
जमशेदपुर | विशेष रिपोर्ट

जमशेदपुर में एक बार फिर इंसानियत और सेवा भावना की मिसाल देखने को मिली है। किताडीह गुरुद्वारा साहिब के हेडग्रंथी भाई किशन सिंह के पुत्र सतपाल सिंह के इलाज के लिए समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। इस क्रम में किताडीह निवासी अर्जुन सिंह वालिया ने ₹41,500 की आर्थिक सहायता देकर पीड़ित परिवार को बड़ी राहत पहुंचाई।
पंजाब में हादसा, फिर झारखंड में इलाज की जंग
जानकारी के अनुसार, सतपाल सिंह पंजाब में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जमशेदपुर लाया गया, जहां टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी नस दब गई है और स्थिति गंभीर है, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल रेफर किया गया।
सिख संगत ने दिखाई एकजुटता
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने इलाज की बड़ी चुनौती थी। ऐसे में:
- किताडीह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
- सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी
- स्थानीय सिख संगत
सभी ने मिलकर मदद का हाथ बढ़ाया।
किताडीह गुरुद्वारा की संगत ने तुरंत ₹21,000 की राशि एकत्र की और युवक को रांची के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज में लगा 60–70 हजार, वालिया बने सहारा
इलाज, ऑपरेशन और बाद की चिकित्सा प्रक्रियाओं में कुल मिलाकर लगभग ₹60,000 से ₹70,000 तक का खर्च आया। इस कठिन समय में अर्जुन सिंह वालिया ने ₹41,500 की बड़ी मदद देकर परिवार को संभाल लिया।
“दशवंद की राशि से की सेवा” – अर्जुन सिंह वालिया
मीडिया से बातचीत में अर्जुन सिंह वालिया ने कहा:
“यह धनराशि गुरुओं के बताए मार्ग पर चलते हुए निकाले गए दशवंद की है, जिसका उपयोग जरूरतमंदों की सहायता के लिए किया जाता है। हमने वही किया।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस नेक कार्य में किताडीह की सिख संगत का अहम योगदान रहा है।
व्हाट्सएप मुहिम से बढ़ा सहयोग
सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भी मदद की अपील की, जिसके बाद सिख समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया। सभी के सहयोग से सतपाल सिंह का सफल इलाज संभव हो सका। ऑपरेशन के बाद उनका इलाज जमशेदपुर के मानगो स्थित गुरुनानक अस्पताल में चला और अब उन्हें स्वस्थ होकर छुट्टी दे दी गई है।
परिवार ने जताया आभार
पीड़ित परिवार ने अर्जुन सिंह वालिया, गुरुद्वारा कमेटियों और पूरी सिख संगत का दिल से आभार व्यक्त किया है। वहीं, सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी वालिया के इस योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
यह घटना दर्शाती है कि समाज में आज भी सेवा, सहयोग और मानवता जीवित है। जब सरकारी और निजी संसाधनों के बीच आर्थिक चुनौतियां सामने आती हैं, तब समुदाय की एकजुटता ही असली सहारा बनती है।
संदेश: “संगत और सेवा की ताकत से हर मुश्किल आसान हो सकती है।”















