
जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान NIT जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय एएनआरएफ समर्थित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज एंड मैटेरियल्स इन सिविल इंजीनियरिंग (SPMCE 2026) का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। हाइब्रिड मोड में आयोजित यह सम्मेलन पर्यावरणीय संतुलन, टिकाऊ निर्माण, शून्य-अपशिष्ट तकनीकों तथा सुदृढ़ अवसंरचना विकास जैसे वैश्विक विषयों पर केंद्रित है।

उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रसिद्ध गायिका सुश्री निबेदिता मंडल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं उद्योग जगत के विशेषज्ञों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. सुभदीप मेत्या ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि सम्मेलन के प्रथम संस्करण को वैश्विक स्तर पर अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि कठोर डबल-ब्लाइंड पीयर रिव्यू प्रक्रिया और 37 प्रतिशत चयन दर के बाद कुल 232 उच्च गुणवत्ता वाले शोधपत्रों का चयन किया गया है, जिन्हें 21 समानांतर तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा।
वहीं सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रह्लाद प्रसाद ने एनआईटी जमशेदपुर में संचालित उन्नत अनुसंधान गतिविधियों, आधुनिक परीक्षण सुविधाओं तथा विभागीय उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सम्मेलन स्मारिका का भी लोकार्पण किया गया।
शिक्षा एवं उद्योग जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने रखे विचार
सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गोपाल पाठक, महानिदेशक, सरला बिरला विश्वविद्यालय ने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों में पर्यावरण-अनुकूल बाइंडर्स एवं स्मार्ट मैटेरियल्स के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक एवं सम्मेलन के मुख्य संरक्षक प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि उच्च प्रभाव वाले इंजीनियरिंग अनुसंधान को जमीनी औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है।
विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कुमार भटनागर, प्रबंध निदेशक, टाटा स्टील UISL तथा श्री प्रभाकर सिंह, संस्थापक एवं कुलाधिपति, सोना देवी विश्वविद्यालय ने शहरी अवसंरचना विकास, नवाचार एवं दूरदर्शी नेतृत्व के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

सस्टेनेबल जियोटेक्निक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन
सम्मेलन के प्रथम दिवस पर विभाग की दो ऐतिहासिक उपलब्धियां भी दर्ज की गईं। इस दौरान नवस्थापित सस्टेनेबल जियोटेक्निक्स प्रयोगशाला (SG Lab)” का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही विभाग के वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त होने जा रहे शिक्षकों प्रो. आर. पी. सिंह एवं प्रो. ए. के. एल. श्रीवास्तव के चार दशकों के उल्लेखनीय शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योगदान को सम्मानित करते हुए एक भावपूर्ण “लीगेसी ट्रिब्यूट सेशन” आयोजित किया गया।
वैश्विक विशेषज्ञों ने दिए तकनीकी व्याख्यान
दोपहर के तकनीकी सत्रों में देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। इनमें प्रो. अनिमेष दास (आईआईटी कानपुर), प्रो. सुब्रत चक्रवर्ती (आईआईईएसटी शिबपुर) तथा प्रो. दीपक जाधव (कोरिया मैरीटाइम एंड ओशन यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया) शामिल रहे। विशेषज्ञों ने सतत अवसंरचना, उन्नत निर्माण सामग्री एवं पर्यावरण-अनुकूल इंजीनियरिंग समाधानों पर विस्तार से चर्चा की।
दिन का समापन रेडिसन होटल, जमशेदपुर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या एवं नेटवर्किंग डिनर के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों ने आपसी संवाद एवं सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को मिलेगा बल
सम्मेलन स्मारिका में प्रकाशित संदेशों में विभिन्न शिक्षाविदों एवं उद्योग विशेषज्ञों ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सतत, सुदृढ़ एवं तकनीक-आधारित अवसंरचना विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रो. गौतम सूत्रधार ने भविष्य के स्मार्ट एवं सुदृढ़ शहरों के निर्माण में अनुसंधान और नवाचार की भूमिका को अहम बताया। वहीं डॉ. प्रह्लाद प्रसाद ने सतत निर्माण सामग्रियों और पर्यावरण-अनुकूल इंजीनियरिंग प्रथाओं के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. सुभदीप मेत्या ने कहा कि यह सम्मेलन उन्नत सामग्री विज्ञान एवं सतत अवसंरचना विकास के बीच सेतु का कार्य करेगा। वहीं टाटा स्टील एवं यू.पी. प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने इसे अकादमिक-औद्योगिक सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान तथा पर्यावरणीय रूप से उत्तरदायी इंजीनियरिंग समाधान विकसित करने हेतु एक महत्वपूर्ण मंच बताया।








