
जमशेदपुर: झारखंड की जीवनरेखा दामोदर नदी फिर से खतरे में है? जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने Bokaro थर्मल पावर स्टेशन (बीटीपीएस) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह प्लांट दूषित बहिस्राव के जरिए दामोदर को प्रदूषित कर रहा है। यह मुद्दा न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी चिंता का विषय है।

आज हम इस ब्लॉग में सरयू राय के बयान को विस्तार से समझेंगे, बीटीपीएस के प्रदूषण की पूरी कहानी खोलेंगे और जानेंगे कि दामोदर बचाओ आंदोलन क्या कर रहा है। अगर आप झारखंड या पर्यावरण से जुड़े मुद्दों में रुचि रखते हैं, तो अंत तक पढ़िए।
Bokaro थर्मल पावर स्टेशन क्या है?
Bokaro थर्मल पावर स्टेशन दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) का एक प्रमुख ताप विद्युत संयंत्र है, जो झारखंड के Bokaro जिले में स्थित है। यह कोयले से बिजली पैदा करता है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब बिजली उत्पादन की प्रक्रिया से निकलने वाला दूषित बहिस्राव सही तरीके से निपटाया न जाए।
यह प्लांट कोनार और दामोदर नदियों के संगम के पास है, जो इसे प्रदूषण फैलाने का आसान रास्ता देता है। सरयू राय ने हाल ही में कहा कि प्लांट से राख, छाई, तैलीय पदार्थ और हानिकारक रसायन युक्त पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यह पहली बार नहीं है; पहले भी ऐसी घटनाएं हुई है

दामोदर नदी प्रदूषण की समस्या क्यों गंभीर है?
दामोदर नदी को ‘झारखंड की उदास नदी’ कहा जाता है क्योंकि थर्मल प्लांट्स से फ्लाई ऐश और कोयला कणों के कारण यह बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। Bokaro थर्मल जैसे प्लांट्स मुख्य दोषी हैं, जहां दहन से निकली राख नदियों में मिल जाती है। इससे नदी का पानी जहरीला हो जाता है, मछलियां मर जाती हैं और आसपास के लोग बीमार पड़ते हैं।
सरयू राय के अनुसार, बीटीपीएस का दूषित बहिस्राव ऐश पौंड में जाने के बजाय पाइपलाइन फटने से बाहर गिर रहा है और नाले के जरिए कोनार नदी पहुंच रहा है। यह पानी राख, छाई और रसायनों से भरा होता है, जो दामोदर को सीधे प्रदूषित करता है। बरसात में तो हालात और खराब हो जाते हैं क्योंकि पानी तेज बहाव के साथ चला जाता है।
पिछले सालों में ऐश पौंड भरने की समस्या बनी रही। 2025 में आंदोलनों के कारण छाई ढुलाई रुकी, जिससे प्लांट बंद होने की नौबत आई। जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया, लेकिन प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
सरयू राय का बयान और कार्रवाई
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय दामोदर बचाओ आंदोलन के प्रमुख नेता हैं। उन्होंने Bokaro उपायुक्त को दूषित बहिस्राव की कई तस्वीरें भेजी हैं और जिला पर्यावरण समिति से कठोर कार्रवाई की मांग की है। राय ने कहा कि बीटीपीएस प्रबंधन आदतन ऐसा करता है क्योंकि ऐश पौंड का नियमित निस्तारण नहीं हो पा रहा।
यह कोई नई बात नहीं। 2023 और 2025 में भी सरयू राय ने इसी तरह आरोप लगाए थे। उन्होंने एनजीटी जाने की धमकी दी और डीसी से अर्थदंड लगाने को कहा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले भी बीटीपीएस पर करोड़ों का जुर्माना लगाया है।
दामोदर बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने शनिवार सुबह तस्वीरें भेजीं, जिसमें पाइपलाइन फटकर बहिस्राव नदी में गिरता दिखा। राय ने बोर्ड से अपील की कि उद्योगों पर सख्ती करें।
ऐश पौंड और प्रदूषण का चक्र
ताप बिजली घरों में कोयला जलाने से ऐश (राख) निकलती है, जो ऐश पौंड में भेजी जाती है। लेकिन बीटीपीएस में पाइप फटना या दीवार टूटना आम है। इससे दूषित पानी बाहर आ जाता है। 2025 में ऐश पौंड भरने से छाई उठाव रुका, जिससे संकट बढ़ा।
सरयू राय ने चेतावनी दी कि बरसात में पूरा बहिस्राव नदी में डाल दिया जाएगा। राज्य प्रदूषण बोर्ड की जिम्मेदारी है कि ऐसे उद्योगों पर कार्रवाई हो। पहले चंद्रपुरा प्लांट पर भी ऐसा ही जुर्माना लगा था।
पर्यावरण विशेषज्ञ कहते हैं कि फ्लाई ऐश नदियों को लाल रंग दे देती है और जीव-जंतुओं के लिए घातक है। दामोदर बचाओ आंदोलन ने नदी को 80% स्वच्छ करने में सफलता पाई, लेकिन बीटीपीएस जैसी लापरवाही सब बिगाड़ रही है।
दामोदर बचाओ आंदोलन का इतिहास
सरयू राय द्वारा शुरू दामोदर बचाओ आंदोलन ने वर्षों की मेहनत से नदी को काफी स्वच्छ किया। चूल्हापानी से चंदवा तक गंदगी खत्म हो गई। लेकिन थर्मल प्लांट्स की चोर दरवाजे वाली हरकतें फिर शुरू हो गईं।
आंदोलन ने प्रदूषण बोर्ड को सक्रिय किया और जुर्माने लगवाए। 2026 में भी फरवरी में नदी का अध्ययन होगा। यह आंदोलन स्थानीय लोगों को जागरूक कर रहा है।
प्रदूषण के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव
दामोदर का प्रदूषण मछलियों, पक्षियों और पशुओं को मार रहा है। पानी पीने से कैंसर, त्वचा रोग होते हैं। आसपास के गांवों में पानी की कमी और बीमारियां बढ़ रही हैं। बरसात में प्रदूषण नीचे की नदियों तक पहुंच जाता है।
लंबे समय से यह समस्या चली आ रही है। सरयू राय की तस्वीरें इसकी पुष्टि करती हैं। सरकार को स्थायी समाधान चाहिए, जैसे बेहतर ऐश निस्तारण और मॉनिटरिंग।
सरकारी और कानूनी कदम क्या हैं?
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले कार्रवाई की। जिला प्रशासन ने ऐश पौंड विवाद सुलझाए। लेकिन सरयू राय कहते हैं कि पर्याप्त नहीं। एनजीटी और पर्यावरण कानूनों का सख्ती से पालन हो।
डीवीसी को ऐश पौंड बढ़ाने या रिसाइक्लिंग पर जोर देना चाहिए। केंद्र सरकार की नदी संरक्षण योजनाओं का लाभ लें।
अगर बीटीपीएस ने सुधार नहीं किया, तो आंदोलन तेज होगा। बरसात से पहले कार्रवाई जरूरी। स्थानीय लोग जागरूक हों और रिपोर्ट करें। दामोदर को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
Bokaro थर्मल पावर स्टेशन फिर से दामोदर को प्रदूषित करने लगा है, जैसा सरयू राय ने कहा। यह समय है कि प्रशासन, डीवीसी और बोर्ड मिलकर कार्रवाई करें। दामोदर बचाओ आंदोलन जैसे प्रयासों से नदी स्वच्छ हुई, अब इसे बनाए रखें। आइए हम सब मिलकर आवाज उठाएं ताकि हमारी नदी सुरक्षित रहे। अगर आप भी योगदान देना चाहें, तो स्थानीय आंदोलन से जुड़ें।















