सिर्फ पढ़ाई में है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, हमने हार नहीं मानी। आज का दिन हमारे लिए बहुत मायने रखता है।”
वहीं, सुकन्या ने कहा, “हमने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। स्कूल के शिक्षकों ने भी हमें हमेशा प्रोत्साहित किया। हमने खुद से वादा किया था कि पढ़ाई को ही अपना हथियार बनाएंगे।”
🏫 स्कूल और शिक्षकों ने दिया पूरा सहयोग
गुरुनानक स्कूल, साकची के शिक्षकों ने भी इन दोनों छात्राओं की कड़ी मेहनत को सराहा। स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, “श्रुति और सुकन्या हमारी सबसे मेहनती छात्राओं में से थीं। आर्थिक तंगी के बावजूद उनका आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ।”
📌 विशेष बातें
- दोनों छात्राएं एक ही स्कूल में पढ़ती हैं और आपस में सगी बहनें हैं।
- परीक्षा में श्रुति को 68% और सुकन्या को 67% अंक प्राप्त हुए।
- कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई को नहीं छोड़ा।
- इनकी सफलता न केवल व्यक्तिगत बल्कि समाज के लिए भी एक उदाहरण है।
📢 निष्कर्ष: शिक्षा है असली सहारा
श्रुति और सुकन्या गिरि की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालात में भी हार मान लेते हैं। इन बहनों ने साबित कर दिया कि शिक्षा ही वह रास्ता है जिससे गरीबी और अभाव को पीछे छोड़ा जा सकता है। उनका संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास हर छात्र के लिए एक मिसाल है।
👉 शिक्षा ही है असली सहारा, दूसरा कुछ नहीं।











































