चाईबासा: जिले में Intoxicating दवाओं के दुरुपयोग और अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में शनिवार को Drug इंस्पेक्टर ने चाईबासा शहर के तांम्बो चौक एवं बड़ी बाजार स्थित दो दवा दुकानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवा दुकानों में रखी दवाओं, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, भंडारण व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि दोनों प्रतिष्ठानों में दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से दोनों दुकानों में अग्निशामक यंत्र नहीं मिलने पर संचालकों को पांच दिनों के भीतर फायर एक्सटिंग्विशर लगाने का निर्देश दिया गया।
Intoxicating दवाओं के दुरुपयोग पर रोक के लिए विशेष अभियान
जिले में युवाओं के बीच नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नियमित निरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधित अथवा नियंत्रित दवाओं की बिक्री केवल निर्धारित नियमों के अनुसार ही हो।
ड्रग इंस्पेक्टर ने कहा कि मेडिकल दुकानों पर समय-समय पर औचक निरीक्षण जारी रहेगा, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
दो प्रमुख दवा दुकानों का किया गया औचक निरीक्षण
शनिवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने चाईबासा शहर के तांम्बो चौक एवं बड़ी बाजार स्थित दो दवा दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध दवाओं, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और खरीद से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।
अधिकारियों ने प्रत्येक दवा के रिकॉर्ड का मिलान मौके पर उपलब्ध स्टॉक से किया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी दवाओं का रखरखाव निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।

न्यूरोलॉजिकल दवाओं के रिकॉर्ड की हुई जांच
निरीक्षण के दौरान एक दवा दुकान में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के उपचार में उपयोग होने वाली दवाएं उपलब्ध मिलीं। इन दवाओं की खरीद, बिक्री एवं स्टॉक बैलेंस से संबंधित अभिलेखों की विस्तृत जांच की गई।
जांच में सभी रिकॉर्ड अद्यतन एवं सही पाए गए। स्टॉक रजिस्टर और बिक्री विवरण में किसी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं मिली।
वहीं दूसरी दवा दुकान में इस श्रेणी की दवाएं उपलब्ध नहीं थीं।
कोडीन युक्त कफ सिरप नहीं मिला
निरीक्षण के दौरान दोनों दवा दुकानों में कोडीन युक्त कफ सिरप की भी जांच की गई।
अधिकारियों ने पाया कि किसी भी दुकान में इस प्रकार का कफ सिरप उपलब्ध नहीं था। खरीद-बिक्री और स्टॉक से संबंधित दस्तावेजों का भी सत्यापन किया गया, जो पूरी तरह संतोषजनक पाया गया।
यह विभाग के लिए सकारात्मक संकेत माना गया क्योंकि कोडीन युक्त दवाओं का दुरुपयोग रोकना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

दवा भंडारण व्यवस्था मिली संतोषजनक
ड्रग इंस्पेक्टर ने दवाओं के भंडारण की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया।
जांच के दौरान पाया गया कि
- दवाओं को निर्धारित तापमान पर रखा गया था।
- एक्सपायरी दवाओं का अलग प्रबंधन किया गया था।
- स्टॉक का उचित रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा था।
- दवा एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों का पालन किया जा रहा था।
अधिकारियों ने भंडारण व्यवस्था को संतोषजनक बताया।
सीसीटीवी कैमरे और डस्टबिन मिले स्थापित
निरीक्षण के दौरान दोनों मेडिकल दुकानों में सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया गया।
अधिकारियों ने पाया कि—
- दोनों दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।
- ढक्कनयुक्त डस्टबिन उपलब्ध थे।
- परिसर साफ-सुथरा था।
- किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अवैध लेन-देन के प्रमाण नहीं मिले।
इस व्यवस्था पर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया।
अग्निशामक यंत्र नहीं मिलने पर सख्त निर्दे
निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण कमी सामने आई। दोनों दवा दुकानों में अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) उपलब्ध नहीं था।
इसे गंभीर सुरक्षा चूक मानते हुए ड्रग इंस्पेक्टर ने दोनों दुकानदारों को पांच दिनों के भीतर अग्निशामक यंत्र स्थापित करने का सख्त निर्देश दिया।
अधिकारियों ने कहा कि दवा दुकानों में ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण अग्नि सुरक्षा के सभी मानकों का पालन अनिवार्य है।
केवल प्रिस्क्रिप्शन पर ही दवाओं की बिक्री करने के निर्देश
ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी दवा विक्रेताओं को निर्देश दिया कि
- नियंत्रित एवं विशेष श्रेणी की दवाओं की बिक्री केवल वैध चिकित्सकीय परामर्श-पत्र (Prescription) के आधार पर ही की जाए।
- बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रतिबंधित दवाएं किसी भी परिस्थिति में न बेची जाएं।
- सभी बिक्री का रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट रखा जाए।
उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Intoxicating दवाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने पर जोर
निरीक्षण के दौरान मेडिकल संचालकों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी दुकानों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बचाव संबंधी जन-जागरूकता पोस्टर प्रदर्शित करें।

इसके साथ ही किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, असामान्य खरीदारी या अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों अथवा निकटतम पुलिस थाना को देने के निर्देश भी दिए गए।
भविष्य में भी जारी रहेगा निरीक्षण अभियान
ड्रग इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिले में नशीली दवाओं के अवैध उपयोग एवं बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इस प्रकार का निरीक्षण अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन एवं पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी दवा दुकान में नियमों का उल्लंघन न हो और युवाओं को नशीली दवाओं की अवैध उपलब्धता पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
प्रशासन की प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि दवा दुकानदारों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुरक्षित औषधि वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है।
इसके लिए नियमित निरीक्षण, रिकॉर्ड सत्यापन, जन-जागरूकता अभियान और कानून के सख्त अनुपालन पर लगातार जोर दिया जाएगा।
चाईबासा में ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा किया गया यह औचक निरीक्षण जिले में Intoxicating दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जांच के दौरान दोनों दवा दुकानों के रिकॉर्ड, स्टॉक और भंडारण व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, जबकि सुरक्षा मानकों के तहत अग्निशामक यंत्र लगाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेंगे, ताकि दवा दुकानों में पारदर्शिता बनी रहे, अवैध दवा कारोबार पर प्रभावी रोक लगे और आम जनता को सुरक्षित एवं नियमों के अनुरूप औषधियां उपलब्ध हो सकें।



















