जमशेदपुर। ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन की ओर से नगर के साहित्यकारों के बीच ‘सम्पूर्ण वंदे मातरम गीत कंठस्थ पाठ’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साहित्यकारों के बीच आयोजित इस अनूठी प्रतियोगिता में शहर के 54 साहित्यकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर देशभक्ति और साहित्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मुनका ने की, जबकि संचालन साहित्य समिति के सचिव डॉ. अजय कुमार ओझा ने किया। कार्यक्रम में रांची से पहुंचे रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय तथा नगर के प्रख्यात गायक सुजन चटर्जी अतिथि एवं निर्णायक के रूप में उपस्थित रहे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्पण के साथ हुई। इसके बाद उपासना सिन्हा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। वातावरण में साहित्य, संगीत और राष्ट्रभक्ति का भाव देखने को मिला। इसके पश्चात ‘वंदे मातरम’ के सम्पूर्ण पाठ का दौर शुरू हुआ, जिसमें प्रतिभागी साहित्यकारों ने कंठस्थ रूप से गीत का पाठ एवं गायन प्रस्तुत किया।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता का उद्देश्य साहित्यकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रगीत से जुड़े भावनात्मक एवं साहित्यिक पक्ष को जनमानस तक पहुंचाना था।
54 साहित्यकारों ने किया प्रतिभाग
प्रतियोगिता में नगर के कुल 54 साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। इनमें डॉ. यमुना तिवारी ‘व्यथित’, वसंत जमशेदपुरी, रीना गुप्ता, जोबा मुर्मू, कैलाशनाथ शर्मा गाजीपुरी, संदीप सिंह गौतम, पूनम सिंह वत्सला, किरण कुमारी वर्तनी, अनिमा मिश्रा, अजय प्रजापति, डॉ. वीणा पाण्डेय भारती, माधवी उपाध्याय, अशोक पाठक स्नेही, उपासना सिन्हा, सूरज सिंह राजपूत, अरुणा झा, शैलेन्द्र पाण्डेय शैल, बलविन्दर सिंह, प्रसन्न वदन मेहता, विद्यासागर लाभ, डॉ. रजनी रंजन, राजेन्द्र शाह राज, सुरेश दत्त पाण्डेय, चन्द्र भूषण सिंह, डॉ. लता मानकर, नीलिमा पाण्डेय, शकुंतला शर्मा, प्रणति शरण पिंकी, आलोक मंजरी विदुषी, ममता कर्ण, विन्ध्यवासिनी तिवारी, वन्दना केशव भारती, क्षमाश्री दुबे, रीना सिन्हा, मनीष सिंह वंदन, राजेन्द्र सिंह, जितेश तिवारी, सुनीता बेदी, डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, प्रेमलता कुमारी, वीणा नंदिनी, लक्ष्मी सिंह रुबी, आरती श्रीवास्तव विपुला, सुदीप्ता जेठी राउत, सुस्मिता मिश्रा, पद्मा प्रसाद, डॉ. अनिता निधि, रीति झा, माधुरी मिश्रा और सुमन राय चाहत सहित अन्य साहित्यकार शामिल रहे।
साहित्य और राष्ट्रभावना का संगम
प्रतियोगिता के दौरान तुलसी भवन का वातावरण देशभक्ति के भाव से ओत-प्रोत रहा। साहित्यकारों ने ‘वंदे मातरम’ के सम्पूर्ण पाठ के माध्यम से गीत की साहित्यिक गरिमा और राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया।
संस्थान के मानद महासचिव डॉ. प्रसेनजित तिवारी ने स्वागत वक्तव्य दिया। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के उपाध्यक्ष रामनन्दन प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
आयोजकों ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से गहराई से जुड़ा सांस्कृतिक प्रतीक है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम साहित्यकारों को इसके इतिहास, साहित्यिक महत्व और राष्ट्रभावना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।














