उत्तर प्रदेश: Bareilly जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पुलिस सेवा को लेकर युवाओं की बदलती सोच पर नई बहस छेड़ दी है। कभी पुलिस की वर्दी को सम्मान, स्थिरता और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 17 जुलाई 2026 के बीच बरेली में तैनात 35 पुलिसकर्मियों ने स्वेच्छा से नौकरी से इस्तीफा दिया।
इनमें उपनिरीक्षक (दरोगा), आरक्षी (कांस्टेबल) और फायरमैन जैसे विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। कुछ ने बेहतर सरकारी नौकरी मिलने पर पुलिस सेवा छोड़ी, जबकि कुछ ने स्वास्थ्य समस्याओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते यह कठिन निर्णय लिया। यह मामला केवल इस्तीफों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी नौकरियों के प्रति बदलती सोच और करियर प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।
डेढ़ साल में 35 पुलिसकर्मियों ने छोड़ी नौकरी
पुलिस विभाग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच कुल 35 पुलिसकर्मियों ने नियमानुसार त्यागपत्र दिया।
यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस सेवा को लंबे समय तक सबसे प्रतिष्ठित और सुरक्षित सरकारी नौकरियों में गिना जाता रहा है। लेकिन अब कई कर्मचारी बेहतर अवसरों और व्यक्तिगत कारणों से विभाग छोड़ रहे हैं।
दरोगा से लेकर आरक्षी और फायरमैन तक शामिल
इस्तीफा देने वालों में केवल कांस्टेबल ही नहीं बल्कि उपनिरीक्षक (दरोगा) और फायरमैन भी शामिल हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि नौकरी छोड़ने का निर्णय किसी एक पद तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मचारी भी अपने भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं।
बेहतर सरकारी नौकरी बनी सबसे बड़ी वजह
कई पुलिसकर्मियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के बाद अन्य सरकारी विभागों में चयन होने पर इस्तीफा दिया।
प्रमुख मामलों में—
- दरोगा सचिन राठी का चयन कैबिनेट सचिवालय में डीएफओ पद पर हुआ।
- आरक्षी शुभम अहलावत का चयन आईटीबीपी (ITBP) में उपनिरीक्षक के रूप में हुआ।
- आरक्षी बीनू को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में उपनिरीक्षक पद मिला।
- उपनिरीक्षक प्रणव का चयन रेलवे विभाग में सहायक टंकक के रूप में हुआ।
- आरक्षी प्रिया ने दिल्ली पुलिस जॉइन की।
- आरक्षी हर्ष का चयन दिल्ली पुलिस में जेल वार्डर के पद पर हुआ।
इन उदाहरणों से पता चलता है कि कई पुलिसकर्मी बेहतर करियर संभावनाओं के लिए अन्य विभागों का रुख कर रहे हैं।
बीमारी और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बनीं कारण
सभी इस्तीफे बेहतर नौकरी मिलने की वजह से नहीं हुए।
कुछ पुलिसकर्मियों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण सेवा छोड़ने का फैसला लिया।
उदाहरण के तौर पर—
- आरक्षी दिव्या यादव ने अपनी मां की खराब तबीयत के कारण नौकरी छोड़ी।
- आरक्षी दक्ष ने बीमारी की वजह से इस्तीफा दिया।
- सोहित चौधरी ने पारिवारिक कारणों से सेवा समाप्त की।
- आरक्षी अभिषेक ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और दौरे पड़ने की शिकायत के चलते नौकरी छोड़ दी।
ये मामले बताते हैं कि पुलिस सेवा की कठिन परिस्थितियां कई बार निजी जीवन पर भी गहरा असर डालती हैं।
पुलिस सेवा का बढ़ता दबाव
पुलिस की नौकरी को हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
लगातार लंबी ड्यूटी, सीमित छुट्टियां, त्योहारों पर भी काम, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और मानसिक तनाव इस सेवा का हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों के कारण कई कर्मचारी लंबे समय तक इस पेशे में बने रहने में कठिनाई महसूस करते हैं।
वर्क-लाइफ बैलेंस की बढ़ती मांग
आज की युवा पीढ़ी केवल नौकरी की स्थिरता नहीं बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस को भी महत्व दे रही है।
बेहतर वेतन, निश्चित कार्य समय, परिवार के लिए समय और मानसिक शांति जैसे कारण अब नौकरी चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसी वजह से कई कर्मचारी दूसरे सरकारी विभागों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने क्या कहा?
बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने कहा कि कई पुलिसकर्मी विभाग की अनुमति लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
जब उनका चयन किसी अन्य सरकारी विभाग में हो जाता है, तब वे नियमानुसार इस्तीफा देकर नई सेवा जॉइन करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह संबंधित कर्मचारी का व्यक्तिगत निर्णय होता है और विभाग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करता है।
क्या पुलिस सेवा का आकर्षण कम हो रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस सेवा का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है।
हालांकि, बदलते समय में युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं।

आज कई अभ्यर्थी ऐसी सरकारी नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां—
- कार्य का निश्चित समय हो,
- मानसिक दबाव अपेक्षाकृत कम हो,
- पारिवारिक जीवन के लिए पर्याप्त समय मिले,
- पदोन्नति और करियर ग्रोथ के बेहतर अवसर हों।
इसी कारण कुछ कर्मचारी पुलिस सेवा छोड़कर अन्य विकल्प चुन रहे हैं।
सरकारी नौकरी की बदलती तस्वीर
पहले सरकारी नौकरी का मतलब केवल स्थायी रोजगार माना जाता था।
अब युवा नौकरी के साथ-साथ—
- बेहतर जीवनशैली,
- मानसिक स्वास्थ्य,
- कार्य संतुलन,
- करियर विकास,
- व्यक्तिगत संतुष्टि
को भी समान महत्व देने लगे हैं।
बरेली का यह मामला इसी बदलती सोच का संकेत माना जा रहा है।
क्या इससे पुलिस भर्ती पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिस विभाग में कार्य परिस्थितियों, अवकाश व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुविधाओं में सुधार किया जाता है, तो कर्मचारियों का मनोबल और सेवा में बने रहने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि, यह केवल एक जिले का आंकड़ा है और इससे पूरे राज्य या देश की स्थिति पर सामान्य निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बरेली में डेढ़ वर्ष के भीतर 35 पुलिसकर्मियों का स्वेच्छा से इस्तीफा देना केवल एक प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं के प्रति बदलती सोच का संकेत भी है। जहां कुछ कर्मचारियों ने बेहतर करियर अवसरों को चुना, वहीं कुछ ने स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी।
यह मामला बताता है कि आज के समय में नौकरी केवल वेतन या प्रतिष्ठा का विषय नहीं रह गई है। युवा अब ऐसे करियर की तलाश कर रहे हैं जहां पेशेवर सफलता के साथ व्यक्तिगत जीवन का संतुलन भी बना रहे। आने वाले समय में सरकारी विभागों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है कि कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों और कल्याण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।




















