दिल्ली: कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का छात्र आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार और CJP नेताओं के बीच तीन दौर की लंबी बातचीत के बाद संगठन ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। इसी के साथ संगठन ने देशभर के छात्रों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने-अपने घर लौट जाएं और कानून व्यवस्था बनाए रखें।
यह आंदोलन मुख्य रूप से NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों, छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चलाया जा रहा था। पिछले 36 दिनों से हजारों छात्र जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। लगातार तीन चरणों में हुई वार्ता के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बन गई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले CJP प्रवक्ता सौरव दास?
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने संगठन की सभी महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बताया कि बातचीत सकारात्मक रही और सरकार ने लिखित आश्वासन देने पर भी सहमति जताई है।
सौरव दास ने कहा कि सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार करने के बाद आंदोलन जारी रखने का कोई कारण नहीं बचता। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था से दूर रहें और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन समाप्त करें।
CJP की तीन प्रमुख मांगें क्या थीं?
आंदोलन शुरू होने के समय CJP ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी थीं।
1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
संगठन की पहली और सबसे बड़ी मांग तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। CJP का आरोप था कि NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें पद छोड़ना चाहिए।
2. छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने की मांग
दूसरी मांग आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की थी। संगठन का कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वाले छात्रों पर कार्रवाई उचित नहीं है।
3. मृत छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा
तीसरी प्रमुख मांग थी कि आंदोलन और NEET विवाद से जुड़े मृत छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए।
सरकार ने FIR वापस लेने का दिया भरोसा
सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने पर सहमति जताई है। चाहे मामला दिल्ली का हो या अन्य राज्यों का, जहां भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार है, सभी मामलों की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगभग 15 से 20 FIR दर्ज हुई थीं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इन सभी मामलों की प्रतियां तीन से चार दिनों के भीतर संगठन को उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर FIR वापस ली जाएगी।
संगठन ने सरकार को एक लिखित ड्राफ्ट भी सौंपा है, जिसमें इन सभी वादों को लिखित रूप देने की मांग की गई है। सरकार ने इसे जल्द साझा करने का भरोसा दिया है।
पीड़ित परिवारों को मिलेगा 1 करोड़ रुपये का मुआवजा
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बताया कि सरकार ने NEET विवाद से प्रभावित मृत छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि यह सहायता सभी कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी नियमों के अनुसार दी जाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिल सके।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
सरकार और CJP के बीच अंतिम दौर की बातचीत से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बताया गया कि उन्होंने दो पन्नों का लगभग 575 शब्दों वाला इस्तीफा पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने निर्णय की जानकारी दी।
पत्र में उन्होंने युवाओं के बीच फैली गलतफहमियों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें लिखीं। हालांकि, इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और आंदोलनकारियों ने खुशी जाहिर की और इसे अपनी बड़ी जीत बताया।

जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगें स्वीकार किए जाने की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर जश्न शुरू हो गया। छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, नारे लगाए और खुशी में नाच-गाना भी किया।
कई छात्रों का कहना था कि यह जीत केवल CJP की नहीं बल्कि पूरे छात्र समुदाय की जीत है। उनका मानना है कि लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलन करने के बाद सरकार को उनकी बात सुननी पड़ी।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पर रहेगी। CJP ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर सभी वादों को लागू किया जाता है तो आंदोलन पूरी तरह समाप्त माना जाएगा। वहीं यदि किसी भी मांग को लागू करने में देरी होती है तो संगठन आगे की रणनीति पर विचार कर सकता है।
तीन दौर की बातचीत के बाद CJP और केंद्र सरकार के बीच सहमति बनने से लंबे समय से चल रहा छात्र आंदोलन समाप्त हो गया है। सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने और पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने जैसी प्रमुख मांगों को स्वीकार करने का दावा किया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अपने सभी आश्वासनों को तय समय के भीतर किस प्रकार लागू करती है।

















