Government’s Major Plans to Promote Electric Vehicles (EVs) in India: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के इस्तेमाल, चार्जिंग सुविधाओं और इनके घरेलू निर्माण को तेजी से बढ़ाने के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारी उद्योग मंत्रालय और अन्य विभागों द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करना और देश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
हाल ही में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों और विभिन्न योजनाओं के ब्योरे को सरल शब्दों में नीचे समझा जा रहा है:
1. फेम इंडिया योजना (चरण-II)
- अवधि और बजट: यह योजना 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2024 तक 5 साल के लिए चलाई गई थी, जिसके लिए कुल 11,500 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था।
- मुख्य लाभ: इसके तहत इलेक्ट्रिक दो-पहिया (e-2W), तीन-पहिया (e-3W) और चार-पहिया (e-4W) वाहनों की खरीद पर छूट दी गई। साथ ही, ई-बसों और पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों (EVPCS) के लिए अनुदान दिया गया।
- उपलब्धियां: इस योजना के जरिए करीब 16.72 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा मिला। इसके अलावा, 30 जून 2026 तक देश भर में 5,197 इलेक्ट्रिक बसें तैनात की जा चुकी हैं और चार्जिंग स्टेशनों के लिए 912.50 करोड़ रुपये बांटे गए।
2. पीएम ई-ड्राइव योजना (PM E-Drive)
- बजट और शुरुआत: 10,900 करोड़ रुपये के बजट वाली यह नई योजना 29 सितंबर 2024 को शुरू की गई।
- दायरा: इसके तहत ई-2W, ई-3W, ई-ट्रक, ई-बसों और ई-एम्बुलेंस सहित लगभग 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को सब्सिडी दी जाती है।
- ई-बसें और चार्जिंग: इस योजना के तहत 14,028 ई-बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसमें से 13,800 बसें देश के 7 बड़े शहरों (दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत) के लिए हैं (जहां की आबादी 40 लाख से ज्यादा है), और 200 बसें जम्मू-कश्मीर के लिए हैं। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशनों के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
3. ऑटोमोबाइल और बैटरी निर्माण के लिए पीएलआई (PLI) योजनाएं
- ऑटो सेक्टर के लिए पीएलआई (PLI-Auto): 23 सितंबर 2021 को 25,938 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई इस योजना का मकसद भारत में एडवांस ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को बढ़ावा देना है।
- बैटरी स्टोरेज के लिए नेशनल प्रोग्राम (ACC PLI): 9 जून 2021 को 18,100 करोड़ रुपये के साथ शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश में उन्नत रसायन सेल (ACC) की बैटरियों का मजबूत घरेलू उत्पादन करना है, ताकि 50 GWh क्षमता की बैटरी क्षमता तैयार हो सके।
4. अन्य प्रमुख योजनाएं और कदम
- पीएम ई-बस सेवा (भुगतान सुरक्षा तंत्र): 28 अक्टूबर 2024 को शुरू की गई 3,435.33 करोड़ रुपये की इस योजना का उद्देश्य 38,000 से अधिक ई-बसों के संचालन को सुरक्षित बनाना है, ताकि भुगतान में देरी या चूक न हो।
- इलेक्ट्रिक कार विनिर्माण नीति (एसपीएमईपीसीआई): 15 मार्च 2024 को लाई गई इस नीति के तहत कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रिक कारें बनाने के लिए कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। साथ ही, शुरुआती कुछ सालों में देश में ही पार्ट्स का इस्तेमाल (घरेलू मूल्य संवर्धन) 25% से बढ़ाकर 50% करना अनिवार्य किया गया है।
आम जनता और खरीदारों के लिए अन्य सहूलियतें
सरकार ने देश में EV को आम आदमी के लिए सुलभ बनाने के लिए कई नीतिगत बदलाव भी किए हैं:
- सस्ता जीएसटी: इलेक्ट्रिक वाहनों और इनके चार्जर्स पर जीएसटी घटाकर केवल 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
- हरी नंबर प्लेट और छूट: सड़क परिवहन मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, बैटरी से चलने वाले वाहनों को हरे रंग की नंबर प्लेट दी जाती है और इन्हें परमिट की जरूरतों से छूट मिलती है।
- सड़क कर में छूट: राज्यों को परामर्श दिया गया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स (सड़क कर) में छूट दें, जिससे गाड़ी खरीदते समय शुरुआती कीमत कम पड़े।











