जमशेदपुर: Mango नगर निगम की दो बड़ी विकास योजनाओं से जुड़ी निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नगर अध्यक्ष ओम प्रकाश (गुड्डू सिंह) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अल्पकालीन ई-निविदा आमंत्रण सूचना संख्या UDHD/MMC/07/2025-26, दिनांक 15 दिसंबर 2025 के तहत जारी दो महत्वपूर्ण सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं की संचिका (फाइल) के अवलोकन के दौरान कई प्रशासनिक विसंगतियां सामने आई हैं।
मेयर द्वारा संचिका का अवलोकन करने के बाद यह पाया गया कि फाइल में आवश्यक दस्तावेजों का अभाव है, जिससे पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो बड़ी विकास योजनाओं के लिए जारी हुई थीं निविदाएं
नगर निगम द्वारा दो महत्वपूर्ण सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के लिए ई-टेंडर जारी किए गए थे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मानगो क्षेत्र में सड़क और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना था।
1. वार्ड संख्या-9 की परियोजना
पहली निविदा UDHD/MMC/01 के अंतर्गत जारी की गई थी। इसके तहत पायल सिनेमा से पारडीह चौक तक तथा विभिन्न क्रॉस रोड में नाली, स्लैब, पेवर्स ब्लॉक और सड़क चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित किया गया था।
इस कार्य के लिए सुजीत कुमार सिंह को संवेदक (ठेकेदार) के रूप में चयनित किया गया। परियोजना की कुल स्वीकृत लागत 3 करोड़ 58 लाख 61 हजार 500 रुपये निर्धारित की गई।
2. वार्ड संख्या-8 की परियोजना
दूसरी निविदा UDHD/MMC/02 के अंतर्गत जारी की गई। इसमें मानगो चौक से पारडीह चौक तक तथा आसपास के क्रॉस रोड में नाली, स्लैब, पेवर्स ब्लॉक और सड़क चौड़ीकरण का कार्य शामिल है।
इस परियोजना का कार्य चंदेल कंस्ट्रक्शन को दिया गया। इसकी कुल निविदा राशि 3 करोड़ 14 लाख 54 हजार 800 रुपये निर्धारित की गई।
संचिका में नहीं मिला महत्वपूर्ण पत्र
मेयर द्वारा संचिका का अवलोकन करने के दौरान सबसे बड़ी आपत्ति यह सामने आई कि फाइल के शीर्ष पृष्ठ पर पत्रांक 325/TC, दिनांक 28 अक्टूबर 2025 का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, लेकिन संबंधित पत्र संचिका में संलग्न नहीं पाया गया।
यह स्थिति प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि किसी भी सरकारी फाइल में जिन दस्तावेजों का उल्लेख किया जाता है, उनका अभिलेखों में उपलब्ध होना आवश्यक होता है।
अभिलेखों के संधारण पर उठे सवाल
दस्तावेजों की अनुपस्थिति को लेकर यह सवाल उठाया गया है कि यदि किसी महत्वपूर्ण पत्र का उल्लेख संचिका में किया गया है, तो वह रिकॉर्ड में क्यों उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की स्थिति अभिलेखों के अपूर्ण, त्रुटिपूर्ण और अव्यवस्थित संधारण की ओर संकेत करती है। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि निर्णय लेने की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर चिंता
नगर निगम की विकास योजनाओं में करोड़ों रुपये की राशि खर्च की जाती है। ऐसे में प्रत्येक दस्तावेज, स्वीकृति पत्र और प्रशासनिक आदेश का विधिवत रिकॉर्ड में होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
यदि किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता है, तो इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और भविष्य में किसी भी प्रकार की जांच या ऑडिट के दौरान कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
करोड़ों रुपये की परियोजनाओं से जुड़ा है मामला
दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 6 करोड़ 73 लाख रुपये से अधिक है। इतनी बड़ी राशि की योजनाओं में सभी प्रशासनिक औपचारिकताओं का पूरी तरह पालन करना आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की परियोजनाओं में दस्तावेजों की अनुपलब्धता को सामान्य त्रुटि नहीं माना जा सकता। प्रत्येक पत्र, आदेश और स्वीकृति का रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए।
दस्तावेजों की जांच की उठी मांग
संचिका में महत्वपूर्ण पत्र नहीं मिलने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग उठने लगी है। प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित पत्र संचिका में क्यों नहीं है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
यदि दस्तावेज वास्तव में उपलब्ध नहीं हैं, तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
विकास कार्यों की पारदर्शिता जरूरी
Mango क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण, नाली निर्माण और पेवर्स ब्लॉक लगाने जैसी योजनाएं सीधे आम जनता से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन परियोजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या दस्तावेजी कमी नहीं होनी चाहिए। इससे जनता का विश्वास मजबूत होता है और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
Mango नगर निगम की करोड़ों रुपये की दो सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं की संचिका में आवश्यक दस्तावेजों की अनुपस्थिति ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेयर द्वारा संचिका के अवलोकन के दौरान सामने आई इस विसंगति ने अभिलेखों के रखरखाव और पारदर्शिता की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन इस मामले की जांच कर आवश्यक स्पष्टीकरण और कार्रवाई कब तक सुनिश्चित करता है।














