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फर्जी पत्रकार बनकर हाई वोल्टेज ड्रामा,सड़क हादसे के बाद बवाल, पुलिस ने किया काबू

On: April 27, 2026 12:29 PM
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जमशेदपुर: जमशेदपुर में एक सड़क हादसे के बाद ऐसा हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जिसने न सिर्फ मौके पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया बल्कि पुलिस प्रशासन को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस पूरे मामले में कुछ लोग खुद को पत्रकार बताकर मौके पर पहुंचे और हंगामा खड़ा कर दिया। बाद में पुलिस को हस्तक्षेप कर उन्हें काबू में लेना पड़ा।

मिली जानकारी के अनुसार, एक सड़क दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर काफी भीड़ जमा हो गई थी। इसी दौरान कुछ युवक खुद को पत्रकार बताते हुए वहां पहुंचे और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से उलझने लगे। उन्होंने खुद को मीडिया से जुड़ा बताते हुए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की और कार्रवाई में दखल देने लगे।

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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ये तथाकथित “पत्रकार” पुलिस से तीखी बहस करने लगे और स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया। देखते ही देखते मामूली स्थिति विवाद में बदल गई और वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के कामकाज में बाधा डालते हुए ये लोग खुद को प्रेस का प्रतिनिधि बताकर रौब झाड़ने लगे।

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए इन लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो पुलिस को उन्हें काबू में लेना पड़ा। कुछ लोगों को मौके से हटाया गया और पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया।

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि ये लोग असली पत्रकार नहीं थे, बल्कि फर्जी तरीके से खुद को मीडिया कर्मी बताकर मौके पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना ने एक बार फिर “फर्जी पत्रकारों” की बढ़ती समस्या को उजागर कर दिया है।

दरअसल, देश के कई हिस्सों में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां लोग पत्रकार बनकर लोगों को डराने, दबाव बनाने या निजी स्वार्थ सिद्ध करने की कोशिश करते हैं। अदालतों ने भी इस पर चिंता जताई है कि फर्जी पत्रकारों की गतिविधियों से असली मीडिया की छवि प्रभावित होती है।

इस घटना के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या जांच में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी, चाहे वह खुद को किसी भी पहचान से जोड़कर पेश करे। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क हादसे जैसे संवेदनशील मामलों में जहां राहत और बचाव कार्य प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां इस तरह का ड्रामा स्थिति को और बिगाड़ देता है।

यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है। जरूरत है कि फर्जी पत्रकारों पर सख्ती से कार्रवाई हो और असली पत्रकारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि समाज में सही सूचना का प्रवाह बना रहे।

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