जमशेदपुर: Goswami तुलसीदास जयंती के अवसर पर उत्क्रमित उच्च विद्यालय, लक्ष्मीनगर में सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘निनाद’ की ओर से अगस्त माह के ‘नन्हें स्वर’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य, कला और संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा को पहचानना और उसे मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित अतिथियों एवं शिक्षकों का मन मोह लिया।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रिया कुमारी सिंह, ‘निनाद’ की संस्थापक सुश्री पूनम महानन्द तथा प्रतियोगिता के निर्णायक एवं वरिष्ठ साहित्यकार सह गायक श्री राजेंद्र शाह राज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनके जीवन, साहित्य और हिंदी भाषा के प्रति योगदान से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
प्रधानाचार्या के स्वागत वक्तव्य के बाद शुरू हुई प्रतियोगिता
दीप प्रज्वलन के बाद विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती प्रिया कुमारी सिंह ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, ‘निनाद’ की टीम और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए ऐसे आयोजनों की सराहना की।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद ‘नन्हें स्वर’ प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ।
15 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
प्रतियोगिता में विद्यालय के कुल 15 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने मंच पर अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
बच्चों में मंच पर प्रस्तुति देने को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास के साथ अपनी कला और अभिव्यक्ति को प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के दौरान निर्णायक ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता में विजेता चुनना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देना भी रहा।
तुलसीदास जी के जीवन और साहित्य पर दी गई प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान टीम ‘निनाद’ की ओर से क्षमाश्री, आकांक्षा एवं हृदयांश राज ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन एवं साहित्य पर केंद्रित विशेष प्रस्तुति दी।
इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को तुलसीदास जी के साहित्यिक योगदान और हिंदी साहित्य में उनके महत्व के बारे में जानकारी दी गई। टीम ने विद्यार्थियों को साहित्य से जुड़ने और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के लिए भी प्रेरित किया।
‘द डार्क वॉइस’ की बीटबॉक्सिंग प्रस्तुति बनी आकर्षण
कार्यक्रम में ‘द डार्क वॉइस’ यानी चंद्रमोहन सोरेन ने अपनी शानदार बीटबॉक्सिंग प्रस्तुति से बच्चों में जोश और उत्साह भर दिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया।
बीटबॉक्सिंग की प्रस्तुति के दौरान बच्चों ने उत्साह के साथ कलाकार का हौसला बढ़ाया। साहित्यिक कार्यक्रम में संगीत और आधुनिक कला के इस समावेश ने कार्यक्रम को और भी रोचक बना दिया।
टीम ‘निनाद’ के सदस्यों ने भी की सहभागिता
कार्यक्रम में टीम ‘निनाद’ के सदस्यों दिव्या एवं अतुल ने भी सक्रिय सहभागिता की। टीम के सभी सदस्यों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘निनाद’ की टीम ने विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उन्हें साहित्य, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र
कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र देकर विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत और सहभागिता का उत्साहवर्धन किया गया।
आयोजकों का मानना रहा कि प्रतियोगिता में भाग लेना स्वयं में विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें भविष्य में अपनी प्रतिभा को और बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने की प्रेरणा मिलती है।
नन्हें स्वर’ प्रतियोगिता में ये रहे विजेता
‘नन्हें स्वर’ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। निर्णायकों के मूल्यांकन के आधार पर प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे—
प्रथम स्थान: जानह्वी चंद
द्वितीय स्थान: बिक्की कुमार
तृतीय स्थान: अमृत राज शर्मा
विजेता विद्यार्थियों को उनकी शानदार प्रस्तुतियों के लिए बधाई दी गई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। अन्य प्रतिभागियों को भी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
21 जुलाई को हुई थी ‘नन्हें स्वर’ की पहली कड़ी
ध्यातव्य है कि ‘नन्हें स्वर’ कार्यक्रम की पहली कड़ी पिछले महीने 21 जुलाई को सी.पी. समिति स्कूल में आयोजित की गई थी। यह आयोजन प्रेमचंद जयंती विशेष कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ था।
पहले कार्यक्रम में भी विद्यार्थियों को साहित्य और कला से जोड़ने तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया गया था। इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए अगस्त माह में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर ‘नन्हें स्वर’ की दूसरी कड़ी आयोजित की गई।
साहित्य और संस्कृति से बच्चों को जोड़ने की पहल
‘नन्हें स्वर’ कार्यक्रम के माध्यम से ‘निनाद’ संस्था विद्यार्थियों में साहित्य, कला और अभिव्यक्ति के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास कर रही है। संस्था का उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना है।
ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने, मंच पर प्रस्तुति देने और अपनी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने का प्रयास
आज के समय में बच्चों का रुझान विभिन्न आधुनिक माध्यमों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
‘निनाद’ की ओर से आयोजित ‘नन्हें स्वर’ जैसे कार्यक्रम बच्चों को महान साहित्यकारों के जीवन और उनकी रचनाओं से परिचित कराने का सार्थक माध्यम बन रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल रहा।
प्रतिभाओं को मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका
विद्यालयों में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के अंदर गायन, कविता, वक्तृत्व, अभिनय और अन्य कलाओं की प्रतिभा होती है, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित मंच नहीं मिल पाता। ‘नन्हें स्वर’ जैसे कार्यक्रम ऐसे विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रतियोगिता में 15 विद्यार्थियों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि बच्चों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने को लेकर उत्साह है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी क्षमता पहचानने और उसमें सुधार करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भरा आत्मविश्वास
मंच पर प्रस्तुति देने से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का विकास होता है। ‘नन्हें स्वर’ के दौरान विद्यार्थियों ने बिना झिझक अपनी प्रस्तुतियां दीं और दर्शकों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
आयोजकों ने सभी विद्यार्थियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया और उन्हें भविष्य में भी साहित्य एवं कला से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।
निनाद की सार्थक पहल
‘निनाद’ संस्था का यह प्रयास बच्चों की प्रतिभा को पहचान देने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सार्थक पहल है। संस्था द्वारा साहित्यकारों की जयंती को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम आयोजित करना उन्हें हिंदी साहित्य और संस्कृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
प्रेमचंद जयंती से शुरू हुई ‘नन्हें स्वर’ की श्रृंखला का तुलसीदास जयंती विशेष कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ना साहित्य के प्रति विद्यार्थियों की रुचि विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
समापन
Goswami तुलसीदास जयंती के अवसर पर आयोजित ‘नन्हें स्वर’ कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए सीख, मनोरंजन और प्रतिभा प्रदर्शन का सुंदर मंच साबित हुआ। 15 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं ‘निनाद’ की टीम ने तुलसीदास जी के जीवन एवं साहित्य से विद्यार्थियों को परिचित कराया।
बीटबॉक्सिंग प्रस्तुति ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया और प्रमाण-पत्र वितरण के साथ विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया गया। प्रतियोगिता में जानह्वी चंद ने प्रथम, बिक्की कुमार ने द्वितीय और अमृत राज शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
‘निनाद’ का यह प्रयास साहित्य, कला और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ बच्चों को अपनी प्रतिभा के लिए मंच देने की दिशा में निरंतर जारी एक सकारात्मक पहल है।


















