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जिंदा Fish (मछली) निगलने की कोशिश पड़ी भारी गले में फंसी पूरी मछली सदर अस्पताल चाईबासा के डॉक्टरों ने बचाई जान

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On: June 1, 2026 4:50 PM
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चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां तालाब में Fish (मछली) पकड़ने के दौरान एक व्यक्ति के गले में पूरी जिंदा मछली फंस गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि युवक को सांस लेने और भोजन निगलने में भारी कठिनाई होने लगी। समय रहते सदर अस्पताल, चाईबासा पहुंचाने और चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई के कारण उसकी जान बचाई जा सकी। यह घटना न केवल लोगों के लिए एक सीख है, बल्कि सदर अस्पताल के चिकित्सकों की दक्षता, समर्पण और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उत्कृष्टता का भी प्रमाण है।

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Fish पकड़ने के दौरान हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर करीब दो बजे सोनुआ प्रखंड के निश्चितपुर गांव निवासी 35 वर्षीय चंपई गगराई अपने चार साथियों के साथ गांव के एक तालाब में Fish पकड़ रहा था। मछली पकड़ने के दौरान एक बड़ी मछली उसके हाथ लग गई। बताया जाता है कि उसने उस मछली को अस्थायी रूप से अपने मुंह में दबा लिया और दूसरी उछलती हुई मछली को पकड़ने का प्रयास करने लगा।

इसी दौरान मुंह में दबाई गई मछली अचानक फिसलकर गले के अंदर चली गई। देखते ही देखते मछली गले में फंस गई और चंपई गगराई को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। वह न तो ठीक से बोल पा रहा था और न ही कुछ निगल पा रहा था। मौके पर मौजूद उसके साथी और परिजन घबरा गए।

बिगड़ती हालत देख अस्पताल पहुंचाया गया

घटना के बाद चंपई की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी। गले में फंसी Fish के कारण उसके श्वसन मार्ग पर दबाव पड़ रहा था। परिजनों ने समय गंवाए बिना उसे तत्काल सदर अस्पताल, चाईबासा के आपातकालीन विभाग पहुंचाया।

अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को गंभीर पाया। गले में फंसी मछली के कारण किसी भी समय बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता था। चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक जांच शुरू की और मरीज को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

डॉ. प्रदीप कुमार और टीम ने दिखाई तत्परता

आपातकालीन विभाग में तैनात डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की। प्रारंभिक परीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि मरीज के गले में पूरी मछली फंसी हुई है, जिसे विशेष सावधानी के साथ निकालना आवश्यक था।

डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए आवश्यक उपकरणों और चिकित्सकीय प्रक्रिया का उपयोग करते हुए मछली को बाहर निकालने की तैयारी शुरू की। यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि थोड़ी सी भी चूक मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती थी।

सफल ऑपरेशन से बची मरीज की जान

चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता और अनुभव का परिचय देते हुए गले में फंसी मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने अत्यधिक सावधानी बरती ताकि मरीज के गले या श्वसन तंत्र को कोई अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।

Fish बाहर निकलते ही मरीज को राहत मिली और उसकी सांस लेने की क्षमता सामान्य होने लगी। कुछ समय तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने के बाद उसकी स्थिति स्थिर पाई गई। डॉक्टरों ने बताया कि यदि मरीज को अस्पताल पहुंचाने में थोड़ी भी देर होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

टीम वर्क का उत्कृष्ट उदाहरण बना मामला

इस सफल उपचार में केवल डॉक्टर ही नहीं बल्कि नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने मिलकर समन्वित तरीके से कार्य किया और मरीज को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार आपातकालीन स्थितियों में टीम वर्क अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और इस मामले में सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। यही कारण रहा कि गंभीर स्थिति के बावजूद मरीज की जान बचाई जा सकी।

परिजनों ने जताया आभार

मरीज के स्वस्थ होने के बाद उसके परिजनों ने राहत की सांस ली। उन्होंने सदर अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और सभी सहयोगी कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि यदि डॉक्टर समय पर इलाज नहीं करते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

चंपई गगराई और उसके परिवार ने अस्पताल प्रबंधन को धन्यवाद देते हुए कहा कि चिकित्सकों की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता के कारण उन्हें नया जीवन मिला है।

सिविल सर्जन ने दी बधाई

इस सफल उपचार पर पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी ने डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल की चिकित्सा टीम हर परिस्थिति में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि यह सफलता अस्पताल के चिकित्सकों की विशेषज्ञता, अनुभव और सेवा भावना को दर्शाती है। साथ ही यह भी साबित करती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

समय पर इलाज से टल सकता है बड़ा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गले में कोई बाहरी वस्तु फंस जाने की स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। कई बार देर होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक समय पर पहुंचना और चिकित्सकों के निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। सही समय पर लिया गया निर्णय जीवन बचा सकता है।

सदर अस्पताल की बढ़ी प्रतिष्ठा

इस सफल उपचार के बाद सदर अस्पताल, चाईबासा की चिकित्सा सेवाओं की एक बार फिर सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन करते हुए एक गंभीर मरीज की जान बचाई है।

यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रशिक्षित चिकित्सकों की कुशलता, आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था और बेहतर टीम वर्क के बल पर गंभीर से गंभीर परिस्थितियों पर भी सफलतापूर्वक काबू पाया जा सकता है

सोनुआ के चंपई गगराई के गले में जिंदा मछली फंसने की घटना बेहद दुर्लभ और खतरनाक थी। लेकिन सदर अस्पताल, चाईबासा के चिकित्सकों की तत्परता, विशेषज्ञता और टीम वर्क के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में समय पर उपचार की महत्ता और चिकित्सकों के समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

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