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साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर सरिया में निकला मौन जुलूस, बच्चों ने तख्तियों से दिया अहिंसा का संदेश

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On: May 25, 2026 9:21 PM
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सरिया : विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा तथा हाल ही में हुई आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सोमवार को सरिया जैन समाज द्वारा एक विशाल मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुषों के साथ बच्चों ने भी भाग लिया। बच्चों ने हाथों में अहिंसा, साधु-संतों की सुरक्षा और मानवता से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

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मौन जुलूस सरिया नगर के विभिन्न मार्गों से शांतिपूर्ण तरीके से गुजरा। इस दौरान समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की कि विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

एसडीओ कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

जुलूस समाप्त होने के बाद समाज के प्रतिनिधि अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया। हालांकि एसडीओ के कार्यालय में मौजूद नहीं रहने के कारण ज्ञापन कार्यालय में जमा कराया गया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने Dhananjay Kumar को भी ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में विहाररत जैन साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करने तथा साधु-संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में शामिल करने की मांग की गई।

अहिंसा का संदेश देने वालों की सुरक्षा जरूरी

समाज के लोगों ने कहा कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, तपस्वी और पैदल विहार करने वाले संत होते हैं। वे समाज को शांति, संयम और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन और समाज दोनों की विशेष जिम्मेदारी बनती है।प्रतिनिधियों ने कहा कि साधु-संतों के साथ होने वाली घटनाएं केवल एक समाज की नहीं, बल्कि पूरे मानव समाज की संवेदनाओं से जुड़ा विषय हैं।

सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा

एसडीपीओ धनंजय कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को मामले को गंभीरता से देखने तथा सकारात्मक कार्रवाई करने का भरोसा दिया। ज्ञापन के अंत में समाज की ओर से भावनात्मक संदेश भी दिया गया कि जो स्वयं निहत्थे होकर भी मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा करना समाज और शासन दोनों का नैतिक दायित्व है।”

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