
झारखंड: चक्रधरपुर के Silphodi गांव में जय माँ पाऊड़ी समिति के हाथों से शुरू हुआ चार दिवसीय 16 प्रहर हरि कीर्तन महायज्ञ भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम बन गया। इस यज्ञ का भव्य शुभारंभ रविवार, 12 अप्रैल 2026 को हुआ, जिसमें जनसैलाब उतर आया और कलश यात्रा से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक शांति का, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। आज हम इस 16 प्रहर हरि कीर्तन यज्ञ का विवरण जानेंगे, जिसने झारखंड और पश्चिम बंगाल की छह शीर्ष संकीर्तन मंडलियों को एक साथ जोड़ा। इस लेख के जरिए आप इस यज्ञ की गहराई, महत्व और भक्तों की भावनाओं को समझ पाएंगे। चलिए, शुरू करते हैं इस आध्यात्मिक महोtsāva का सफर।

16 प्रहर हरि कीर्तन महायज्ञ का शुभारंभ Silphodi
11 अप्रैल, 2026 से शुरू हुआ यह चार दिवसीय 16 प्रहर हरि कीर्तन महायज्ञ चक्रधरपुर के Silphodi गांव में जय माँ पाऊड़ी समिति के सौजन्य से आयोजित हुआ। रविवार, 12 अप्रैल को धूमधाम से शुभारंभ के साथ श्री राधा गोविंद नाम संकीर्तन का विधिवत प्रारंभ हुआ, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता डॉ. विजय सिंह गागराई उपस्थित हुए, जिन्होंने भक्तों को संबोधित करके इस यज्ञ के महत्व को रेखांकित किया।
यह महायज्ञ हरि नाम की ताकत को दर्शाता है – 16 प्रहर (दिन-रात लगातार) नाम संकीर्तन से भक्ति और एकता का संदेश फैलता है। आयोजन का उद्देश्य न केवल आत्मिक शांति, बल्कि ग्रामीण समाज को धार्मिक एकता में बांधना है। इसमें झारखंड और पश्चिम बंगाल की छह प्रसिद्ध संकीर्तन मंडलियाँ शामिल हैं, जिनके भजनों से गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठा।
Silphodi कलश यात्रा भक्तों का जनसैलाब
कलश यात्रा इस यज्ञ का सबसे भव्य अवसर रही। रविवार को सुबह से ही श्रद्धालु तैयारी करने लगे और गांव की सड़कों पर रंग-बिरंगी पोशाकें दिखने लगीं। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने फूलों, तुलसी, और चंदन से कलश सजाए। यात्रा गांव के मुख्य मंदिर से शुरू हुई और गलियों में घूमते हुए भक्ति गीतों की धुन पर आगे बढ़ी।
जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ “जय श्री राधे गोविंद” के जयकारे गूंज रहे थे। महिलाएँ नाचते-गाते हुए कलश उठाकर चल रही थीं, जबकि बच्चे और बुजुर्ग उनके साथ ताली बजा रहे थे। यह यात्रा एक विश्वास दिलाती है कि संकीर्तन और पारंपरिक रीतियाँ ग्रामीण जीवन की धड़कन बन जाती हैं।

यज्ञ की तारीखें और विशेष आकर्षण
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 11 अप्रैल | अनुष्ठान की शुरुआत, तैयारियाँ |
| 12 अप्रैल | शुभारंभ, कलश यात्रा |
| 13 अप्रैल | विशाल रात्रि जागरण |
| 14 अप्रैल | समापन, अंतिम भजन |
छह प्रसिद्ध संकीर्तन मंडलियाँ और उनका योगदान
इस महायज्ञ में झारखंड और पश्चिम बंगाल की छह प्रसिद्ध संकीर्तन मंडलियों को आमंत्रित किया गया। इनमें शामिल हैं:
- झींकपानी महिला संप्रदाय (झारखंड): महिला भजनियों की टोली, जिनके भजनों में गहरी भक्ति है।
- निमाई महतो गुनियाँ एवं कांचन दा (पुरुलिया, प. बंगाल): विशेषता गायन और तालबद्ध नृत्य।
- शांति दास आमडा: शास्त्रीय शैली वाले भजन।
- तैरा सासता कीर्तन पार्टी: लोक गीतों का मिश्रण।
- भावो नायक (झारखंड): उत्साही टोली जो भक्तों को नाचने पर मजबूर करती है।
इन मंडलियों के भजनों ने यज्ञ को अलौकिक बना दिया। विशेष रूप से विशाल रात्रि जागरण (13 अप्रैल) में ये टोलियाँ रात भर भजन गाती हैं, जिससे भक्त भाव-विभोर हो उठते हैं।
भाषण और सामाजिक संदेश
डॉ. विजय सिंह गागराई ने इस अवसर पर कहा, “हरि कीर्तन से न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि इससे सामाजिक समरसता और भाईचारा भी मजबूत होता है।” उनका लक्ष्य गांव के लोगों को एकता के लिए प्रेरित करना था। समिति के अध्यक्ष प्रभाकर खंडाईत, अशोक दास और अन्य सदस्यों ने इस यज्ञ को ग्रामीण विकास का हिस्सा बनाने की बात कही। यह आयोजन स्थानीय लोगों की एकता और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है।
16 प्रहर हरि कीर्तन यज्ञ Silphodi में एक खूबसूरत संदेश छोड़ गया – धर्म और संस्कृति हमें एक सूत्र में बांधती हैं। यह यज्ञ ग्रामीण जीवन की समृद्धि और भक्तों के लिए आशीर्वाद बना। यदि आप भी भक्ति में रुचि रखते हैं, तो इस तरह के आयोजन में शामिल हो सकते हैं। यह लेख घटनाओं को विस्तार से उजागर करता है, लेकिन मानवता और भावनाओं का सम्मान भी जरूरी है।









