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धरती सजी है नई रूप में शष्य श्यामल सुंदर – करुणामय मंडल

On: October 8, 2025 9:18 PM
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कविता – “धरती सजी है नई रूप में शष्य श्यामल सुंदर” जो की करुणामय मंडल द्वारा रचित, एक सुंदर प्रकृति-प्रेम और आध्यात्मिक भावना से ओतप्रोत है, आइये उस रचना को एक बार पढ़ें और समझे।

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“धरती सजी है नई रूप में
शष्य श्यामल सुंदर।
मानो नई उमंगें भरी है
हर जीवों के अंदर।।
छल छल छल पानी नदी में
नदी की कुल कुल तान।
सुबह शाम पंछी किलकारी
ये पृथ्वी की प्रेम गान।।
हरी चादर कस के ओढ़ कर
पहाड़ बना जवान।
युगों पुरानी सब वृद्ध पहाड़
खड़े हैं सीना तान।।
बूढ़े वृक्ष भी हरियाली में
जवानी लौट पाया है।
पूरी धरती मान लो जैसे
हरियाली में छाया है।।
ऐसी सुंदर परिवेश जो
सौभाग्य से पाया है।
मानो खुद भगवान ने ही
शरत को सजाया है।।
दुर्गा लक्ष्मी की वर मिली है
मां काली की बारी है।
सदा मातृ कृपा बना रहे
ये प्रार्थना हमारी है।।”

भावार्थ

यह कविता “करुणामय मंडल” द्वारा रचित एक सुंदर प्रकृति-प्रेम और आध्यात्मिक भावना से ओतप्रोत रचना है, जो शरद ऋतु के सुंदर परिवेश और मातृशक्ति की कृपा को दर्शाती है। कवि ने धरती के नवीन रूप, हरियाली, नदियों की मधुर ध्वनि, पहाड़ों की शक्ति, और पंछियों की किलकारी के माध्यम से प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई उमंग का चित्रण किया है। कविता में यह भाव भी झलकता है कि प्रकृति ने अपनी जवानी और सौंदर्य को पुनर्जनन किया है, मानो भगवान ने स्वयं शरद को सजाया हो। साथ ही, दुर्गा, लक्ष्मी और काली जैसे मातृदेवीओं की कृपा और उनके आशीर्वाद की कामना के साथ मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई है। कविता का मूल संदेश प्रकृति और मातृशक्ति के प्रति सम्मान, प्रेम, और उनकी कृपा की निरंतरता की प्रार्थना है।

कवि की कल्पना से जुड़े शब्द

कवि की कल्पनाशीलता प्रकृति और आध्यात्मिकता के बीच एक सुंदर तालमेल बनाती है। कुछ प्रमुख शब्द जो कवि की कल्पना को दर्शाते हैं:

  • “धरती सजी है नई रूप में” – नवीनता और सौंदर्य की कल्पना।
  • “हरी चादर कस के ओढ़ कर” – प्रकृति को मानव-रूप में देखने की रचनात्मकता।
  • “जवानी लौट पाया है” – वृक्षों और प्रकृति में पुनर्जनन की गहरी कल्पना।
  • “भगवान ने शरत को सजाया है” – आध्यात्मिक और दिव्य सौंदर्य की संयोजन।
  • “दुर्गा लक्ष्मी की वर मिली है” – मातृशक्ति की कृपा की अलौकिक कल्पना।

संदेश

कविता का संदेश प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान को बढ़ावा देता है, जो मानव जीवन को नई ऊर्जा और शांति प्रदान करती है। साथ ही, यह मातृशक्ति (दुर्गा, लक्ष्मी, काली) की कृपा को जीवन का आधार मानकर उनकी पूजा और प्रार्थना की प्रेरणा देती है। कवि यह संदेश देना चाहता है कि प्रकृति और मातृशक्ति के संरक्षण से ही जीवन सार्थक और समृद्ध हो सकता है, और यह कृपा सदा बनी रहे, इसके लिए प्रार्थना आवश्यक है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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