मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

“बिरासत की लड़ाई है ये” – करुणामय मंडल

On: October 18, 2025 8:37 AM
Follow Us:

राजनीतिक हलचल: कवि करुणामय मंडल की यह कविता घाटशिला उपचुनाव की राजनीतिक हलचल और जनचेतना को संबोधित करती है। इसमें कवि ने राजनीति के वर्तमान स्वरूप, जनता की भूमिका और नैतिक मतदान की जिम्मेदारी पर गहन टिप्पणी की है। कविता में परंपरा, संघर्ष, चेतावनी और उम्मीद — चारों भाव एक साथ गूँजते हैं।

आइये कविता पढ़ते हैं –

बिरासत की लड़ाई है ये
वक्त की तकाजा है।
खेती है सियासत दानों की
समझ गए तो मजा है।।

---Advertisement---
Netaji Advertisement

शेर शावकों की लड़ाई है
घमासान तो लाजमी है।
शाम- दाम- दण्ड- भेद की
खेल अब से ही जमी है।।

संभालना अपने आपको
बहकावे में मत आना।
यारों, मतदान मन दान है
लालच में मत भूलाना।।

विकास, अधिकार, अस्तित्व
जंहा सदा सुरक्षित है।
निज हित में प्रदेश हित में
उन्हें चुनना ही उचित है।।

THE NEWS FRAME

इस कविता में लिखें भावों को समझने का प्रयास करें –

पहला चरण: “बिरासत की लड़ाई है ये…”

“बिरासत की लड़ाई है ये, वक्त की तकाजा है।
खेती है सियासत दानों की, समझ गए तो मजा है।।“

इस पंक्ति में कवि कहता है कि यह चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि “बिरासत की लड़ाई” है — यानी राजनीतिक परंपरा, विचारधारा और जनता की उम्मीदों की रक्षा का संघर्ष।

“खेती है सियासत दानों की” – राजनीति को यहाँ खेती से जोड़ा गया है, जहां “दानों” का मतलब विचार, नीतियाँ और मूल्य हैं। अगर जनता ने इस सियासत की गहराई को समझ लिया, तो लोकतंत्र का असली “मजा” उसी को मिलेगा।

दूसरा चरण: “शेर शावकों की लड़ाई है…”

“शेर शावकों की लड़ाई है, घमासान तो लाजमी है।
शाम-दाम-दण्ड-भेद की, खेल अब से ही जमी है।।“

यहाँ कवि चुनावी माहौल की तीव्रता दिखाता है। चुनावी मैदान को वह “शेर शावकों की लड़ाई” बताता है, यानी बहादुरों और महत्वाकांक्षी नेताओं के बीच का घमासान।

“शाम-दाम-दण्ड-भेद” का प्रयोग कौटिल्य के चाणक्यनीति से लिया गया है, जो बताता है कि सत्ता पाने के लिए हर तरह के राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं — चाहे वह समझौता हो, धनबल हो या रणनीति।

तीसरा चरण: “संभालना अपने आपको…”

“संभालना अपने आपको, बहकावे में मत आना।
यारों, मतदान मन दान है, लालच में मत भूलाना।।“

यह कविता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है। कवि जनता को चेतावनी देता है कि चुनाव के समय कई प्रकार के प्रलोभन और बहकावे दिए जाते हैं।
“मतदान” को वह “मन दान” कहता है — यानी यह केवल वोट नहीं, बल्कि एक आंतरिक संकल्प है। मतदाता का वोट उसका चरित्र और विवेक दर्शाता है, इसलिए किसी लालच में आकर अपने “मन का दान” व्यर्थ न करें।

चौथा चरण: “विकास, अधिकार, अस्तित्व…”

“विकास, अधिकार, अस्तित्व जहाँ सदा सुरक्षित है।
निज हित में, प्रदेश हित में, उन्हें चुनना ही उचित है।।“

कवि इस भाग में अपने संदेश का निष्कर्ष देता है —
चुनाव में वही प्रतिनिधि चुनना चाहिए जो विकास, अधिकार और अस्तित्व की रक्षा करे।
कवि जनता को याद दिलाता है कि सच्चा लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब मतदाता निज स्वार्थ और प्रदेश के व्यापक हित को एक साथ देखकर मतदान करेगा।

भावार्थ (सारांश):

करुणामय मंडल की यह कविता घाटशिला उपचुनाव के अवसर पर जनता को जागरूक करने वाला एक सशक्त काव्य संदेश है।
इसमें कवि ने कहा है कि —

  • चुनाव केवल नेताओं का नहीं, जनता की सोच और जिम्मेदारी का भी इम्तिहान है।
  • राजनीति में नीतियों की खेती होती है, न कि केवल सत्ता की।
  • मतदाता को प्रलोभन से बचकर विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।
  • सही नेता वही है जो विकास, अधिकार और अस्तित्व को सुरक्षित रखे।

यह कविता न केवल चुनावी वातावरण पर एक सामाजिक टिप्पणी है, बल्कि यह जनता को अपने मतदान की शक्ति का बोध कराती है।
“मन दान” का प्रतीक बनकर यह कविता कहती है कि —

“लोकतंत्र की असली जीत जनता के विवेक में है, न कि नेताओं की बयानबाज़ी में।”

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment