जमशेदपुर: पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने मानगो नगर निगम में विकास योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में सांसदों एवं विधायकों की निर्धारित भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त को पत्र भेजकर आगामी 18 अगस्त को प्रस्तावित बोर्ड बैठक में रखी जाने वाली विकास योजनाओं की सूची को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप संशोधित करने का आग्रह किया है।
सरयू राय का कहना है कि नगर निकायों को विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार से मिलने वाली राशि के उपयोग में निर्धारित नियमों और हिस्सेदारी की व्यवस्था का पालन किया जाना आवश्यक है। उनका मानना है कि योजनाओं के चयन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से जनता की वास्तविक जरूरतों को विकास कार्यों में शामिल किया जा सकता है।
18 अगस्त की बोर्ड बैठक से पहले सूची संशोधित करने की मांग
सरयू राय ने मानगो नगर निगम के अपर नगर आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि 18 अगस्त को होने वाली बोर्ड बैठक में जिन विकास योजनाओं को प्रस्तुत किया जाना है, उनकी सूची को संबंधित प्रावधानों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं के चयन में निर्धारित हिस्सेदारी का पालन किया जाता है तो विकास कार्यों में पारदर्शिता के साथ-साथ क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकताओं को भी उचित स्थान मिलेगा। इससे वार्ड स्तर की योजनाओं के साथ-साथ ऐसे कार्यों को भी गति मिलेगी, जिनका लाभ एक से अधिक वार्डों के लोगों को मिलता है।
नाली निर्माण की राशि में 60 प्रतिशत वार्ड स्तर पर खर्च
सरयू राय ने नगर निकायों में नाली निर्माण के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि के उपयोग का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार नाली निर्माण के लिए मिलने वाली राशि में 60 प्रतिशत राशि वार्ड स्तर की योजनाओं पर खर्च करने का प्रावधान है, जबकि 40 प्रतिशत राशि निकाय स्तर की योजनाओं के लिए निर्धारित है।
उनका कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर छोटी और जरूरी समस्याओं का समाधान करना है। वार्डों में नाली निर्माण, जल निकासी और अन्य संबंधित कार्यों की आवश्यकता अक्सर स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर सामने आती है। ऐसे में वार्ड स्तर की योजनाओं के लिए निर्धारित राशि का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।
सड़क निर्माण में 40 प्रतिशत वार्ड और 60 प्रतिशत निकाय स्तर
सड़क निर्माण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी राशि के उपयोग की अलग व्यवस्था निर्धारित है। सरयू राय के अनुसार सड़क निर्माण के लिए उपलब्ध राशि में 40 प्रतिशत राशि वार्ड स्तर की योजनाओं तथा 60 प्रतिशत राशि निकाय स्तर की योजनाओं पर खर्च की जानी है।
निकाय स्तर की योजनाओं में ऐसी सड़कें शामिल हो सकती हैं, जो एक से अधिक वार्डों को जोड़ती हैं या जिनका उपयोग बड़ी संख्या में नागरिक करते हैं। वहीं वार्ड स्तर पर स्थानीय सड़कों और जरूरी मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
नागरिक सुविधा मद में 20 और 80 प्रतिशत की व्यवस्था
सरयू राय ने नागरिक सुविधा मद में उपलब्ध राशि के उपयोग को लेकर भी निर्धारित व्यवस्था का उल्लेख किया। उनके अनुसार इस मद में 20 प्रतिशत राशि वार्ड स्तर की योजनाओं और 80 प्रतिशत राशि निकाय स्तर की योजनाओं पर खर्च करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों का प्रभाव व्यापक होता है। इसलिए निकाय स्तर की योजनाओं के लिए अधिक राशि निर्धारित की गई है। हालांकि वार्डों में मौजूद स्थानीय समस्याओं को दूर करने के लिए भी निर्धारित राशि का उपयोग जरूरी है।
70 प्रतिशत राशि निकाय बोर्ड द्वारा चयनित योजनाओं पर
सरयू राय के अनुसार नगर निकायों को विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लिए सरकार से प्राप्त राशि में से 70 प्रतिशत राशि निकाय बोर्ड द्वारा चयनित निकाय स्तर की योजनाओं पर खर्च की जानी है।
इस व्यवस्था के तहत नगर निकाय का बोर्ड क्षेत्र की व्यापक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का चयन कर सकता है। ऐसी योजनाओं से एक या कई वार्डों के नागरिकों को लाभ पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि निकाय बोर्ड द्वारा योजनाओं का चयन करते समय सड़क, नाली, नागरिक सुविधा और अन्य जरूरी आधारभूत संरचनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
30 प्रतिशत राशि जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की अनुशंसा पर
सरयू राय ने कहा कि शेष 30 प्रतिशत राशि निर्धारित जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर चयनित योजनाओं पर खर्च करने का प्रावधान है।
उनके अनुसार इस 30 प्रतिशत राशि में अलग-अलग जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के लिए निर्धारित हिस्सेदारी तय की गई है। इसका उद्देश्य विकास योजनाओं के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित करना है।
महापौर, उपमहापौर और नगर आयुक्त की निर्धारित हिस्सेदारी
सरयू राय के अनुसार अनुशंसा आधारित 30 प्रतिशत राशि में महापौर की अनुशंसा के लिए 10 प्रतिशत, उपमहापौर के लिए 5 प्रतिशत और नगर आयुक्त के लिए 5 प्रतिशत राशि निर्धारित है।
इसके अलावा सांसद एवं विधायक की अनुशंसा के लिए 10 प्रतिशत राशि निर्धारित होने की बात उन्होंने कही है। उनका कहना है कि इस हिस्सेदारी के अनुसार योजनाओं का चयन होने से क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतों को विकास प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
सांसद और विधायक की भागीदारी क्यों जरूरी?
Saryu Roy ने कहा कि सांसद और विधायक सीधे जनता से जुड़े जनप्रतिनिधि होते हैं। उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों से लगातार स्थानीय समस्याओं और जरूरतों की जानकारी मिलती रहती है। ऐसे में विकास योजनाओं के चयन में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उनका कहना है कि किसी क्षेत्र में सड़क, नाली, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था या अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित कौन-सी समस्या अधिक गंभीर है, इसकी जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से बेहतर तरीके से सामने आ सकती है।
स्थानीय जरूरतों को योजनाओं में मिलेगा स्थान
सरयू राय के अनुसार योजनाओं के चयन में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की जन आकांक्षाओं और स्थानीय जरूरतों को विकास योजनाओं में स्थान देना है।
उन्होंने कहा कि केवल कार्यालय स्तर पर योजनाओं का चयन करने के बजाय स्थानीय प्रतिनिधियों और जनता की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। इससे विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में भी मदद मिलेगी।
एक से अधिक वार्डों की योजनाओं को भी मिलेगा लाभ
उन्होंने कहा कि निर्धारित हिस्सेदारी के अनुसार योजनाओं का चयन होने से केवल अलग-अलग वार्डों में होने वाले छोटे विकास कार्य ही नहीं, बल्कि एक से अधिक वार्डों को जोड़ने वाली बड़ी और आवश्यक योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जा सकेगी।
उदाहरण के तौर पर ऐसी सड़कें, नालियां या नागरिक सुविधा से जुड़े कार्य, जिनका लाभ कई वार्डों की जनता को मिलता है, उन्हें निकाय स्तर की योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।
बोर्ड बैठक में प्रावधानों के अनुसार सूची तैयार करने पर जोर
सरयू राय ने मानगो नगर निगम की आगामी बोर्ड बैठक को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं की सूची में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि योजनाओं की सूची तैयार करते समय राशि के उपयोग से जुड़े सभी निर्धारित प्रावधानों को ध्यान में रखना चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नगर निगम प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा और बोर्ड बैठक में नियमों के अनुरूप योजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।
विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जनभागीदारी जरूरी
नगर निकायों के विकास में राशि का सही उपयोग और योजनाओं का उचित चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि योजनाएं क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय होती हैं तो सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
Saryu Roy ने इसी दिशा में सांसदों, विधायकों और अन्य निर्धारित जनप्रतिनिधियों की भूमिका सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा से क्षेत्र की समस्याओं को विकास योजनाओं में जगह मिलने की संभावना बढ़ती है।
जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देने की अपील
सरयू राय ने कहा कि विकास योजनाओं का अंतिम उद्देश्य जनता को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि योजना चयन की प्रक्रिया में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता मिले और निर्धारित राशि का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाए।
उन्होंने मानगो नगर निगम प्रशासन से आग्रह किया है कि 18 अगस्त की बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की जाने वाली योजनाओं की सूची को संबंधित प्रावधानों के अनुरूप संशोधित किया जाए, ताकि नगर क्षेत्र के विकास में सभी निर्धारित जनप्रतिनिधियों की भूमिका सुनिश्चित हो सके।
Saryu Roy ने मानगो नगर निगम में विकास योजनाओं के चयन को लेकर सांसदों और विधायकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उन्होंने नाली, सड़क और नागरिक सुविधा मद में राशि के निर्धारित अनुपात के साथ-साथ निकाय बोर्ड तथा जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा के लिए तय हिस्सेदारी का पालन करने पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि विकास योजनाओं में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से स्थानीय जनता की जरूरतों को बेहतर तरीके से सामने लाया जा सकता है। साथ ही वार्ड स्तर की समस्याओं के समाधान के साथ ऐसे बड़े विकास कार्यों को भी प्राथमिकता मिल सकती है, जिनका लाभ कई वार्डों के नागरिकों को प्राप्त हो। अब निगाहें 18 अगस्त को होने वाली मानगो नगर निगम की बोर्ड बैठक पर हैं, जहां विकास योजनाओं की सूची पर चर्चा और निर्णय लिया जाना है।


















