मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

West Bengal में धार्मिक भत्तों पर रोक! नई सरकार का बड़ा फैसला, इमाम-मुअज्जिन और पुरोहितों का मानदेय बंद

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: May 20, 2026 2:34 PM
Follow Us:
Shubhendu
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1
  • धर्म आधारित सरकारी सहायता योजनाओं को खत्म करने की तैयारी, शिक्षा और रोजगार पर फोकस करने का दावा

Kolkata: West Bengal में पदभार संभालते ही, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तुरंत और निर्णायक कदम उठाने शुरू कर दिए; उन्होंने धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों को पहले दिए जाने वाले मासिक और वार्षिक भत्तों को बंद कर दिया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार की भूमिका पुजारियों और इमामों को वज़ीफ़ा देना नहीं, बल्कि रोज़गार के अवसर पैदा करना है। आज से, ऐसे सभी धार्मिक भत्ते बंद कर दिए गए हैं।

A 2

West Bengal की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने एक बड़ा और चर्चित फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने धर्म के आधार पर दिए जाने वाले सरकारी भत्तों और मासिक मानदेय योजनाओं को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत अब इमाम, मुअज्जिन और मंदिरों से जुड़े पुरोहितों को राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला मासिक आर्थिक सहयोग बंद कर दिया जाएगा।

सरकार ने साफ कहा है कि सरकारी धन का उपयोग धार्मिक आधार पर सहायता देने के बजाय शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार और युवाओं के विकास से जुड़ी योजनाओं में किया जाएगा। इसे नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

THE NEWS FRAME

क्या-क्या होगा बंद?

राज्य सरकार के फैसले के अनुसार जून 2026 से धर्म आधारित सभी नियमित मानदेय योजनाएं समाप्त कर दी जाएंगी। अब तक पश्चिम बंगाल में विभिन्न धार्मिक समुदायों से जुड़े लोगों को सरकारी सहायता मिलती रही थी। इनमें मुस्लिम समुदाय के इमाम और मुअज्जिन के अलावा हिंदू धार्मिक स्थलों से जुड़े पुरोहित भी शामिल थे।

नई सरकार का तर्क है कि राज्य का दायित्व किसी धार्मिक वर्ग को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि जनता के लिए समान अवसर तैयार करना है।

West Bengal के मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने कहा कि सरकार का उद्देश्य “भत्ता बांटना” नहीं बल्कि राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षा, स्कॉलरशिप और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, सरकारी पैसे का उपयोग उन क्षेत्रों में होना चाहिए जहां उसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक भत्तों पर खर्च होने वाला बजट अब मेरिट आधारित योजनाओं और छात्र कल्याण कार्यक्रमों में लगाया जाएगा।

1 जून 2026 से लागू हो सकता है फैसला

सूत्रों के अनुसार सरकार मई 2026 के अंत तक प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी कर लेगी, जिसके बाद 1 जून 2026 से यह फैसला प्रभावी हो सकता है। संबंधित विभागों को योजनाओं की समीक्षा और बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने दावा किया है कि यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि “समान विकास मॉडल” की दिशा में उठाया गया कदम है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार पर लंबे समय से धार्मिक समूहों को सरकारी सहायता देने के आरोप लगते रहे थे। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

अब सत्ता में आने के बाद नई सरकार ने इसे अपने शुरुआती बड़े फैसलों में शामिल कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद और बहस का कारण बन सकता है।

हालांकि सरकार इस फैसले को विकास और समान अवसरों से जोड़कर पेश कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे धार्मिक और सामाजिक संतुलन से जुड़ा मुद्दा बना सकता है। अल्पसंख्यक संगठनों और धार्मिक समूहों की ओर से भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

बदलती प्रशासनिक प्राथमिकताओं का संकेत

राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह निर्णय केवल आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक सोच में परिवर्तन का संकेत भी माना जा रहा है। सरकार अब कल्याणकारी योजनाओं को धार्मिक पहचान के बजाय शिक्षा और सामाजिक विकास के आधार पर केंद्रित करना चाहती है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह फैसला जमीनी स्तर पर किस तरह लागू होता है और इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति, सामाजिक समीकरणों तथा आगामी चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ता है।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM
Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment

धार्मिक

See All

लाइफस्टाइल

See All

मौसम

See All

खेल

See All

क्राइम

See All

Entertainment

See All

ज्योतिष

See All
Link copied