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Purvi सिंहभूम में कृषि मत्स्य पशुपालन और सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने की तैयारी उपायुक्त ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

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On: June 3, 2026 5:18 PM
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जमशेदपुर: Purvi सिंहभूम जिले में कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, सहकारिता, उद्यानिकी तथा भूमि संरक्षण से जुड़े विकास कार्यों को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त श्री राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, किसानों की आय बढ़ाना तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लाभुकों तक पहुंचाना रहा।

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धान अधिप्राप्ति और ऑनलाइन एंट्री को लेकर सख्त निर्देश

सहकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने लेंपसों के माध्यम से 31 मार्च तक की गई धान अधिप्राप्ति की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विशेष रूप से धान खरीद से संबंधित ऑनलाइन डेटा अपलोड की समीक्षा की। जिन लेंपसों में अब तक धान की ऑनलाइन प्रविष्टि पूरी नहीं हो सकी है, वहां आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

इसके साथ ही जिले के विभिन्न लेंपसों में शेष बचे लगभग 35 हजार क्विंटल धान के उठाव को लेकर भी गंभीरता दिखाई गई। उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 जून तक मीलरों के माध्यम से सभी लंबित धान का उठाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और खरीद प्रक्रिया का सफल निष्पादन हो सके।

दुग्ध संग्रहण बढ़ाने और नई सहकारी समितियों को प्रोत्साहन देने पर जोर

बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि वर्तमान समय में बहरागोड़ा क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 5000 लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। इस उपलब्धि को और विस्तार देने के लिए उपायुक्त ने दुग्ध संग्रहण एवं विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को इस व्यवस्था से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही नई सहकारी समितियों के गठन, निबंधन तथा उन्हें सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश भी दिया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

बुरूडीह डैम में केज कल्चर से मत्स्य पालन शुरू करने की पहल

मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक में जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने को लेकर विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने गत वर्ष वितरित किए गए मत्स्य स्पॉन, उनके माध्यम से हुए उत्पादन तथा वर्तमान वर्ष की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली।

उन्होंने बुरूडीह डैम में आधुनिक तकनीक आधारित केज कल्चर मत्स्य पालन प्रारंभ करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश दिया। केज कल्चर पद्धति के माध्यम से सीमित जल क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे स्थानीय मत्स्य पालकों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान ने भी जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कम से कम 10 मॉडल तालाब विकसित करने पर बल दिया। इन मॉडल तालाबों के माध्यम से आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे अन्य किसान भी प्रेरित होकर इस क्षेत्र से जुड़ सकेंगे।

भूमि संरक्षण योजनाओं का होगा भौतिक सत्यापन

भूमि संरक्षण विभाग की समीक्षा के दौरान डीप बोरिंग, मिनी ट्रैक्टर तथा पंपसेट योजनाओं के लाभुकों का भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन लाभुकों को सरकारी सहायता प्रदान की गई है, वे वास्तव में योजनाओं का प्रभावी उपयोग कर रहे हैं या नहीं।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके। इससे योजनाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता दोनों में सुधार होगा।

उद्यानिकी गतिविधियों के विस्तार पर विशेष फोकस

उद्यान विभाग की समीक्षा में जिले में बागवानी और उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। उपायुक्त ने माली प्रशिक्षण कार्यक्रम से अधिक से अधिक लाभुकों को जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थियों की वर्तमान गतिविधियों का भी आकलन करने को कहा, ताकि यह देखा जा सके कि प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं।

इसके अलावा जिले के संभावित क्षेत्रों में नई नर्सरियों के विकास की योजना पर भी बल दिया गया। नर्सरी विकास से पौध उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

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मधुमक्खी पालन और स्ट्रॉबेरी खेती को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में आधुनिक और लाभकारी कृषि गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया। उपायुक्त ने मधुमक्खी पालन, स्ट्रॉबेरी खेती तथा अन्य औद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खी पालन न केवल अतिरिक्त आय का स्रोत है बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होता है। वहीं स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसलें किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं। इन गतिविधियों को बढ़ावा देकर जिले में कृषि आधारित उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी की जा रही है।

खरीफ सीजन से पहले किसानों को समय पर मिलेगा केसीसी लाभ

आगामी खरीफ मौसम को देखते हुए किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। उपायुक्त ने लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) आवेदनों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि सभी पात्र किसानों के आवेदन शीघ्र स्वीकृत किए जाएं और स्वीकृत ऋण राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इससे किसानों को खेती-बाड़ी के लिए आवश्यक पूंजी समय पर उपलब्ध हो सकेगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

किसान क्रेडिट कार्ड योजना किसानों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराती है, जिससे वे बीज, खाद, सिंचाई तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं।

पशुपालन योजनाओं का शीघ्र लाभ दिलाने पर जोर

पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान बकरा, सुकर, कुक्कुट तथा अन्य पशुधन वितरण योजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया। उपायुक्त ने सभी लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करते हुए लाभुकों के बीच पशुधन वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और इससे जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन से हजारों परिवारों की आय में वृद्धि संभव है। सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराकर ग्रामीण स्वावलंबन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

Purvi सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह समीक्षा बैठक ग्रामीण विकास, कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन तथा उद्यानिकी क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। बुरूडीह डैम में केज कल्चर, मॉडल तालाबों का विकास, दुग्ध संग्रहण विस्तार, मधुमक्खी पालन, स्ट्रॉबेरी खेती और समय पर केसीसी उपलब्ध कराने जैसे निर्णय सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे।

जिले में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का विकास होगा, बल्कि रोजगार सृजन, स्वरोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव जिले के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास पर देखने को मिलेगा।

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