मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम: ऊर्जा सुरक्षा की ओर भारत का एक साहसिक और वैज्ञानिक कदम

On: July 11, 2026 1:28 PM
Follow Us:
Ethonol
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

---Advertisement---
Netaji Advertisement

नई दिल्ली : पिछले कुछ समय से पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर चल रही चर्चाओं और भ्रामक सूचनाओं के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। 23 जून, 2026 को जारी एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति और 4 जुलाई, 2026 को वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा दी गई जानकारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम न केवल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है, बल्कि देश की आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Headlines

---Advertisement---
Netaji Advertisement

क्या इथेनॉल भारत के लिए नया है?

अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या भारत ने इस कार्यक्रम को लागू करने में जल्दबाजी की है। इसका उत्तर एक स्पष्ट ‘नहीं’ है। इथेनॉल कोई नया या प्रायोगिक ईंधन नहीं है। एक सदी से भी अधिक समय पहले, हेनरी फोर्ड ने अपनी ‘मॉडल टी’ कार को इथेनॉल पर चलाने के लिए डिज़ाइन किया था। ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश दशकों से इसका उपयोग कर रहे हैं।

भारत में इस कार्यक्रम की यात्रा 2001 में एक प्रायोगिक परियोजना के साथ शुरू हुई थी। 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा हुई और 2006 तक कई राज्यों में 5 प्रतिशत मिश्रण (E5) लागू कर दिया गया था। 2013 में संप्रग सरकार के कार्यकाल में इसे राजपत्र में अधिसूचित किया गया था। अतः, यह स्पष्ट है कि यह कोई रातोंरात लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि दो दशकों से अधिक की एक सुनियोजित प्रक्रिया है।

2014 से अब तक: एक बड़ा बदलाव

2014 तक, भारत में इथेनॉल का मिश्रण मात्र 1.5 प्रतिशत पर अटका हुआ था। इसका मुख्य कारण था—इथेनॉल की अपर्याप्त उपलब्धता। उस समय हम पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर थे, जो एक मौसमी फसल है।

सरकार ने इस चुनौती को समझा और 2018 में ‘जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति’ के साथ एक मौलिक बदलाव की शुरुआत की। पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, कृषि और वित्त सहित कई मंत्रालयों ने मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार किया, जिससे इथेनॉल का उत्पादन न केवल बढ़ा, बल्कि स्थायी भी हुआ। 2021 में तेल कंपनियों ने इथेनॉल संयंत्रों के लिए निवेश के नए द्वार खोले, जिससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई।

ई20 (E20) का वैज्ञानिक आधार और सुरक्षा

उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ई20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) पुराने इंजनों को नुकसान पहुँचाता है। सरकार का कहना है कि ई20 को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और परीक्षण एजेंसियों के साथ व्यापक परामर्श किए गए थे।

मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसे दिग्गजों ने यह पुष्टि की है कि लाखों पुराने वाहनों की सर्विसिंग के दौरान ई20 से जंग या घिसाव की कोई व्यापक शिकायत नहीं मिली है। ऑटोमोबाइल निर्माता इन वाहनों की वारंटी का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, जो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यह ईंधन सुरक्षित है। ई20 न केवल एक उच्च-गुणवत्ता वाला ईंधन है, बल्कि यह बेहतर पिकअप और कम प्रदूषण सुनिश्चित करता है।

आर्थिक लाभ: किसानों से ऊर्जा सुरक्षा तक

इथेनॉल मिश्रण का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल को सस्ता करना नहीं, बल्कि भारत की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ सुनिश्चित करना है। आज भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इथेनॉल के उपयोग से:

  • विदेशी मुद्रा की बचत: अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।
  • किसानों की आय: 1.66 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों की जेब में गए हैं। हमारे किसान अब केवल ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ बन गए हैं।
  • मूल्य स्थिरता: चूँकि इथेनॉल का एक हिस्सा घरेलू उत्पादित होता है, इसलिए वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर हमारे पेट्रोल पंपों पर उतना नहीं पड़ता, जितना अन्य देशों में देखने को मिलता है।

क्यों वापस जाना संभव नहीं है?

कुछ लोग मांग करते हैं कि शुद्ध पेट्रोल या ई10 को अलग से उपलब्ध कराया जाए। सरकार के अनुसार, भारत में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों का विशाल नेटवर्क है। इतने बड़े पैमाने पर तीन अलग-अलग तरह के ईंधन की समानांतर आपूर्ति श्रृंखला चलाना न केवल अत्यधिक खर्चीला होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स के लिहाज़ से भी अव्यावहारिक होगा।

इसके अलावा, बैंकों और निवेशकों ने इस कार्यक्रम पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये सालाना का निवेश किया है। इस क्षमता को बेकार कर देना राष्ट्र के हित में नहीं होगा। जिस तरह हम सार्वजनिक परिवहन में पुरानी बसों को हटाकर आधुनिक और स्वच्छ बसें लाते हैं, उसी तरह ई20 की ओर बढ़ना प्रगति की निशानी है।

ई20 एक वैज्ञानिक रूप से सत्यापित, सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन है। भारत ने विज्ञान और सुरक्षा से समझौता किए बिना अपनी शासन प्रणाली और क्रियान्वयन में सुधार करके इस लक्ष्य को हासिल किया है।

उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। ई20 न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि यह आयात कम करके भारत को आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रगति का मार्ग पीछे मुड़कर नहीं, बल्कि तकनीक को अपनाकर ही तय होता है।

यह रिपोर्ट पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा हाल ही में साझा किए गए तथ्यों पर आधारित है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23 जून, 2026 को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था, जिसमें भ्रामक सूचनाओं को दूर करते हुए तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दिए गए थे। वाहन निर्माता कंपनियों ने भी 4 जुलाई, 2026 को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्यक्रम के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किए।

इन स्पष्टीकरणों के बावजूद, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। निम्नलिखित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्‍यू) इन चिंताओं के तथ्यात्मक और साक्ष्य-आधारित उत्तर प्रदान करते हैं।

प्रश्न 1: ब्राजील जैसे देशों को इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को हासिल करने में दशकों लग गएतो भारत ने ऐसा करने में जल्दबाजी क्यों दिखाई?

  • सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है । हमने इथेनॉल का आविष्कार नहीं किया है। एक सदी से भी अधिक समय पहले हेनरी फोर्ड ने मॉडल टी को इथेनॉल पर चलने के लिए डिज़ाइन किया था और ब्राज़ील तथा संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया भर के अनेक देश दशकों से इथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं।
  • यह भी इतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शुरू नहीं हुआ था। इस पहल का एक लंबा संस्थागत इतिहास और कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं (ये सभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं- कुछ अनुलग्नक-1 में दी गई हैं )।
  • वर्ष 2001 में एक प्रायोगिक इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसकी औपचारिक घोषणा 2004 में की गई और वर्ष 2006 तक कई राज्यों में ई 5 (पांच प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) को लागू किया गया।
  • इस नीतिगत ढांचे को बाद में संप्रग सरकार के दौरान जनवरी 2013 में भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था। ये सार्वजनिक अभिलेख के मामले हैं।
  • भारत ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पांच प्रतिशत  इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया था। दुर्भाग्यवश  इस महत्वाकांक्षा के बावजूद वर्ष 2014 तक मिश्रण लगभग 1.5 प्रतिशत पर ही स्थिर रहा।
  • किसी ने भी ईंधन के रूप में इथेनॉल पर सवाल नहीं उठाया था। यह बात तो वैश्विक स्तर पर पहले ही तय हो चुकी थी। असली चुनौती यह थी कि भारत पर्याप्त मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन कैसे कर सकता है ।
  • उस समय हम लगभग पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर थे जो एक मौसमी फसल है जिसकी वार्षिक इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 400 करोड़ लीटर थी। उत्पादन का यह स्तर मामूली मिश्रण लक्ष्यों के लिए भी अपर्याप्त था।
  • इस बाधा को पहचानते हुए सरकार ने अपने दृष्टिकोण में मौलिक परिवर्तन किया। मई 2018 में जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति के शुभारंभ के साथ सरकार ने बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण शुरू किया। यह वास्तव में सरकार का एक समग्र मिशन बन गया।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालयखाद्य और सार्वजनिक वितरण विभागसड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयभारी उद्योग मंत्रालयभारतीय रेलवे और कई अन्य मंत्रालयों ने कच्चे माल के विस्तारबुनियादी ढांचे के निर्माणप्रौद्योगिकी को समर्थन देनेसामग्री को सुव्यवस्थित करनेमांग की निश्चितता पैदा करने और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक साथ मिलकर काम किया।

अगस्त 2021 में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया जब भारत की तेल विपणन कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने इथेनॉल की कमी वाले क्षेत्रों में समर्पित इथेनॉल संयंत्र (डीईपी) स्थापित करने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति जारी की।

इन परियोजनाओं ने निवेश परिदृश्य को बदल दिया क्योंकि इन्होंने निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान कीं:

  • तेल विपणन कंपनियों द्वारा सुनिश्चित दीर्घकालिक खरीद समझौते;
  • एस्क्रो तंत्र के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ त्रिपक्षीय वित्तपोषण व्यवस्था, जिससे निवेश जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है;
  • एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के लिए एथेनॉल की अनिवार्य आपूर्ति;
  • इन संयंत्रों को स्वाभाविक रूप से पूरी क्षमता से काम करने में लगभग दो साल लगे क्‍योंकि यह क्षमता तुरंत हासिल नहीं की जा सकती थी।
  • एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जून 2021 में हासिल हुई जब नीति आयोग ने ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद इथेनॉल मिश्रण पर अपनी व्यापक योजना प्रकाशित की।
  • रिपोर्ट में इथेनॉल के पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के साथ-साथ ग्रामीण आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को भी दर्शाया गया था।
  • उस समय, भारत की 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की आवश्यकता लगभग 500-600 करोड़ लीटर इथेनॉल प्रति वर्ष थी । जैसे-जैसे नए निवेश आए और उत्पादन क्षमता बढ़ी यह स्पष्ट हो गया कि देश जल्द ही लगभग 1,200 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करने में सक्षम हो जाएगा । आपूर्ति सुनिश्चित हो जाने के बाद 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखना तर्कसंगत और जिम्मेदारीपूर्ण दोनों ही था ।
  • इसलिए, यह सुझाव कि भारत ने इथेनॉल मिश्रण में “जल्दबाजी” की, तथ्यों से बिल्कुल भी समर्थित नहीं है।
  • यह यात्रा दो दशकों से अधिक समय तक चली है जिसमें 2001 में प्रायोजित परियोजनाएं, 2013 में नीति अधिसूचना, 2018 के बाद संस्थागत सुधार, 2021 में शुरू हुए बड़े पैमाने पर निवेश और फिर मिश्रण के स्तर में सावधानीपूर्वक नियोजित, चरणबद्ध वृद्धि शामिल है।
  • इसे शुरू करने से पहले ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, ओएमसी, डीएफपीडी आदि सहित सभी हितधारकों से परामर्श किया गया था।
  • यह प्रगति पूरी तरह सोच समझकर की गई है:
एथेनॉल आपूर्ति वर्षमिश्रण प्रतिशत / स्थिति
ईएसवाई 2020-21~8.1 प्रतिशत
ईएसवाई 2021-2210.0 प्रतिशत
ईएसवाई 2022-2312.1 प्रतिशत
ईएसवाई 2023-2414.60 प्रतिशत
ईएसवाई 2024-2519.20 प्रतिशत
ईएसवाई 2025-26 (नवंबर-जून 2026)20 प्रतिशत
  • ब्राजील को इसमें दशकों लग गए क्योंकि वह दुनिया का पहला बड़े पैमाने पर इथेनॉल इकोसिस्टम बना रहा था।
  • भारत को वैश्विक अनुभवों से सीखने, सिद्ध तकनीकों को अपनाने, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने और एक सुदृढ़ निवेश ढांचा तैयार करने का लाभ मिला। हमने विज्ञान या सुरक्षा से समझौता किए बिना, शासन, योजना और क्रियान्वयन में सुधार कर कार्यान्वयन की समयसीमा को कम किया है।
  • भारत में इथेनॉल की सफलता के पीछे की असली कहानी एक सावधानीपूर्वक नियोजित, चरणबद्धक्रमिक और चरणबद्ध परिवर्तन है। यह  कोई जल्दबाजी में या रातोंरात लिया गया निर्णय नहीं है।

प्रश्न 2: उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल10 या ई20 खरीदने का विकल्प क्यों नहीं दिया जाताऔर उन पुराने वाहनों का क्या होगा जिन पर केवल ई10 के अनुकूल होने का लेबल लगा होता है?

  • जब भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का निर्णय लिया तो ऑटोमोबाइल उद्योग को हर चरण में शामिल किया गया। ई10 अनुकूलता के लिए निर्माताओं से 2020-21 की शुरुआत में ही काफी पहले परामर्श लिया गया था। भारत ने जून 2022 में अपना ई10 लक्ष्य (पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) हासिल कर लिया जो कि ईएसवाई 2020-21 की निर्धारित तिथि से पांच महीने पहले था।
  • ई20 के लिए और भी कठोर प्रक्रिया अपनाई गई। ऑटोमोबाइल निर्माताओं, घटक आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ व्यापक परामर्श आयोजित किए गए। आईएमसी का रोडमैप 2021 से सार्वजनिक डोमेन में था और इसमें ई-20 तक पहुंचने का एक सुनियोजित मार्ग निर्धारित किया गया था।
  • सामग्री की अनुकूलताइंजन अंशांकनईंधन प्रणालीचलाने की क्षमतास्थायित्वउत्सर्जन और ईंधन दक्षता से लेकर हर पहलू की जांच की गई ।
  • ई20 को लागू करने से पहले सरकार ने वाहन निर्माता कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों, परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत परामर्श के कई दौर आयोजित किए ताकि संपूर्ण प्रणाली की तैयारी सुनिश्चित हो सके। यदि ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियां इन परिणामों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीतो वे कभी भी उत्पाद का समर्थन नहीं करती और वाहनों की वारंटी का पालन नहीं करती । आज लगभग सभी वाहन निर्माता कंपनियां सभी वाहनों (पुराने या नए) की वारंटी का पालन कर रही हैं, इसका कारण यही है कि वे परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा थे।
  • इसके अलावा मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की जिनमें 1.5 करोड़ पुरानेगैर-ई20 प्रमाणित वाहन शामिल थे और 20 से संबंधित जंगअसामान्य घिसाव या पुर्जों के जीवनकाल में किसी प्रकार की क्षति की रिपोर्ट नहीं की । हीरो मोटोकॉर्प ने भी इसी तरह का अनुभव बताया है। यह वास्तविक साक्ष्य छिटपुट मामलों की तुलना में कहीं अधिक विश्वसनीय है।
  • यह सच है कि कुछ वाहनों में ईंधन की खपत में 3-5 प्रतिशत की कमी हो सकती है । लेकिन माइलेज केवल एक मापदंड है।
  • ई20 में काफी उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉकिंग गुण, तेज दहन, बेहतर पिकअप, सुचारू त्वरण और स्वच्छ इंजन संचालन की सुविधा मिलती है 
  • इससे नगण्य मात्रा में छोटे कणों का उत्सर्जन होता है और जीवनचक्र कार्बन उत्सर्जन में लगभग 40 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आती है।
  • संक्षेप में कहें तो, यह ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छउच्च गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है।
  • यहां असली सवाल यह है: यदि एक स्वच्छतेज और कम प्रदूषणकारी ईंधन उपलब्ध है तो हम जानबूझकर एक घटिया विकल्प क्यों चुनेंगे?
  • यह सुझाव कि प्रत्येक पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 एक साथ उपलब्ध होने चाहिए, भारत के ईंधन वितरण नेटवर्क की वास्तविकताओं को भी नजरअंदाज करता है।
  • भारत में एक लाख से अधिक खुदरा दुकानें संचालित होती हैं जिन्हें रिफाइनरियों, टर्मिनलों, डिपो और पाइपलाइनों के व्यापक नेटवर्क का समर्थन प्राप्त है।
  • इस विशाल आपूर्ति श्रृंखला में बेस पेट्रोल के कई ग्रेड बनाए रखने से एक बहुत बड़ी सामग्री परिवहन संबंधी चुनौती पैदा होगी। इससे रखरखाव लागत में वृद्धि होगी,  स्‍टॉक प्रबंधन जटिल हो जाएगा और परिचालन दक्षता कम हो जाएगी।
  • लोग अक्सर प्रीमियम पेट्रोल का उदाहरण देते हैं। यह तुलना उचित नहीं है। प्रीमियम ईंधन सीमित मात्रा में और काफी अधिक कीमत पर बेचे जाने वाले विशिष्ट उत्पाद हैं क्योंकि इनमें निष्‍पादन क्षमता बढ़ाने वाले विशेष योजक मिलाए जाते हैं। ये अलग-अलग राष्ट्रीय ईंधन स्रोत नहीं हैं। शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 के लिए समानांतर राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला चलाना एक बिल्कुल अलग बात होगी।
  • एक और पहलू है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • पिछले कई वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इथेनॉल उत्पादन और संबंधित बुनियादी ढांचे में लगभग लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष का निवेश किया है। भारत के मिश्रण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समर्पित इथेनॉल संयंत्रडिस्टिलरीभंडारण सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाए गए हैं।
  • यदि इस क्षमता के निर्माण के बाद हम मनमाने ढंग से ई10 पर वापस लौट जाते हैं तो इन निवेशों का क्या होगा? अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का क्या होगा? किसानों, सहकारी समितियों, उद्यमियों, वित्तीय संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा राष्ट्रीय नीति के आधार पर सद्भावनापूर्वक निवेश किए गए हजारों करोड़ रुपये का क्या होगा?
  • सार्वजनिक नीति को उपभोक्ता हितों और ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता, किसान कल्याण और राष्ट्रीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए।
  • क्या आज कोई हमसे आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के बजाय पुरानी नीली डीटीसी बसों को वापस लाने के लिए कहेगा? क्या कोई यह तर्क देगा कि हमें गड्ढों से भरी सड़कों पर लौटना चाहिए क्योंकि वे परिचित थीं? क्या दिल्ली स्वच्छ परिवहन ईंधनों को अधिक प्रदूषणकारी विकल्पों से बदल देगी?
  • प्रगति का अर्थ बेहतर प्रौद्योगिकी को अपनाना है।
  • ई20 का अर्थ है स्वच्छ दहन, कम उत्सर्जन, कच्चे तेल के आयात में कमी, भारतीय किसानों की आय में वृद्धि और देश के लिए अधिक ऊर्जा सुरक्षा।
  • एक बार जब किसी बेहतर ईंधन को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर दिया जाता है, व्यापक रूप से परीक्षण किया जाता है और ऑटोमोटिव उद्योग द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो उद्देश्य आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होना चाहिए न कि निम्न स्तर के मानक पर वापस लौटना।

प्रश्न 3: यदि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता हैतो ई20, 10 या शुद्ध पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है?

कच्‍चा मालवर्ष के दौरान इथेनॉल की आपूर्ति (मूल्य रुपये में)
21-2222-2323-2424-2525-26 (अस्थायी)
सी – शीरा46.6649.4156.28(6.87 का प्रोत्साहन)57.97 57.97 
बी – शीरा59.0860.7360.7360.7360.73
गन्ने का रस/चीनी/सिरप63.4565.6165.6165.6165.61
अनुपयोगी अनाज52.9264.0@64.0064.0064.00
एफसीआई चावल56.8758.558.5058.5060.32
मक्का52.9266.07@71.86(5.79 का प्रोत्साहन)71.86 71.86 
  • आज सरकार लाभकारी कीमतों पर इथेनॉल खरीदती है ताकि भारतीय किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। उदाहरण के लिए, मक्का आधारित इथेनॉल को लें। हमने इसकी खरीद कीमत में लगातार वृद्धि की है और आज यह जीएसटी, परिवहन, भंडारण और डिपो में रखरखाव लागत को छोड़कर लगभग 71.86 रूपये प्रति लीटर है।
  • इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का कारोबार लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर हो रहा है तो 20 का उत्पादन वास्तव में शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक महंगा है।
  • यदि कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 120-130 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो जाती है तो आर्थिक स्थिति स्वाभाविक रूप से उलट जाती है और इथेनॉल और भी सस्ता हो जाता है।
  • इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “ई20 सस्ता क्यों नहीं है?”
  • असली सवाल यह है कि “भारत वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के पूरे प्रभाव से उपभोक्ताओं को बचाने में कैसे कामयाब रहा?”
  • इसका उत्तर सरल है।
  • आज भारत में बिकने वाले प्रत्येक लीटर पेट्रोल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल होता है। यह इथेनॉल लगभग 71 रूपये प्रति लीटर की दर से प्राप्त किया जाता है, जो ब्रेंट क्रूडभू-राजनीतिक संघर्षों या जहाजरानी में बाधाओं के कारण प्रतिदिन सुबह नहीं बदलता।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो आपके ईंधन टैंक का पांचवां हिस्सा अंतरराष्ट्रीय तेल की अस्थिरता से अप्रभावित रहता है। यही एक मुख्य कारण है कि अप्रत्‍याशित वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत में खुदरा ईंधन की कीमतों में सबसे कम वृद्धि देखी गई।
  • इसलिए इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य किसी विशेष दिन पेट्रोल को सस्ता करना नहीं है। इसका उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना है।
  • पिछले चार वर्षों में इसके परिणामस्वरूप प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतों में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई।
पेट्रोल (रु./लीटर)डीजल (रु./लीटर)
देशजून-2226 जून(प्रतिशत)जून-2226 जून(प्रतिशत)
पाकिस्तान92.64129.4839.7779.98130.5163.18
श्रीलंका90.43123.5936.6686.13115.9034.57
नेपाल113.99137.1920.35103.22142.2537.81
बांग्लादेश76.97109.8242.6971.6090.2126
इटली166.85197.5218.39161.38207.8428.79
जर्मनी163.18194.2619.05167.70184.5510.04
फ्रांस174.18205.0817.74171.06203.9519.23
भारत (दिल्ली)96.72102.125.5889.6295.206.23

तालिका से पता चलता है कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से ईंधन की कीमतों में सबसे कम वृद्धि दर्ज करने वाले देशों की तुलना में भारत अभी भी एक अलग स्थान रखता है।

(मूल्य भारतीय रूपये में)

पेट्रोल (रु./लीटर)डीजल (रु./लीटर)
देशमार्च 2026जून 2026(प्रतिशत)मार्च 2026जून 2026(प्रतिशत)
पाकिस्तान86.85130.6150.3991.64130.2742.15
श्रीलंका86.79125.8144.9683.24117.9841.73
नेपाल99.28136.8937.8889.79141.9358.07
बांग्लादेश87.08109.6225.8875.0790.0419.94
भारत (दिल्ली)94.77102.127.7687.6795.208.59

स्रोत (पीपीएसी )

(मूल्य भारतीय रूपये में)

पेट्रोल (रु./लीटर)डीजल (रु./लीटर)
देशमार्च 2026मई 2026(प्रतिशत)मार्च 2026मई 2026(प्रतिशत)
संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका89.14113.0926.87120.59141.3917.25
फ्रांस203.42232.3014.20213.91234.129.45
इटली187.66212.8013.40207.69224.378.03
भारत94.7794.7787.6787.67

जून महीने का स्रोत (पीपीएसी) डेटा 11 जुलाई, 2026 को उपलब्ध होगा।

प्रत्येक लीटर इथेनॉल के मिश्रण का अर्थ है:

  • आयातित कच्चे तेल की मात्रा कम,
  • विदेशी मुद्रा के बाहरी प्रवाह में कमी,
  • भारतीय किसानों के लिए अधिक आय
  • उपभोक्ताओं के लिए अधिक मूल्य स्थिरता, और
  • मजबूत राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा

इसीलिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (ईएसवाई 2014-2015 से) ने पहले ही निम्नलिखित कार्य कर दिए हैं:

  • विदेशी मुद्रा में 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई।
  • लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन किया गया।
  • लगभग 952 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई , और
  • 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भारतीय किसानों को हस्तांतरित की गई।
  • हमारे किसान अब केवल अन्नदाता नहीं रह गए हैं वे ऊर्जादाता बन गए हैं जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा में प्रत्यक्ष योगदान दे रहे हैं।

प्रश्न 4: ऐसी चिंताएं हैं कि ई20 रबर के घटकों को नुकसान पहुंचाता हैपुराने वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है और कई वाहन मैनुअल में विशेष रूप से “ई10 अनुरूप” का उल्लेख किया गया है। क्या पुराने वाहनों के मालिकों को चिंतित होना चाहिए?

  • भारत के इथेनॉल कार्यक्रम के बढ़ने के साथ-साथ दुर्भाग्यवश इसके बारे में गलत जानकारी का प्रसार भी बढ़ा है।
  • भारत में ई85 के प्रचलन के बाद से ही स्वार्थपरक कई गुट अनावश्यक भय फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। समय-समय एक नई अफवाह फैलती है: रबर की पाइपें खराब हो जाएंगी, इंजन जाम हो जाएंगे, ईंधन टैंक में जंग लग जाएगा। इनमें से कोई भी दावा वैज्ञानिक प्रमाणों की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।
  • आइए तथ्यों पर गौर करें।
  • भारत का ई20 में शामिल होना रातोंरात लिया गया निर्णय नहीं था।
  • इस योजना को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने वाहन निर्माता कंपनियों, एआरएआई, एसआईएएम, तेल कंपनियों और तकनीकी संस्थानों को शामिल करते हुए विशेषज्ञ समितियों का गठन किया।
  • वर्ष 2021 में नीति आयोग ने सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद एक विस्तृत योजना प्रकाशित की। उस योजना में ई-10 से ई-20 में परिवर्तन और वाहन उद्योग से अपेक्षित तैयारियों का भी उल्लेख किया गया था। इसलिए वाहन निर्माता कई वर्षों पहले से ही नीतिगत दिशा-निर्देशों से पूरी तरह अवगत थे।
  • यदि निर्माता इसमें शामिल नहीं होते, तो वे कभी भी ई20-संगत वाहनों को प्रमाणित नहीं करते या वारंटी दायित्वों का पालन नहीं करते।
  • 15+मिश्रण भारत भर में साढ़े तीन साल से अधिक समय से संचालन में है।
  • ई20 को लॉन्च करने से पहले, इसका व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण किया गया, जिसके बाद इंजन की मजबूती, ईंधन प्रणाली, सामग्री की अनुकूलता, जंग प्रतिरोध, चलाने की क्षमता, उत्सर्जन और प्रदर्शन को शामिल करते हुए व्यापक क्षेत्राीय सत्यापन किया गया।
  • लेकिन प्रयोगशाला परीक्षण कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है।
  • सबसे बड़ा प्रमाण वास्तविक दुनिया से मिलता है।
  • मारुति सुजुकी ने अकेले ही लगभग 2.करोड़ वाहनों की सर्विसिंग कीजिनमें लगभग 1.करोड़ पुराने वाहन शामिल थे जिन्हें मूल रूप से ई20 के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था। यदि ई20 वास्तव में रबर के घटकों, ईंधन लाइनों या इंजनों को नुकसान पहुंचा रहा होता तो हमें लाखों वारंटी दावों, व्यापक रूप से पुर्जों की खराबी और देश भर में शिकायतों का अंबार देखने को मिलता।
  • ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ है।
  • एक अन्य चिंता वाहन मैनुअल में “ई10 अनुरूप” शब्द लिखे होने से संबंधित है।
  • लोगों को यह समझना होगा कि उन लेबलों का क्या अर्थ है।
  • वाहन मैनुअल में उस समय प्रचलित ईंधन विनिर्देश दर्शाए जाते हैं जब वाहन का मानकीकरण और प्रमाणीकरण हुआ था। इसका यह अर्थ नहीं है कि व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणइंजीनियरिंग सत्यापन और नियामक अनुमोदन के बाद ईंधन मानकों में बदलाव होने पर वाहन अचानक असुरक्षित हो जाता है। यदि इस तर्क को सार्वभौमिक रूप से लागू किया जाएतो कोई भी देश अपने ईंधन मानकों को उन्नत नहीं कर पाएगा ।
  • इसलिए ई10 से ई20 में परिवर्तन अनुमानों पर आधारित नहीं था बल्कि वर्षों के परीक्षण, निर्माता परामर्श और जमीनी अनुभव पर आधारित था।
  • भारत की इथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला देश की सबसे कड़ाई से विनियमित ईंधन आपूर्ति प्रणालियों में से एक है। इथेनॉल और मिश्रित पेट्रोल बीआईएस के सख्त मानकों का पालन करते हैं और डिस्टिलरी से लेकर डिपो और खुदरा बिक्री तक हर चरण में गुणवत्ता जांच से गुजरते हैं।
  • आपूर्ति श्रृंखला में कहीं भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत चूक होने पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। राज्यों के मुख्य सचिवों से अनुरोध किया गया है कि वे कड़ाई से प्रवर्तन सुनिश्चित करें और मिलावट के किसी भी मामले में सख्त कार्रवाई करें। ईंधन की गुणवत्ता से समझौता करने वाली किसी भी प्रकार की चूक को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
  • ई20 एक सुरक्षित, स्वच्छ, प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से सत्यापित ईंधन है जिसे भारतीय उपभोक्ता भरोसे के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुकूलता को सभी जिम्मेदार हितधारकों, जिनमें ऑटोमोबाइल निर्माता, परीक्षण और मानकीकरण एजेंसियां, तेल विपणन कंपनियां और नियामक प्राधिकरण शामिल हैं, द्वारा सत्यापित और सुनिश्चित किया गया है।
  • इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली गलत सूचनाओं, डर फैलाने वाली बातों या अपुष्ट सामग्री से गुमराह न हों।
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

और पढ़ें

Untitled Design 32 1

Jagannath रथ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन अलर्ट उपायुक्त और एसएसपी ने की सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था की व्यापक समीक्षा

Untitled Design 30 1

कम Rainfall से निपटने की तैयारी उपायुक्त ने डिजिटल कृषि रथ को दिखाई हरी झंडी किसानों को मिलेगी आधुनिक खेती की जानकारी

Untitled Design 29 1

13 जुलाई को होगी सिविल डिफेंस एयर रेड और Blackout मॉक ड्रिल उपायुक्त ने तैयारियों की समीक्षा की

Untitled Design 27 2

दलीय भावना और समय की प्रतिबद्धता ही सफलता की कुंजी NTTF के 10 दिवसीय रोप-इन कार्यक्रम का रंगारंग समापन

Untitled Design 26 2

Cluster सिस्टम के विरोध में मृत्युंजय कुमार का सरकार पर हमला बोले संस्कृत विभाग बंद करना संस्कृति पर सीधा प्रहार

Untitled Design 25 2

Golmuri में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर जेडीयू की चिंता स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड लगाने की उठाई मांग

Leave a Comment

💬
TNF AI असिस्टेंट
● ताज़ा खबरों के लिए तैयार
नमस्ते! 👋 मैं आपका TNF AI असिस्टेंट हूँ। आप हमारी वेबसाइट की कोई भी खबर, topic या इंटरनेट का कोई भी सवाल यहाँ पूछ सकते हैं!