
महाराष्ट्र: Pune जिले के दौंड तालुका में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। एक पिता ने अपनी 9 साल की बेटी अनामिका की लकड़ी काटने वाले कटर से हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि बच्ची ने मार्कशीट में हेराफेरी की थी। यह पुणे बच्ची हत्या मामला गुस्से, हिंसा और सबूत मिटाने की कोशिश की मिसाल है।

घटना 3 मई 2026 को देउलगांव राजे गांव में हुई, जहां आरोपी शांताराम चव्हाण ने बेटी का शव जला भी दिया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आइए इस पुणे बच्ची हत्या मामले को विस्तार से समझें।
घटना का पूरा विवरण
देउलगांव राजे गांव में रहने वाले शांताराम दुर्योधन चव्हाण (33 वर्ष) दिहाड़ी मजदूर हैं। 3 मई को सुबह साढ़े तीन बजे उनके घर में यह वारदात हुई। तीसरी कक्षा की छात्रा अनामिका ने अपने चौथी कक्षा के भाई संस्कार की मार्कशीट में बदलाव किया था।
संस्कार को पहली रैंक मिली थी, जबकि अनामिका को दूसरी। भाई की चिढ़ाने वाली बातों से परेशान होकर अनामिका ने खुद को फर्स्ट और भाई को सेकंड दिखा दिया। पिता को यह पता चलते ही गुस्से में आकर उन्होंने घर का लकड़ी काटने वाला कटर निकाला और अनामिका के गले व सिर पर वार कर दिए।
सबूत मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद शांताराम ने बेटी का शव कपड़े में लपेटा और घर में आग लगा दी। फिर नाटक किया कि घर में आग लग गई और बेटी अंदर फंस गई। लेकिन पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ गई।
आंशिक रूप से जला शव घटनास्थल से बरामद हुआ, जिसे DNA जांच के लिए Pune के ससून अस्पताल भेजा गया। यह पुणे बच्ची हत्या मामला क्रूरता की हद दिखाता है।
आरोपी का परिवार और पृष्ठभूमि
शांताराम चव्हाण गरीब परिवार से हैं और दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उनकी पत्नी को भी हिरासत में लिया गया क्योंकि उसने घटना के बाद पुलिस को सूचना नहीं दी। भाई संस्कार सुरक्षित है।
गांव वाले सदमे में हैं और इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। दौंड पुलिस ने गुन्हा क्रमांक 282/2026 दर्ज किया।
पुलिस जांच और कार्रवाई
सीनियर पीआई गोपाल पवार के नेतृत्व में जांच चल रही है। शांताराम और पत्नी चिंगु भोसले (या पत्नी) को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में मार्कशीट विवाद ही मुख्य कारण सामने आया।
पुलिस ने घर की फॉरेंसिक जांच की और शव के अवशेष बरामद किए। यह Pune बच्ची हत्या मामला बच्चों के प्रति हिंसा पर सवाल उठाता है।
समाज पर प्रभाव
यह घटना Pune में हाल की अन्य बच्ची हत्याओं के बाद और चिंताजनक है। लोग शिक्षा, पारिवारिक दबाव और गुस्से के प्रबंधन पर बहस कर रहे हैं। स्कूल रिजल्ट को लेकर इतना गुस्सा होना दुखद है।
गांव में शोक की लहर है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। यह Pune बच्ची हत्या मामला अभिभावकों के लिए चेतावनी है।
Pune बच्ची हत्या मामला एक मासूम की जिंदगी बर्बाद होने की त्रासदी है, जो छोटे विवाद से बड़ी हिंसा बन गई। समाज को गुस्से पर काबू और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। सख्त सजा से ऐसे मामलों पर अंकुश लगे।















