जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान NIT जमशेदपुर में राष्ट्रीय दिवस “तिरंगा अंगीकरण दिवस” के अवसर पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान की आउटरीच एक्टिविटीज़ यूनिट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में “बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), उद्यमिता एवं मिशन-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स (डीजेएलएचसी) के कक्ष संख्या 212 में संपन्न हुआ, जिसमें प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री तीर्थंकर दास, संयुक्त सचिव, लोकसभा सचिवालय, संसद भवन, नई दिल्ली रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय, मुख्य वैज्ञानिक एवं प्रमुख, टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट डायरेक्टोरेट, सीएसआईआर, नई दिल्ली उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर तथा प्रो. राम विनय शर्मा, उपनिदेशक के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान समारोह के साथ हुई।
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने बताया तिरंगा अंगीकरण दिवस का महत्व
अपने उद्घाटन संबोधन में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता, गरिमा और संवैधानिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति की भावना के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्य अतिथि तीर्थंकर दास ने युवाओं को दिया जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश
मुख्य अतिथि श्री तीर्थंकर दास ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय तिरंगा देश की राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से संविधान में निहित आदर्शों का पालन करने और जिम्मेदार नागरिक बनकर देश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि नवाचार और वैज्ञानिक सोच भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
एनआईटी जमशेदपुर की प्रथम महिला डॉ. इंद्राणी सूत्रधार ने अपने मधुर देशभक्ति गीत से वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया। इसके अतिरिक्त डॉ. विशेष रंजन कर एवं डॉ. शंकर राय की मनमोहक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया।
सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की। उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन तथा वंदे मातरम् और राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।
आईपीआर, उद्यमिता और नवाचार पर डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय का विशेष व्याख्यान
उद्घाटन सत्र के बाद मुख्य वक्ता डॉ. देबाशीष बंद्योपाध्याय ने “बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), उद्यमिता एवं मिशन-उन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार और उद्यमिता के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि अनुसंधान तभी सफल माना जाएगा जब वह प्रयोगशालाओं से निकलकर उद्योग, समाज और बाजार तक पहुंचे। इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे अनुसंधान को व्यावसायिक रूप देने में सहायता करते हैं।
मिशन-उन्मुख नवाचार की आवश्यकता पर दिया विशेष जोर
डॉ. बंद्योपाध्याय ने कहा कि भारत को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मिशन-आधारित नवाचार को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों का उल्लेख किया

- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)
- सेमीकंडक्टर तकनीक
- उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing)
- स्वच्छ ऊर्जा
- हरित हाइड्रोजन
- सर्कुलर इकोनॉमी
- सतत विकास
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सरकार, उद्योग, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका बताई महत्वपूर्ण
व्याख्यान के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों को ज्ञान-सृजन केंद्र बताते हुए कहा कि इन संस्थानों का उद्योगों, स्टार्टअप्स एवं एमएसएमई के साथ मजबूत सहयोग नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्व के अधिकांश सफल नवाचार केंद्र इसी सहयोगात्मक मॉडल पर आधारित हैं। यदि भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बनना है तो क्षेत्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना होगा।
आईपीआर से बढ़ती है निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता
डॉ. बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया कि नवाचार नए ज्ञान का निर्माण करता है, जबकि पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिज़ाइन जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार उस ज्ञान को कानूनी सुरक्षा और आर्थिक मूल्य प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत आईपीआर प्रणाली निवेशकों का विश्वास बढ़ाती है, वेंचर कैपिटल आकर्षित करती है तथा स्टार्टअप्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में मदद करती है।
भारत में बढ़ रही है आईपी फाइलिंग
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में भारत में डिजिटल प्रक्रियाओं, नीतिगत सुधारों, तेज परीक्षण व्यवस्था और स्टार्टअप्स व एमएसएमई के लिए बढ़ाए गए प्रोत्साहनों के कारण बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए आवेदन (आईपी फाइलिंग) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से अपने नवाचारों को पेटेंट कराने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने तथा नवाचार आधारित स्टार्टअप स्थापित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा,
अनुसंधान केवल शोध-पत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे पेटेंट, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और ऐसे उत्पादोंकारूप लेना चाहिए जो विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें।”

संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे कई महत्वपूर्ण प्रश्न
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप इकोसिस्टम, अनुसंधान के व्यावसायीकरण तथा नवाचार नीति से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे।
डॉ. बंद्योपाध्याय ने सभी प्रश्नों के विस्तृत और व्यावहारिक उत्तर दिए। सत्र का समापन डॉ. सितेंदु मंडल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
आयोजन समिति ने निभाई अहम भूमिका
इस कार्यक्रम का सफल आयोजन प्रो. प्रभा चंद, अध्यक्ष, आउटरीच एक्टिविटीज़ के नेतृत्व में किया गया।
आयोजन में
- सह-अध्यक्ष – डॉ. सितेंदु मंडल
- संयोजक – डॉ. अनंत कुमार आट्टा
- सह-संयोजक – डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय
सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों एवं संस्थान के प्राध्यापकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एनआईटी जमशेदपुर में आयोजित तिरंगा अंगीकरण दिवस का यह कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बौद्धिक संपदा अधिकार, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के महत्व को भी प्रभावी ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत साझेदारी स्थापित की जाए तो भारत आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त कर सकता है। साथ ही, यह आयोजन विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नवाचार आधारित अनुसंधान एवं उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
















