
जमशेदपुर: Jamshedpur में पर्यावरण संरक्षण जल संवर्धन और पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। शहर में आयोजित होने वाले नदी और पर्वत पर राष्ट्रीय सम्मेलन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन 22 मई शुक्रवार को सुबह 10 बजे से साकची स्थित मोती लाल नेहरू पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम में शुरू होगा। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से जल विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और नीति निर्माता भाग लेने पहुंच रहे हैं।

यह सम्मेलन न केवल नदियों और पहाड़ों के संरक्षण को लेकर व्यापक विमर्श का मंच बनेगा, बल्कि भविष्य के लिए ठोस कानून और नीतियों का मसौदा तैयार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। सम्मेलन में जल संकट, पहाड़ों के अंधाधुंध दोहन, पर्यावरणीय असंतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा होगी।
देश के प्रमुख पर्यावरण विशेषज्ञ होंगे शामिल
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल होंगी। कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गोवड़ा और देशभर में “जलपुरुष” के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह करेंगे।
इसके अलावा सम्मेलन में Jamshedpur पश्चिम के विधायक सरयू राय, प्रसिद्ध पर्यावरणविद दिनेश मिश्र, डॉ. गोपाल शर्मा, बी. सत्यनारायणा, बिभूति देबबर्मा, अरुण कुमार शुक्ला, युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण, भारतीय वन सेवा के अधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी, तथा एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीयूष कांत पाण्डेय समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे।
इन सभी विशेषज्ञों ने वर्षों तक नदियों, जल स्रोतों और पर्वतीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए कार्य किया है। ऐसे में यह सम्मेलन अनुभव और शोध आधारित सुझावों का एक बड़ा मंच बनने जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में पर्यावरणीय चुनौतियों पर होगा व्यापक विमर्श
सम्मेलन के संरक्षक और Jamshedpur पश्चिम के विधायक सरयू राय ने जानकारी दी कि उद्घाटन सत्र सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगा। इस दौरान देश में तेजी से बढ़ते जल संकट, नदियों के प्रदूषण, पहाड़ों के कटाव और पर्यावरणीय असंतुलन पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नदियों और पर्वतों को बचाना केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रश्न बन चुका है। इसी उद्देश्य से इस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, ताकि समाज, सरकार और विशेषज्ञ मिलकर ठोस समाधान तैयार कर सकें।
तकनीकी सत्र में जल और पर्वत संरक्षण कानून पर होगी चर्चा
दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक आयोजित तकनीकी सत्र सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। इस सत्र में पर्वत और जल संरक्षण, उनके संवर्धन तथा विशेष संरक्षण अधिनियम की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा होगी।
इस सत्र में कुल नौ विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। विशेषज्ञ यह बताएंगे कि किस प्रकार तेजी से हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के कारण पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। साथ ही नदियों में बढ़ते प्रदूषण और जल स्रोतों के सूखने की समस्या पर भी गंभीर चिंतन होगा।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव देंगे कि नदियों और पर्वतीय क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण देने के लिए किस प्रकार की नीतियां बनाई जानी चाहिए। सम्मेलन में ऐसे कानूनों की आवश्यकता पर बल दिया जाएगा, जो प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को नियंत्रित कर सकें।
ग्रुप डिस्कशन में तैयार होगा पर्वत संरक्षण कानून का मसौदा
सम्मेलन का दूसरा तकनीकी सत्र अपराह्न 3 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित होगा। इस दौरान पर्वत संरक्षण के लिए प्रस्तावित कानून के मसौदे पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
इस ग्रुप डिस्कशन में कुल 12 विशेषज्ञ भाग लेंगे और अपनी राय देंगे। विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि प्रस्तावित मसौदे में कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाएं ताकि पहाड़ों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिल सके।
चर्चा के दौरान पर्यावरणीय संतुलन, वन क्षेत्र संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भूमिका, खनन गतिविधियों पर नियंत्रण तथा जल स्रोतों की रक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सत्र नीति निर्माण की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीसरे तकनीकी सत्र में प्रस्तुतीकरण और पैनल चर्चा
शाम 5:45 बजे से रात 7:45 बजे तक तीसरा तकनीकी सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न विशेषज्ञ और पैनलिस्ट अपने शोध, अनुभव और सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
इस सत्र में कुल 10 पैनलिस्ट शामिल होंगे। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से यह बताया जाएगा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जल संरक्षण और पर्वतीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए किस प्रकार के मॉडल सफल रहे हैं।
विशेषज्ञ यह भी साझा करेंगे कि सामुदायिक भागीदारी और जनजागरूकता के जरिए प्राकृतिक संसाधनों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जा सकता है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सुझाव और रणनीतियां सामने आने की उम्मीद है।
देशभर से Jamshedpur पहुंच रहे डेलीगेट्स
राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से डेलीगेट्स Jamshedpur पहुंचने लगे हैं। कई प्रतिनिधि गुरुवार तक शहर पहुंच जाएंगे।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के जल संरक्षण मॉडल, नदी पुनर्जीवन योजनाओं और पर्वतीय संरक्षण अभियानों की जानकारी साझा की जाएगी। इससे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे संगठनों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन के आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई दिशा तय करेगा।
इन संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से हो रहा सम्मेलन
दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इनमें युगांतर भारती, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, जल बिरादरी, नेचर फाउंडेशन और मिशन Y प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन संस्थाओं का उद्देश्य जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक जनजागरण अभियान चलाना है। सम्मेलन के माध्यम से सरकार और समाज दोनों को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
सम्मेलन में स्मारिका का भी होगा विमोचन
इस अवसर पर एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा। इसमें नदियों, पहाड़ों, जल संरक्षण और पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़े महत्वपूर्ण लेख, शोध और विचार प्रकाशित किए गए हैं।
यह स्मारिका विशेषज्ञों, शोधार्थियों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के लिए उपयोगी दस्तावेज साबित होगी। सम्मेलन में आने वाले प्रतिभागियों को यह स्मारिका उपलब्ध कराई जाएगी।
नदी और पर्वत संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता
आज देशभर में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। नदियों का जलस्तर घट रहा है, पहाड़ों का कटाव बढ़ रहा है और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। ऐसे समय में Jamshedpur में आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह सम्मेलन केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने का प्रयास करेगा। विशेषज्ञों की राय, तकनीकी सुझाव और नीति निर्माण से जुड़े विचार आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय कर सकते हैं।
जमशेदपुर में आयोजित यह आयोजन देशभर में जल और पर्वत संरक्षण आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाला साबित हो सकता है। आने वाले समय में इस सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और निष्कर्ष पर्यावरण संरक्षण की राष्ट्रीय नीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।















