जमशेदपुर: Water ही जीवन है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य को लेकर जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) द्वारा शुक्रवार को बी.पी.एम. स्कूल में “कैच द रेन” जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों के बीच जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाना था। अभियान के दौरान छात्रों ने रैली निकालकर लोगों से वर्षा जल को संरक्षित करने और जल की प्रत्येक बूंद का सदुपयोग करने का संदेश दिया।
जल संरक्षण के लिए निकाली गई जागरूकता रैली
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर से जागरूकता रैली के साथ हुई। रैली में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया। सभी छात्र-छात्राएं हाथों में जल संरक्षण से जुड़े स्लोगन और बैनर लिए हुए थे। उन्होंने “कैच द रेन – जहाँ भी गिरे, जब भी गिरे, वर्षा जल संचित करें” का संदेश देते हुए लोगों को वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक किया।
रैली के दौरान विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि यदि आज जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, विद्यालय और कार्यस्थल पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अपनानी चाहिए।
वर्षा जल संचयन के महत्व पर दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वर्षा जल संचयन की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि बारिश का पानी यदि सही तरीके से संग्रहित किया जाए तो इसका उपयोग घरेलू कार्यों, सिंचाई तथा भू-जल स्तर को बढ़ाने में किया जा सकता है।
छात्रों को समझाया गया कि वर्षा जल सीधे जमीन में पहुंचने से भू-जल का स्तर बढ़ता है, जिससे भविष्य में पेयजल की उपलब्धता बेहतर बनी रहती है। साथ ही यह भी बताया गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
भू-जल संरक्षण पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि लगातार बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जल के अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। यदि वर्षा के पानी को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
अधिकारियों ने कहा कि वर्षा जल संचयन एक सरल और प्रभावी उपाय है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसके लिए घरों की छतों, विद्यालयों, सरकारी भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने की आवश्यकता है।
विद्यार्थियों को जल संरक्षण के लिए किया गया प्रेरित
बी.पी.एम. स्कूल में आयोजित इस अभियान के दौरान विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में जल की बचत के छोटे-छोटे उपाय भी बताए गए। उन्हें नल खुला न छोड़ने, पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने, वर्षा जल को संग्रहित करने तथा परिवार और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।
शिक्षकों ने कहा कि यदि बच्चे बचपन से ही जल संरक्षण की आदत विकसित करेंगे, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।
विद्यालय परिसर में वर्षा जल संचयन अपनाने की अपील
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को विद्यालय परिसर के साथ-साथ अपने घरों में भी वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव ला सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक घर में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था हो जाए तो लाखों लीटर पानी हर वर्ष संरक्षित किया जा सकता है। इससे जल संकट कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
JNAC अधिकारियों ने दिया जल बचाने का संदेश
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) के अधिकारियों ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों को बचाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें भागीदार बनना होगा।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे मजबूत माध्यम हैं। यदि छात्र जल संरक्षण का संदेश अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाते हैं, तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
जल संकट से बचने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जल संकट केवल किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसलिए सभी लोगों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनना होगा।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग, पेड़-पौधों का संरक्षण तथा जल स्रोतों की साफ-सफाई जैसे उपाय अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल संसाधन सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
विद्यार्थियों ने ली जल संरक्षण की शपथ
कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सामूहिक रूप से जल संरक्षण की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे जल की एक-एक बूंद का महत्व समझेंगे, पानी की बर्बादी नहीं करेंगे और वर्षा जल संचयन को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे।
विद्यार्थियों ने यह भी वादा किया कि वे अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।
बी.पी.एम. स्कूल में आयोजित “कैच द रेन” जन-जागरूकता अभियान ने विद्यार्थियों के बीच जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के महत्व को प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य किया। JNAC की इस पहल से न केवल छात्रों में जागरूकता बढ़ी, बल्कि समाज को भी यह संदेश मिला कि जल संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है। यदि हर नागरिक वर्षा जल संचयन को अपनाए और पानी का जिम्मेदारी से उपयोग करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्याप्त जल संसाधन सुरक्षित रखे जा सकते हैं।












