जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज, साकची, जमशेदपुर के उर्दू पोस्टग्रेजुएट विभाग में प्रसिद्ध उर्दू कहानीकार एवं कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. मंज़र काज़मी की स्मृति में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उर्दू विभाग के सभी प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर डॉ. मंज़र काज़मी के सुपुत्र एवं करीम सिटी कॉलेज के राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. तनवीर जमाल काज़मी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
तिलावत-ए-कुरान से कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सबीहा फिरदौस द्वारा तिलावत-ए-कुरान से हुई। इसके बाद उर्दू पोस्टग्रेजुएट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शहबाज़ अंसारी ने कार्यक्रम के विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मंज़र काज़मी के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान का परिचय प्रस्तुत किया।
उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर जमाल काज़मी का स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी ने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका व्यक्तित्व एक साहित्यकार के साथ-साथ कुशल प्रशासक के रूप में भी याद किया जाता है।
26वीं पुण्यतिथि पर किया गया स्मरण
मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर जमाल काज़मी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 12 अगस्त को डॉ. मंज़र काज़मी की 26वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर उन्हें याद करना उनके साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी एक प्रसिद्ध उर्दू कहानीकार होने के साथ-साथ एक सफल प्रशासक भी थे। उन्होंने अपने जीवन में साहित्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया और अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ी।
साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. तनवीर जमाल काज़मी ने कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी को उनकी चर्चित पुस्तक “लक्ष्मण रेखा” और उर्दू साहित्य में लिखी गई उनकी महत्वपूर्ण कहानियों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
उनकी रचनाओं में भाषा की रोचकता, जीवन के प्रति गहरी समझ और समाज की वास्तविकताओं का प्रभाव दिखाई देता है। उनकी कहानियां पाठकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने के साथ-साथ सोचने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
सरल और प्रभावशाली भाषा थी रचनाओं की विशेषता
मुख्य अतिथि ने कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी की साहित्यिक रचनाओं की एक प्रमुख विशेषता उनकी भाषा और जीवन को देखने का स्पष्ट दृष्टिकोण था। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से आम जीवन के अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उनकी लेखनी में कहानी कहने की कला के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। यही कारण है कि उर्दू साहित्य में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
Karim सिटी कॉलेज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
डॉ. मंज़र काज़मी केवल साहित्यकार ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक के रूप में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई। करीम सिटी कॉलेज के प्राचार्य के रूप में उन्होंने कॉलेज के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्राचार्य के रूप में उनके कार्यकाल को कॉलेज के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और संस्थान की प्रगति के लिए अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन किया।
पूर्व विभागाध्यक्ष और प्राचार्य के रूप में भी स्मरण
कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापक प्रो. मुहम्मद ईसा (गौहर अज़ीज़) और डॉ. सादिक इक़बाल ने भी सभा को संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने डॉ. मंज़र काज़मी के साथ अपने अनुभवों और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को साझा किया।
उन्होंने अपने भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और प्रसिद्ध कहानीकार के रूप में डॉ. मंज़र काज़मी के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उनके व्यक्तित्व में साहित्यिक प्रतिभा, प्रशासनिक क्षमता और शैक्षणिक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय था।
विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं डॉ. मंज़र काज़मी
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी की साहित्यिक और शैक्षणिक यात्रा वर्तमान पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। उनके जीवन और रचनाओं का अध्ययन विद्यार्थियों को साहित्य के साथ-साथ समाज और जीवन को समझने का दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी साहित्यकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह होती है कि उसकी रचनाएं समय बीतने के बाद भी पाठकों को प्रभावित करती रहें। इस दृष्टि से डॉ. मंज़र काज़मी का साहित्यिक योगदान महत्वपूर्ण है।
साहित्य और शिक्षा के बीच मजबूत संबंध
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि साहित्य और शिक्षा एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। साहित्य व्यक्ति की संवेदनशीलता को बढ़ाता है और समाज को समझने की दृष्टि प्रदान करता है, जबकि शिक्षा उस दृष्टि को व्यापक बनाने का अवसर देती है।
डॉ. मंज़र काज़मी का जीवन इन दोनों क्षेत्रों के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण रहा। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ शिक्षा जगत में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
उर्दू साहित्य में योगदान को याद किया गया
उर्दू विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. मंज़र काज़मी के साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी रहा। वक्ताओं ने उनकी कहानियों और साहित्यिक रचनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उर्दू साहित्य के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
उन्होंने कहा कि साहित्यकार समाज की संवेदनाओं को शब्द देता है और अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों को रचनाओं के माध्यम से दर्ज करता है। डॉ. मंज़र काज़मी ने भी अपनी लेखनी के माध्यम से इस भूमिका को निभाया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में Karim सिटी कॉलेज के उर्दू पोस्टग्रेजुएट विभाग के सभी प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने डॉ. मंज़र काज़मी के जीवन एवं साहित्यिक योगदान को याद किया।
कार्यक्रम के दौरान उनके साहित्य, प्रशासनिक कार्यों और कॉलेज के विकास में योगदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।
नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मंज़र काज़मी जैसे साहित्यकारों के जीवन और रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उनके साहित्य का अध्ययन विद्यार्थियों को उर्दू भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि साहित्यिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण साहित्यकारों के जीवन और रचनाओं के बारे में जानकारी मिल सके।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सादिक इक़बाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विभाग के सभी प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं और कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. मंज़र काज़मी के साहित्यिक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनकी रचनाओं और व्यक्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए उपस्थित लोगों ने उनकी स्मृति को सम्मानपूर्वक नमन किया।
















