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स्टेशन चौक पर Helmet चेकिंग के दौरान हंगामा जनगणना ड्यूटी पर जा रहे शिक्षक से ₹10 हजार मांगने का आरोप

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On: May 23, 2026 6:30 PM
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जमशेदपुर: के व्यस्त स्टेशन चौक पर शनिवार को Helmet चेकिंग अभियान के दौरान जमकर बवाल हो गया। आरोप है कि जनगणना ड्यूटी पर जा रहे एक शिक्षक को ट्रैफिक जांच के दौरान रोका गया और उनसे ₹10 हजार की मांग की गई। घटना की जानकारी फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए और कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

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मामले को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस भी हुई। वहीं घटना की सूचना मिलने के बाद कुछ जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी स्टेशन चौक पहुंच गए, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।

जनगणना ड्यूटी पर जाने की बात कहने के बावजूद रोके जाने का आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार संबंधित शिक्षक जनगणना कार्य से जुड़े सरकारी दायित्व के तहत ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान स्टेशन चौक पर चल रहे हेलमेट जांच अभियान में उन्हें रोका गया।

शिक्षक ने कथित रूप से खुद को सरकारी ड्यूटी पर होने की जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें काफी देर तक रोके रखा गया।

बताया जा रहा है कि इसी दौरान बहस शुरू हो गई और मामला धीरे-धीरे विवाद में बदल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने घटना का वीडियो भी बनाने की कोशिश की, जिसके बाद वहां भीड़ बढ़ती चली गई।

₹10 हजार मांगने का लगाया आरोप

विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब शिक्षक और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर उनसे ₹10 हजार की मांग की गई।

शिक्षक पक्ष का कहना है कि ट्रैफिक जांच के दौरान अभद्र व्यवहार किया गया और कथित रूप से अवैध रूप से पैसे मांगे गए। इस आरोप के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई।

हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि नियमित वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा था और नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जा रही थी।

स्टेशन चौक पर कुछ देर के लिए बना तनावपूर्ण माहौल

घटना के बाद स्टेशन चौक पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। लोगों की भीड़ जुटने के कारण सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामला शांत नहीं कराया जाता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।

मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि ट्रैफिक जांच के दौरान लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए, ताकि अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा न हो।

जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंचे मौके पर

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी स्टेशन चौक पहुंच गए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के साथ ड्यूटी के दौरान इस प्रकार का व्यवहार हुआ है, तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

वहीं कुछ लोगों ने ट्रैफिक जांच अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने और पुलिस तथा आम जनता के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

पुलिस ने आरोपों से किया इनकार

मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कहा कि नियमित वाहन जांच अभियान के तहत हेलमेट और दस्तावेजों की जांच की जा रही थी।

पुलिस का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही थी और किसी भी प्रकार की अवैध मांग का आरोप निराधार है।

अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

कई लोगों ने कहा कि ट्रैफिक जांच अभियान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन इसे पारदर्शी और सम्मानजनक तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना मामला

स्टेशन चौक पर हुई इस घटना की चर्चा सोशल मीडिया पर भी तेज हो गई है। लोग मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

कुछ लोग शिक्षक के समर्थन में नजर आए, जबकि कुछ लोगों ने ट्रैफिक नियमों के पालन को जरूरी बताते हुए जांच अभियान का समर्थन किया।

इस पूरे घटनाक्रम ने ट्रैफिक जांच प्रक्रिया और पुलिस-जनता संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों से जानकारी ली जाएगी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो इससे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

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