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बागबेड़ा के युवा वैज्ञानिक डॉ. Nikhil कुमार सिंह को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों पर मिला सम्मान

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On: May 18, 2026 4:47 PM
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जमशेदपुर: बागबेड़ा कॉलोनी के युवा वैज्ञानिक डॉ. Nikhil कुमार सिंह को जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों द्वारा सम्मानित किया गया। बागबेड़ा कॉलोनी स्थित कुंवर सिंह मैदान में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके माता-पिता ओमप्रकाश सिंह एवं परिवार के सदस्यों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

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समारोह के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉ. निखिल कुमार सिंह ने अपने कठिन परिश्रम, प्रतिभा और शोध कार्यों के माध्यम से न केवल बागबेड़ा बल्कि पूरे जमशेदपुर और झारखंड का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। साधारण परिवेश से निकलकर विश्वस्तरीय वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल करना युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

भारत सरकार की प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए हुआ चयन

सम्मान समारोह के दौरान पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने डॉ. Nikhil कुमार सिंह की उपलब्धियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उनका चयन भारत सरकार की प्रतिष्ठित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रेरणा संकाय फेलोशिप के लिए हुआ है। यह फेलोशिप देश के चुनिंदा प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को प्रदान की जाती है, जो विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं।

इसके अतिरिक्त उन्हें “अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान” की ओर से “प्रधानमंत्री प्रारंभिक शोध अनुदान” भी प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि उनके शोध कार्यों की गुणवत्ता और वैज्ञानिक योगदान को दर्शाती है।

वर्तमान में डॉ. निखिल कुमार सिंह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में सहायक प्राध्यापक एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रेरणा संकाय फेलो के रूप में कार्यरत हैं।

कृषि अनुसंधान में एआई और जीनोमिक्स पर कर रहे महत्वपूर्ण कार्य

डॉ. निखिल कुमार सिंह का शोध कार्य मुख्य रूप से जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि अनुसंधान पर केंद्रित है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से वे कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने में जुटे हुए हैं।

उनका शोध विशेष रूप से गेहूं की फसलों में होने वाले रोगों, जीनोमिक विविधताओं तथा आनुवंशिक तत्वों के अध्ययन पर आधारित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में उनका शोध कृषि उत्पादन बढ़ाने, रोग प्रतिरोधी फसल विकसित करने और किसानों की आय में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्विट्जरलैंड और जर्मनी के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में किया शोध

बागबेड़ा जैसे साधारण क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों तक पहुंचने का डॉ. निखिल कुमार सिंह का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने स्विट्जरलैंड के न्यूशातेल विश्वविद्यालय से जनसंख्या जीनोमिक्स विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने जर्मनी के प्रतिष्ठित म्यूनिख तकनीकी विश्वविद्यालय तथा कील विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोध कार्य किया। इन संस्थानों में उन्होंने आधुनिक जीनोमिक तकनीकों, जैव सूचना विज्ञान और कृषि वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया।

उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है और कई वैज्ञानिक मंचों पर उन्हें आमंत्रित भी किया गया।

अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र और पुस्तकों के जरिए बनाई अलग पहचान

डॉ. निखिल कुमार सिंह अब तक लगभग 10 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। उनके शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं, जिनमें कृषि जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स से जुड़े महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

इसके साथ ही उन्होंने जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स विषय पर दो पुस्तकें भी लिखी हैं। उनकी चर्चित पुस्तक जीनोम विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैव सूचना उपकरण” छात्रों और शोधार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय रही है।

इस पुस्तक में उन्होंने सरल भाषा में यह समझाने का प्रयास किया है कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक का उपयोग जीनोमिक्स और जैव अनुसंधान में किया जा सकता है। वैज्ञानिक समुदाय के अलावा युवा छात्रों में भी यह पुस्तक काफी चर्चित रही है।

विदेश में अवसर मिलने के बावजूद भारत लौटने का लिया निर्णय

सम्मान समारोह में लोगों ने इस बात की विशेष सराहना की कि विदेशों में बेहतर अवसर मिलने के बावजूद डॉ. Nikhil कुमार सिंह ने भारत लौटकर कृषि जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों तक पहुंचे। उनका मानना है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि छोटे शहरों और गांवों के छात्र भी मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

डॉ. सिंह ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि निरंतर सीखने की इच्छा, मेहनत और आत्मविश्वास के माध्यम से कोई भी छात्र वैश्विक विज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।

पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया क्षेत्र का गौरव

सम्मान समारोह में मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि डॉ. Nikhil कुमार सिंह की उपलब्धियां पूरे बागबेड़ा क्षेत्र के लिए गर्व की बात हैं। ग्राम प्रधानों और पंचायत सदस्यों ने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित करने से अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में विज्ञान और तकनीक देश के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बन चुकी है। ऐसे में डॉ. सिंह जैसे युवा वैज्ञानिक देश को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

समारोह में बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित

इस सम्मान समारोह में बागबेड़ा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। मुख्य रूप से ग्राम प्रधान चुनका मार्डी, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, उप मुखिया संतोष ठाकुर, मुखिया उमा मुंडा, मायावती टुडू, धनमुनी मार्डी, उपमुखिया धनंजय कुमार, कुमोद यादव, वार्ड सदस्य सीमा पांडे, कुमुद रंजन सिंह, पूजा कुमारी, समाजसेवी भोला झा, दिग्विजय सिंह, अनील मिश्रा, पवन ओझा, राजीव चौधरी, विजय झा, मिथिलेश सिंह, अरविंद पांडेय, अनुरोध पांडेय, गुड्डू ओझा, रिकू शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

समारोह का माहौल उत्साह और गर्व से भरा हुआ था। स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉ. निखिल कुमार सिंह की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने डॉ. Nikhil कुमार सिंह

डॉ. Nikhil कुमार सिंह की सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो किसी भी छोटे शहर या साधारण परिवार से निकलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

आज जब युवा पीढ़ी तेजी से विज्ञान और तकनीक की ओर आकर्षित हो रही है, ऐसे में डॉ. सिंह जैसे वैज्ञानिक समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल जमशेदपुर बल्कि पूरे देश के युवाओं को विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

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