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Lieutenant जनरल संदीप जैन ने दक्षिणी कमान की कमान संभाली

On: April 1, 2026 5:38 PM
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भारतीय सेना: 1 अप्रैल, 2026 को Lieutenant संदीप जैन ने भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC‑in‑C) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। इस नियुक्ति के साथ उन्होंने Lieutenant जनरल धीरज सेठ का स्थान लिया, जो आज से सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) के पद पर पदस्थ हुए हैं। यह नियुक्ति भारतीय सेना के उच्चतम स्तर पर नीति निर्माण और संचालन तत्परता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Lieutenant जनरल संदीप जैन संक्षिप्त परिचय

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Lieutenant जनरल संदीप जैन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और जून 1988 में महार रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किये थे। लगभग चार दशकों के अपने विशिष्ट करियर के दौरान उन्होंने कमान और स्टाफ दोनों ही स्तरों पर विविध और चुनौतीपूर्ण पद संभाले हैं। उनका अनुभव न केवल घरेलू ऑपरेशन थिएटर तक सीमित है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र मिशन, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्र और अन्य विदेशी मोर्चों तक फैला है।

ऑपरेशनल अनुभव घरेलू और विदेशी मोर्चे

संचालन के मामले में Lieutenant जनरल जैन का अनुभव अत्यंत विस्तृत है। उन्होंने अर्ध‑विकसित भू‑भाग में एक इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली और साथ ही दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) में भी भारतीय सैनिकों की ओर से सेवाएँ दी हैं। इसके अलावा उन्होंने स्ट्राइक कोर्स, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स और उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान संभाली है, जो भारतीय सेना के युद्ध‑तैयारी और तीव्र हल्की तैनाती के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

उनके अनुभव में ऑपरेशन पवन (ऑपरेशन शक्ति के समय श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षक बल) में भागीदारी और इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा भी शामिल है। नियंत्रण रेखा (LoC) और उत्तर‑पूर्व के अतिउच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में कई कार्यकाल उनके लिए चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण रहे हैं। वे महार रेजिमेंट के कर्नल भी हैं, जो उनकी रेजिमेंटल वफादारी और योग्यता का संकेत है।

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दक्षिणी कमान और इसकी भूमिका

Lieutenant जनरल जैन ने दक्षिणी कमान की बागडोर संभालने से पहले इसी कमान के मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ (COS) के पद पर कार्य किया था। इस दौरान उन्होंने क्षमता विकास, बलों का पुनर्गठन और समग्र संचालन तत्परता पर महत्वपूर्ण योगदान दिया। दक्षिणी कमान भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका कार्यक्षेत्र रेगिस्तानी और रण सेक्टरों, क्रीक और तटरेखा, द्वीपीय क्षेत्रों से लेकर भीतरी इलाकों तक फैला है।

इस कमान के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र न केवल आक्रामक और बचावात्मक ऑपरेशन तत्परता के लिए अहम हैं, बल्कि आतंकवाद विरोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों में भी इसकी प्रमुख भूमिका होती है।

कमान संभालने के बाद के उद्देश्य और संदेश

कमान संभालने के तुरंत बाद Lieutenant जनरल संदीप जैन ने दक्षिणी कमान युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और दक्षिणी कमान मुख्यालय में गार्ड ऑफ हॉनर ग्रहण किया। श्रद्धांजलि देने के साथ‑साथ उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि युद्ध‑तैयारी, त्याग और राष्ट्रभक्ति अभी भी सेना के मूल मूल्य हैं।

अपने बयान में उन्होंने बताया कि दक्षिणी कमान अपने विविध कार्यक्षेत्रों में संचालन तत्परता पर ध्यान बनाए रखेगी, चाहे वह रेगिस्तान और रण सेक्टर हों, क्रीक और तटरेखा हो, द्वीपीय क्षेत्र हो या भीतरी इलाके। उन्होंने संयुक्तता (जोड़ने वाली टीमवर्क और त्रि‑सेना समन्वय) को मजबूत करने, स्वदेशी क्षमता विकास और “जयऐ” (जेएआई – जय आत्मनिर्भर भारत) ढांचे के तहत तकनीकी आत्मसात करने पर जोर दिय curb सेना के लिए डिजिटलीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा प्रौद्योगिकी का महत्व पर बल दिया।

उन्होंने सभी रैंकों को निर्देश दिया कि वे बदलती संचालन संबंधी चुनौतियों के अनुरूप उच्च स्तर की तैयारी, व्यावसायिकता और युद्ध तत्परता बनाए रखें। उनका संदेश यह भी था कि नई चुनौतियों – जैसे साइबर युद्ध, हाइब्रिड थ्रेट्स और उच्च प्रौद्योगिकी युद्ध‑संचालन – के लिए सेना को निरंतर अपडेट और प्रशिक्षित रहना होगा।

शैक्षणिक योग्यता और सम्मान

Lieutenant जनरल जैन ने आर्मी वॉर कॉलेज, मऊ नारायण (झांसी) में हायर कमांड कोर्स में भाग लिया, जो भारतीय सेना के उच्चतम स्तर के अधिकारियों के लिए रणनीतिक और संचालन नियोजन का एक प्रमुख कोर्स है। इसके अलावा उन्होंने केन्या में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence College) के बराबर स्तर के राष्ट्रीय रक्षा कोर्स में भी भाग लिया, जहाँ कई देशों के वरिष्ठ अधिकारी रणनीतिक रक्षा नीति पर चर्चा करते हैं।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के सम्मान में उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और सेना पदक (SM) से सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार उनके रणनीतिक सोच, निष्ठा और युद्ध‑तैयारी में योगदान को मान्यता देते हैं।

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