
भारत: की प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और मातृभूमि के गौरव को एक बार फिर प्रमुखता देते हुए भारत के PM नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में एक प्रेरणादायी सुभाषितम् साझा किया। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट के माध्यम से देशवासियों को यह संदेश दिया कि भारत केवल साधना और उपासना की भूमि ही नहीं, बल्कि साहस, शक्ति और सर्वकल्याण की भी पुण्यभूमि रही है।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संस्कृत श्लोक भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक माना जा रहा है। उनके इस संदेश को देशभर में व्यापक सराहना मिल रही है।
PM ने मातृभूमि को बताया साहस और संस्कृति की पुण्यभूमि
PM नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत की यह पवित्र धरती सदियों से आध्यात्मिक चेतना, साधना, उपासना और मानव कल्याण की केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि भारत की महान विरासत और प्राचीन संस्कृति आज भी पूरी दुनिया को प्रेरणा देती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में देश की समृद्ध परंपरा को याद करते हुए कहा कि हमारी मातृभूमि ने हमेशा साहस, शक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कामना की कि यह पवित्र भूमि सभी लोगों को सदैव सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती रहे।
PM द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम्
PM ने एक्स पर पोस्ट करते हुए संस्कृत का यह सुभाषितम् साझा किया:
“यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।
गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।“
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह वही भूमि है जहां हमारे पूर्वजों ने महान और कल्याणकारी कार्य किए। यह वही धरती है जहां देवताओं ने अन्यायपूर्ण शक्तियों पर विजय प्राप्त की। उन्होंने कहा कि यह मातृभूमि हमें शक्ति, समृद्धि और गौरव प्रदान करती रहे।
भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को मिला बढ़ावा
PM मोदी द्वारा संस्कृत श्लोक साझा किए जाने को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री लगातार भारतीय भाषाओं, वैदिक ज्ञान और प्राचीन भारतीय साहित्य को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत की पहचान है। प्रधानमंत्री का यह संदेश देश के युवाओं को अपनी जड़ों और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रयास भी माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की सराहना
PM नरेंद्र मोदी के इस संस्कृत सुभाषितम् को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने साझा किया। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और राष्ट्र गौरव का संदेश बताया। संस्कृत प्रेमियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रधानमंत्री के इस संदेश की सराहना की।
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि इस प्रकार के संदेश नई पीढ़ी को भारतीय परंपरा और संस्कृति की गहराई को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। कई यूजर्स ने प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए श्लोक को भारतीय सभ्यता की आत्मा बताया।
संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पहल
PM मोदी समय-समय पर संस्कृत भाषा और भारतीय ग्रंथों के महत्व को रेखांकित करते रहे हैं। देशभर में संस्कृत शिक्षा, वैदिक अध्ययन और भारतीय दर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए कई स्तरों पर पहल की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और साहित्य आज भी प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संदेश भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मातृभूमि की समृद्धि और सर्वकल्याण की कामना
PM नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश के माध्यम से देशवासियों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि भारत की यह पवित्र भूमि हमेशा सभी लोगों को समृद्ध और सुरक्षित रखे।
PM का यह संदेश केवल एक संस्कृत श्लोक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा, राष्ट्र गौरव और मानव कल्याण की भावना को दर्शाने वाला प्रेरणादायी संदेश माना जा रहा है। देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को याद दिलाने वाला यह सुभाषितम् लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।









