
जमशेदपुर: Jharkhand सरकार द्वारा नगर निकाय क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स में 20 प्रतिशत वृद्धि किए जाने के निर्णय का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे पर जुगसलाई रेट पेयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार शैलेंद्र सिंह ने सरकार की नई अधिसूचना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि राज्य के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि संभवतः अधिकांश जनप्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का अध्ययन ही नहीं किया है, जिसके कारण वे इस महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर मौन हैं।

सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि यह मामला केवल 20 प्रतिशत टैक्स वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में आम नागरिकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का संकेत भी देता है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
हर दो वर्ष में बढ़ेगा होल्डिंग टैक्स
सरदार शैलेंद्र सिंह ने सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक दो वर्षों में भूमि के पुनर्मूल्यांकन (वैल्यूएशन), नए सर्किल रेट और सड़क की चौड़ाई के आधार पर होल्डिंग टैक्स में 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान में कोई नागरिक 1000 रुपये होल्डिंग टैक्स का भुगतान कर रहा है, तो नई व्यवस्था लागू होने के बाद उसे 1200 रुपये देने होंगे। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से यही राशि बढ़कर 1420 रुपये हो जाएगी। इसी प्रकार हर दो वर्षों में 20 प्रतिशत की वृद्धि का क्रम जारी रहेगा।
उनका कहना है कि सरकार की यह नीति आने वाले वर्षों में आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डाल सकती है। विशेष रूप से मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह अतिरिक्त भार चिंता का विषय बनेगा।
नागरिकों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
जुगसलाई रेट पेयर्स एसोसिएशन का मानना है कि पहले से ही महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और अन्य करों के दबाव से जूझ रहे नागरिकों पर इस प्रकार की लगातार कर वृद्धि उचित नहीं है।
सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि नगर निकायों द्वारा नागरिकों से विभिन्न प्रकार के कर और शुल्क लिए जाते हैं। इसके बावजूद यदि नियमित अंतराल पर होल्डिंग टैक्स में वृद्धि की जाती है, तो इसका सीधा असर आम जनता की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी कर वृद्धि से पहले जनता की आय, आर्थिक स्थिति और क्षेत्रीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखना चाहिए। केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से करों में वृद्धि करना उचित नहीं माना जा सकता।
मुंबई और हैदराबाद से झारखंड की तुलना अनुचित
सरदार शैलेंद्र सिंह ने सरकार के उस आधार पर भी सवाल उठाया जिसके तहत कथित रूप से अधिकारियों की एक टीम मुंबई और हैदराबाद का अध्ययन करने गई थी और उनकी रिपोर्ट के आधार पर नई अधिसूचना जारी की गई।
उन्होंने कहा कि मुंबई और हैदराबाद जैसे महानगरों की तुलना झारखंड जैसे राज्य से करना हास्यास्पद और अव्यावहारिक है। इन शहरों में मेट्रो रेल, अत्याधुनिक शहरी सुविधाएं, बड़े औद्योगिक निवेश और उच्च आय वाले नागरिकों की संख्या अधिक है, जबकि झारखंड की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड के अधिकांश नगर निकायों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ऐसे में महानगरों की कर व्यवस्था को आधार बनाकर यहां कर वृद्धि करना जनता के साथ न्याय नहीं माना जा सकता।
पहले भी हुआ था होल्डिंग टैक्स वृद्धि का विरोध
सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब नागरिकों ने होल्डिंग टैक्स वृद्धि का विरोध किया हो। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग दो वर्ष पहले भी जुगसलाई के नागरिकों ने होल्डिंग टैक्स में तीन गुना वृद्धि किए जाने का जोरदार विरोध किया था।
उस समय जनता के विरोध और दबाव के बाद सरकार को अपने निर्णय में आंशिक संशोधन करना पड़ा था और प्रस्तावित तीन गुना वृद्धि को घटाकर दोगुना किया गया था। उन्होंने कहा कि उस आंदोलन ने यह साबित किया था कि संगठित जनमत के सामने सरकार को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना पड़ता है।
उनका कहना है कि वर्तमान अधिसूचना भी नागरिकों की सहमति के बिना लागू की जा रही है, जिसका विरोध किया जाएगा।
उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
जुगसलाई रेट पेयर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार इस अधिसूचना को वापस नहीं लेती या इसमें आवश्यक संशोधन नहीं करती, तो मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि जुगसलाई के नागरिक इस विषय को लेकर गंभीर हैं और जल्द ही झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की जाएगी। उनका कहना है कि यह केवल जुगसलाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के नगर निकाय क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिकों से जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायालय इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई करेगा और नागरिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
जनप्रतिनिधियों को सौंपेंगे अधिसूचना की प्रति
सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि इस विषय पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधियों को शायद अधिसूचना की पूरी जानकारी नहीं है।
इसी कारण जुगसलाई रेट पेयर्स एसोसिएशन राज्य के विभिन्न जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें अधिसूचना की प्रति सौंपेगा और इस विषय पर सहयोग का अनुरोध करेगा।
उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को इस निर्णय के दीर्घकालिक प्रभावों की जानकारी होगी, तब वे भी जनता की चिंता को समझेंगे और इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएंगे।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि वह नई अधिसूचना पर पुनर्विचार करे और किसी भी प्रकार की कर वृद्धि लागू करने से पहले नागरिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा करे।
सरदार शैलेंद्र सिंह ने कहा कि कर व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न डाले और साथ ही नगर निकायों के विकास के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए। इसके लिए संतुलित और व्यावहारिक नीति की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि जनता की राय को महत्व देगी तो बेहतर और स्वीकार्य समाधान निकल सकता है।
Jharkhand सरकार द्वारा नगर निकायों में 20 प्रतिशत होल्डिंग टैक्स वृद्धि की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया है। जुगसलाई रेट पेयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार शैलेंद्र सिंह ने जहां इस निर्णय का विरोध करते हुए इसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है, वहीं उन्होंने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या नागरिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद इस अधिसूचना में कोई संशोधन किया जाता है या नहीं। फिलहाल यह मुद्दा राज्य के शहरी क्षेत्रों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।












































