जमशेदपुर: लोयला स्कूल, Bistupur में रक्षाबंधन के पावन अवसर को खास बनाने के लिए भारतीय डाक विभाग (India Post) के सहयोग से भव्य राखी मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के लिए कुल 500 विद्यार्थियों में से 100 चुनिंदा बच्चों का चयन किया गया था।
कक्षा 4 और 5 के इन विद्यार्थियों ने अपने नन्हे हाथों से ऐसी आकर्षक और खूबसूरत राखियां तैयार कीं, जिन्हें देखकर कार्यक्रम में मौजूद अतिथि, शिक्षक और डाक विभाग के अधिकारी भी बच्चों की प्रतिभा की प्रशंसा करने से खुद को रोक नहीं सके। बच्चों की बनाई राखियों में भारतीय संस्कृति, भाई-बहन के प्रेम और रक्षाबंधन की भावनाओं की सुंदर झलक देखने को मिली।
रक्षाबंधन की भावना को रचनात्मकता से जोड़ा
लोयला स्कूल में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल बच्चों से राखी बनवाना नहीं था, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों से जोड़ना भी था। रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।
राखी मेकिंग प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को इस पर्व की भावनाओं को अपनी रचनात्मकता के जरिए व्यक्त करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने अलग-अलग रंगों, धागों, सजावटी सामग्री और आकर्षक डिजाइन का इस्तेमाल करते हुए बेहद खूबसूरत राखियां तैयार कीं।
500 बच्चों में से 100 विद्यार्थियों का हुआ चयन
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्कूल के कुल 500 विद्यार्थियों में से 100 चुनिंदा बच्चों का चयन किया गया था। चयनित विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
बच्चों के बीच प्रतियोगिता को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। सभी प्रतिभागियों ने अपनी कल्पना और कौशल के अनुसार राखियां बनाने का प्रयास किया। किसी ने पारंपरिक डिजाइन को प्राथमिकता दी तो किसी ने आधुनिक और आकर्षक शैली में राखी तैयार की।

कक्षा 4 और 5 के बच्चों ने दिखाया हुनर
इस प्रतियोगिता में मुख्य रूप से कक्षा 4 और 5 के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कम उम्र के इन बच्चों की रचनात्मकता और मेहनत ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।
बच्चों ने राखी बनाने में जिस तरह बारीकी और धैर्य का परिचय दिया, वह देखने लायक था। कई राखियों में रंगों का बेहतरीन संयोजन देखने को मिला, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने अपनी राखियों में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक प्रतीकों को शामिल किया।
बच्चों की राखियों ने जीती तारीफ
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों की फिनिशिंग और डिजाइन देखकर उपस्थित लोग काफी प्रभावित हुए। राखियों में बच्चों की मेहनत और कल्पनाशीलता साफ दिखाई दे रही थी।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बच्चों के काम की सराहना करते हुए कहा कि जिस उत्साह और लगन के साथ बच्चों ने राखियां बनाई हैं, वह बेहद प्रशंसनीय है। उनकी रचनात्मकता और मेहनत ने इस आयोजन को एक यादगार अनुभव बना दिया।
व्यावसायिक राखियों को भी दी चुनौती
बच्चों द्वारा तैयार की गई राखियों की सुंदरता और आकर्षक डिजाइन देखकर उपस्थित लोगों ने यहां तक कहा कि कई मामलों में बाजार में मिलने वाली व्यावसायिक राखियां भी इन बच्चों की रचनात्मकता के सामने फीकी नजर आती हैं।
बच्चों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कल्पना के आधार पर आकर्षक राखियां तैयार कीं। इससे यह साबित हुआ कि प्रतिभा और रचनात्मकता के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है।
राखियों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक
बच्चों द्वारा बनाई गई राखियों में केवल सजावट ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र प्रेम की भावना भी दिखाई दी।
कई राखियों में पारंपरिक रंगों और डिजाइन का इस्तेमाल किया गया। कुछ राखियों में बच्चों ने अपने भाई-बहन के प्रति प्रेम और सुरक्षा की भावना को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया।
इससे प्रतियोगिता केवल एक craft activity न रहकर सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव में बदल गई।
बच्चों में दिखा जबरदस्त उत्साह
प्रतियोगिता के दौरान बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सभी प्रतिभागी अपनी-अपनी राखी को बेहतर बनाने में जुटे रहे।
बच्चों ने एक-दूसरे की राखियों को देखा, नई चीजें सीखीं और अपनी कल्पना को नए रूप में प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता ने बच्चों के अंदर healthy competition की भावना को भी बढ़ावा दिया।
अनुशासन ने भी जीता दिल
कार्यक्रम की सबसे खास बात केवल बच्चों की रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि उनका अनुशासन और स्वच्छता के प्रति जागरूक व्यवहार भी रहा।
आमतौर पर जब बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ बैठकर craft work करते हैं, तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आसपास कागज, धागे और अन्य सामग्री बिखरी हुई नजर आ सकती है। लेकिन लोयला स्कूल के विद्यार्थियों ने इस मामले में भी शानदार उदाहरण पेश किया।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी हॉल रहा साफ
प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद पूरे हॉल में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। बताया गया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हॉल में कागज का एक टुकड़ा भी बिखरा हुआ नहीं था।
बच्चों ने इस्तेमाल की गई सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखा और अपने आसपास की जगह को साफ रखा। उनके इस व्यवहार की उपस्थित लोगों ने खूब सराहना की।
लोयला स्कूल के संस्कारों की दिखी झलक
बच्चों के अनुशासन, स्वच्छता और निर्देशों का पालन करने के तरीके को स्कूल के संस्कारों से जोड़कर देखा गया। विद्यार्थियों ने यह दिखाया कि रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए भी अनुशासन और जिम्मेदारी को बनाए रखा जा सकता है।
बच्चों के आत्मविश्वास और व्यवहार ने कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों को प्रभावित किया।
डाक विभाग ने लगाया विशेष काउंटर
इस कार्यक्रम को और खास बनाने के लिए भारतीय डाक विभाग की ओर से एक विशेष काउंटर लगाया गया। इस काउंटर के माध्यम से बच्चों को डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई।
सबसे खास बात यह रही कि बच्चों द्वारा तैयार की गई राखियों को उनके भाई-बहनों और देश की सीमाओं पर तैनात सेना के जवानों तक भेजने के लिए मौके पर ही बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
ऑन-द-स्पॉट मोबाइल बुकिंग की सुविधा
डाक विभाग द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ऑन-द-स्पॉट मोबाइल बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई। बच्चों और उनके परिवारों को अपनी राखियां सीधे निर्धारित पते पर भेजने की सुविधा मिली।
इस पहल ने कार्यक्रम को भावनात्मक रूप से और अधिक खास बना दिया। बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि उनकी बनाई राखी किस तरह डाक सेवा के माध्यम से उनके प्रियजनों तक पहुंच सकती है।

सेना के जवानों तक भी पहुंचेंगी राखियां
कार्यक्रम में बच्चों को यह अवसर भी मिला कि वे अपनी बनाई राखियों को देश की सीमाओं पर तैनात सेना के जवानों के लिए भेज सकें।
देश की रक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और अपनापन व्यक्त करने का यह एक सुंदर माध्यम बना। बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।
डाक विभाग की आधुनिक सेवाओं की दी जानकारी
डाक अधिकारियों ने बच्चों को केवल राखी बुकिंग की प्रक्रिया ही नहीं समझाई, बल्कि आधुनिक पोस्टल सिस्टम के बारे में भी जानकारी दी।
बच्चों को बताया गया कि आज डाक विभाग केवल पारंपरिक पत्र और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से तेज और व्यवस्थित सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है।
Tracking और Barcode की जानकारी
डाक विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को Tracking और Barcode System की कार्यप्रणाली के बारे में भी समझाया।
बच्चों को बताया गया कि डाक या पार्सल को बुक करने के बाद उसकी स्थिति को किस तरह track किया जा सकता है। Barcode के माध्यम से पार्सल की पहचान और उसकी movement को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलती है।
इस जानकारी से बच्चों को डाक व्यवस्था के आधुनिक स्वरूप को करीब से समझने का अवसर मिला।
घर और स्कूल तक पहुंच रही डाक सेवा
डाक अधिकारियों ने बच्चों को बताया कि आधुनिक समय में डाक विभाग की सेवाएं लोगों के घर और संस्थानों तक पहुंच रही हैं। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर राखियों और अन्य सामग्री को समय पर पहुंचाने में डाक विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस जानकारी से बच्चों को यह समझने में मदद मिली कि पारंपरिक डाक व्यवस्था समय के साथ आधुनिक सुविधाओं से जुड़ चुकी है।
प्रिंसिपल फादर विनोद रहे मौजूद
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रिंसिपल फादर विनोद मौजूद रहे। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा और अनुशासन की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने से बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और creativity विकसित होती है।
वाइस प्रिंसिपल श्रीमती विनीता ने दिया संदेश
कार्यक्रम में विद्यालय की वाइस प्रिंसिपल श्रीमती विनीता भी उपस्थित रहीं। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए रक्षाबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक धागा नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच अटूट विश्वास, जिम्मेदारी और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को त्योहारों के पीछे छिपे मूल्यों और भावनाओं को समझने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों की भी रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षकों ने बच्चों को राखी बनाने की प्रक्रिया में आवश्यक मार्गदर्शन दिया और प्रतियोगिता के दौरान अनुशासन बनाए रखने में सहयोग किया।
शिक्षकों ने बच्चों को अपनी creativity का इस्तेमाल करने और अपनी पसंद के डिजाइन तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।
डाक अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन की सराहना की
भारतीय डाक विभाग के अधिकारियों ने लोयला स्कूल में आयोजित कार्यक्रम की व्यवस्था और बच्चों की प्रतिभा की जमकर सराहना की।
उन्होंने स्कूल प्रबंधन द्वारा किए गए कुशल आयोजन, बच्चों के अनुशासन और कार्यक्रम के बेहतर प्रबंधन की प्रशंसा की। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें practical knowledge भी प्रदान करते हैं।
रचनात्मकता के साथ सीखने का अवसर
राखी मेकिंग प्रतियोगिता बच्चों के लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि सीखने का एक अवसर भी रही। बच्चों ने इस दौरान creativity, patience, concentration और teamwork जैसी कई महत्वपूर्ण skills का अनुभव किया।
इसके अलावा डाक विभाग की गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को communication और postal technology के बारे में भी नई जानकारी मिली।
रक्षाबंधन को बनाया यादगार
इस आयोजन ने रक्षाबंधन के त्योहार को बच्चों के लिए और भी यादगार बना दिया। अपनी मेहनत से राखी तैयार करना और फिर उसे अपने भाई-बहन या सेना के जवानों तक भेजने का अवसर बच्चों के लिए विशेष अनुभव रहा।
कार्यक्रम में भारतीय परंपरा, आधुनिक तकनीक और बच्चों की रचनात्मकता का सुंदर मेल देखने को मिला।
बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच
ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी प्रतिभा और कल्पनाशक्ति प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करती हैं। कई बार बच्चे सामान्य कक्षा गतिविधियों में अपनी पूरी प्रतिभा नहीं दिखा पाते, लेकिन creative activities के माध्यम से उनकी छिपी प्रतिभा सामने आती है।
लोयला स्कूल का यह आयोजन भी बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का शानदार अवसर बना।
लोयला स्कूल, Bistupur में भारतीय डाक विभाग के सहयोग से आयोजित राखी मेकिंग प्रतियोगिता रचनात्मकता, संस्कृति, अनुशासन और भावनाओं का सुंदर संगम रही। कुल 500 विद्यार्थियों में से चुने गए 100 बच्चों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया और कक्षा 4 व 5 के नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी खूबसूरत राखियों से सभी का दिल जीत लिया।
बच्चों की राखियों में भाई-बहन के प्रेम के साथ भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों ने रचनात्मकता के साथ-साथ स्वच्छता और अनुशासन का भी बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया।
भारतीय डाक विभाग द्वारा लगाए गए विशेष काउंटर पर बच्चों की राखियों की ऑन-द-स्पॉट बुकिंग की सुविधा दी गई। बच्चों को Tracking, Barcode और आधुनिक postal system की जानकारी भी दी गई। वहीं सेना के जवानों के लिए राखियां भेजने का अवसर मिलने से कार्यक्रम में देशभक्ति और भावनात्मक जुड़ाव भी देखने को मिला।
प्रिंसिपल फादर विनोद, वाइस प्रिंसिपल श्रीमती विनीता, शिक्षकगण और डाक विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बनाया। कुल मिलाकर, लोयला स्कूल का यह आयोजन बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, भारतीय संस्कृति से जोड़ने और रक्षाबंधन के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ।




























