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पत्नी की हत्या मामले में पति और देवर को आजीवन कारावास Chaibasa अदालत ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला

On: June 10, 2026 6:06 PM
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मझगांव: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित हत्या मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम Chaibasa की अदालत ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अभियुक्त मो. शोएब उर्फ शेफ और मो. मेराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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यह फैसला वर्ष 2020 में हुई शाहजहां परवीन की हत्या से जुड़े मामले में सुनाया गया है, जिसकी सुनवाई लंबे समय से न्यायालय में चल रही थी।

29 नवंबर 2020 को हुई थी महिला की हत्या

मामले के अनुसार 29 नवंबर 2020 को शाहजहां परवीन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानते हुए कार्रवाई शुरू की थी।

जांच में आरोप लगाया गया कि महिला की गला दबाकर हत्या की गई थी। मामले में उसके पति मो. शोएब उर्फ शेफ और देवर मो. मेराज को आरोपी बनाया गया था। घटना के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने की जांच

मझगांव थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न पहलुओं से जांच की। पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य प्रमाणों और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच पूरी की।

जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई।

सत्रवाद संख्या 228/2021 में हुई सुनवाई

यह मामला सत्रवाद संख्या 228/2021 के रूप में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, Chaibasa की अदालत में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष गवाहों के बयान, दस्तावेजी प्रमाण और वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था, जिस पर बुधवार को अंतिम फैसला सुनाया गया।

साक्ष्यों के आधार पर दोनों अभियुक्त दोषी करार

न्यायालय ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद दोनों अभियुक्तों को दोषी माना। अदालत ने यह पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत प्रमाण अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

इसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

आजीवन कारावास के साथ लगाया गया जुर्माना

अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ-साथ 10-10 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। न्यायालय के इस फैसले को गंभीर आपराधिक मामलों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों के आधार पर दिए गए निर्णय न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को मजबूत करते हैं।

हत्या के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण

यह मामला इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि वैज्ञानिक जांच और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकती है। पुलिस की जांच और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों ने इस मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

न्यायालय का यह फैसला हत्या जैसे गंभीर अपराधों के प्रति कानून की सख्ती को भी दर्शाता है।

समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने वाला फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड मिलने से समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों के बीच कानून का भय बना रहता है।

ऐसे निर्णय यह संदेश भी देते हैं कि गंभीर अपराधों में दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उचित दंड मिल सकता है और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है।

न्यायिक निर्णय से मिली कानूनी प्रक्रिया को मजबूती

Chaibasa की अदालत द्वारा सुनाया गया यह निर्णय पश्चिमी सिंहभूम जिले के चर्चित हत्या मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला माना जा रहा है। पुलिस जांच, वैज्ञानिक साक्ष्यों और न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद आए इस निर्णय ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सशक्त जांच और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से गंभीर मामलों में न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 से जुड़े इस हत्या मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ और अदालत ने दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया।

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