जमशेदपुर: साकची स्थित चेनाव रोड के विवेकानंद इंग्लिश हाई स्कूल (VEHS) में भारतीय डाक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में Rakhi मेकिंग प्रतियोगिता 2026’ का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। रक्षाबंधन के अवसर को विशेष बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यालय के 107 छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां तैयार कीं। कार्यक्रम का वातावरण प्रेम, भाई-बहन के रिश्ते, भारतीय संस्कृति और देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा। बच्चों की कलात्मक प्रस्तुतियों ने आयोजन को एक यादगार रक्षाबंधन उत्सव का रूप दे दिया।
सुंदर सजावट ने बढ़ाई कार्यक्रम की खूबसूरती
प्रतियोगिता को लेकर विद्यालय के सभागार को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों और सजावटी सामग्री ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
सभागार में रक्षाबंधन से जुड़े संदेशों और रंग-बिरंगी सजावट ने बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों में भी उत्साह पैदा किया। आयोजन का उद्देश्य केवल राखी बनाना नहीं था, बल्कि बच्चों को भारतीय परंपराओं, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी था।
वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्वलित किया गया। इसके बाद स्वामी विवेकानंद और मां शारदा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
इस पारंपरिक शुरुआत ने कार्यक्रम को गरिमामय रूप प्रदान किया। विद्यालय परिवार के सदस्यों और विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
प्रधानाध्यापिका ने डाक विभाग के प्रयास की सराहना की
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती के. मित्रा ने भारतीय डाक विभाग की ओर से किए गए इस विशेष प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि इनके जरिए बच्चों की कल्पना शक्ति, रचनात्मकता और कला कौशल को विकसित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को जब अपनी भावनाओं को कला के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर मिलता है, तो उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। राखी जैसे भारतीय सांस्कृतिक पर्व के माध्यम से बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़ना भी इस तरह के कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
शिक्षिका विनीता सिंह ने बच्चों के उत्साह को सराहा
कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका विनीता सिंह ने भी बच्चों के उत्साह और भागीदारी की सराहना की। उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए भारतीय डाक विभाग और विद्यालय के सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों ने जिस उत्साह और मेहनत के साथ राखियां तैयार कीं, वह सराहनीय है। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों ने अपनी कला प्रतिभा के साथ-साथ भावनाओं को भी खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
107 छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा
राखी मेकिंग प्रतियोगिता में विद्यालय के कुल 107 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना के अनुसार राखियों को तैयार किया।
किसी राखी में रंगों का सुंदर संयोजन देखने को मिला तो किसी में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति की झलक दिखाई दी। बच्चों ने उपलब्ध सामग्री का रचनात्मक इस्तेमाल करते हुए आकर्षक राखियां बनाईं।
बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से किया प्रभावित
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों की रचनात्मकता देखने लायक रही। छोटे-छोटे हाथों से तैयार की गई राखियों में बच्चों की मेहनत और कल्पना साफ दिखाई दी।
राखियों को तैयार करते समय बच्चों ने केवल सुंदरता का ध्यान नहीं रखा, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की भावनाओं को भी अपनी कलाकृतियों के माध्यम से व्यक्त किया। कई बच्चों की राखियों में देशभक्ति और भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।
सैनिकों को राखी भेजने का अवसर बना भावुक पल
प्रतियोगिता में शामिल छात्रा सान्वी राठौर, कक्षा 9 ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस वर्ष अपने हाथों से बनाई गई राखियों को देश के वीर जवानों यानी सैनिकों को भेजने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और भावुकता से भरा क्षण है।
बच्ची की इस भावना से यह संदेश सामने आया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान और अपनत्व व्यक्त करने का माध्यम भी बन सकता है।
परिणीधि कुमारी ने दिया सद्भाव का संदेश
छात्रा परिणीधि कुमारी ने भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ समाज में आपसी सद्भाव और आत्मीयता की भावना को भी रेखांकित किया।
उन्होंने अपने विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि रक्षाबंधन का पर्व प्रेम, विश्वास और रिश्तों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। समाज के हर वर्ग के प्रति सम्मान और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना भी इस पर्व की महत्वपूर्ण भावना है।
काव्या कुमारी ने साझा किया अनुभव
छात्रा काव्या कुमारी ने अपने हाथों से राखी तैयार करने के अनुभव को सुखद बताया। उनके लिए यह प्रतियोगिता अपनी कला को प्रदर्शित करने के साथ-साथ रक्षाबंधन के पर्व को करीब से समझने का अवसर भी बनी।
उन्होंने भारतीय डाक विभाग की इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि बच्चों को इस तरह के आयोजनों में शामिल होने से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।
अमरजीत सोरेन ने भी जताया आभार
कक्षा 8 ‘अ’ के छात्र अमरजीत सोरेन ने भी अपने हाथों से राखी बनाने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि स्वयं राखी तैयार करना उनके लिए बेहद अच्छा अनुभव रहा।
उन्होंने इस आयोजन के लिए भारतीय डाक विभाग को धन्यवाद दिया। प्रतियोगिता में लड़कों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि रक्षाबंधन और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े आयोजनों में हर विद्यार्थी उत्साह के साथ शामिल हो सकता है।
ब्लैकबोर्ड पर लिखी पंक्तियों ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम के दौरान ब्लैकबोर्ड पर लिखी गई पंक्तियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया—
“तोड़े से भी ना टूटे, ये ऐसा मन बंधन है,
इस बंधन को सारी दुनिया कहती रक्षाबंधन है।”
इन पंक्तियों ने पूरे कार्यक्रम की भावना को खूबसूरती से व्यक्त किया। भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास के अटूट रिश्ते को इन शब्दों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
राखी के जरिए देशभक्ति की भावना
इस प्रतियोगिता की खास बात यह रही कि बच्चों की बनाई राखियों में केवल भाई-बहन के प्रेम की भावना ही नहीं, बल्कि देशभक्ति का संदेश भी दिखाई दिया।
देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उन्हें राखी भेजने की भावना ने कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक बना दिया। बच्चों के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण रहा कि वे अपने त्योहार की खुशियां उन सैनिकों के साथ भी साझा कर सकते हैं जो देश की सुरक्षा के लिए अपने परिवार से दूर रहते हैं।

भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। विद्यालय में आयोजित इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को इस पर्व की सांस्कृतिक महत्ता समझने का अवसर मिला।
राखी बनाने की गतिविधि ने बच्चों को अपनी परंपराओं के करीब लाने के साथ-साथ उन्हें रचनात्मक कार्य के लिए भी प्रेरित किया। इस तरह का आयोजन शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास भी माना जा सकता है।
कला और भावनाओं का सुंदर संगम
राखी मेकिंग प्रतियोगिता में बच्चों की कला और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना के अनुसार अलग-अलग डिजाइन की राखियां बनाईं।

हर राखी के पीछे एक भावना और एक संदेश छिपा हुआ था। किसी में भाई के प्रति प्रेम नजर आया तो किसी में देश के जवानों के प्रति सम्मान। इस तरह प्रतियोगिता ने बच्चों की रचनात्मक सोच को एक सकारात्मक दिशा देने का काम किया।
बच्चों में बढ़ा आत्मविश्वास
ऐसे आयोजनों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना भी होता है। जब विद्यार्थी अपने हाथों से कोई वस्तु तैयार करते हैं और उसे दूसरों के सामने प्रस्तुत करते हैं, तो उनमें अपनी क्षमता के प्रति विश्वास पैदा होता है।
राखी मेकिंग प्रतियोगिता में बच्चों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिला। शिक्षकों के प्रोत्साहन और सहपाठियों की भागीदारी ने भी विद्यार्थियों के उत्साह को बढ़ाया।
शिक्षकों और डाक विभाग का सहयोग सराहनीय
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के शिक्षकों और भारतीय डाक विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बच्चों को प्रतियोगिता के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने में विद्यालय परिवार ने सहयोग किया।
वहीं, भारतीय डाक विभाग की सहभागिता ने इस आयोजन को एक अलग पहचान दी। सैनिकों तक बच्चों की बनाई राखियां पहुंचाने की भावना ने कार्यक्रम को सामाजिक और भावनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया।
रक्षाबंधन के संदेश को किया मजबूत
रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं है। यह प्रेम, विश्वास, सुरक्षा, सम्मान और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता ने इन्हीं भावनाओं को बच्चों की रचनात्मकता के माध्यम से सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने यह संदेश भी दिया कि प्रेम और भाईचारे की भावना परिवार से निकलकर समाज और राष्ट्र तक पहुंच सकती है।
साकची के चेनाव रोड स्थित विवेकानंद इंग्लिश हाई स्कूल में आयोजित राखी मेकिंग प्रतियोगिता 2026 बच्चों की रचनात्मकता, संस्कृति और देशभक्ति का सुंदर संगम बनकर सामने आई। प्रतियोगिता में 107 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण, दीप प्रज्वलन और स्वामी विवेकानंद एवं मां शारदा के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। प्रधानाध्यापिका श्रीमती के. मित्रा और शिक्षिका विनीता सिंह ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए भारतीय डाक विभाग के सहयोग के लिए आभार जताया।

सान्वी राठौर द्वारा सैनिकों को राखी भेजने की भावना हो या परिणीधि कुमारी का सद्भाव का संदेश, काव्या कुमारी और अमरजीत सोरेन का राखी बनाने का अनुभव हो या ब्लैकबोर्ड पर लिखी रक्षाबंधन की पंक्तियां—पूरे आयोजन में प्रेम, संस्कृति और देशभक्ति की भावना स्पष्ट दिखाई दी।
इस प्रतियोगिता ने यह साबित किया कि बच्चों के छोटे-छोटे हाथों से तैयार की गई राखियां केवल धागे और सजावट का मेल नहीं होतीं, बल्कि उनमें प्रेम, सम्मान, संस्कार और देश के प्रति भावनाओं का संदेश भी पिरोया जा सकता है।

















