
पश्चिमी सिंहभूम: जिले के चक्रधरपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित आत्मा कार्यालय परिसर में गुरुवार को आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत खरीफ Farmer गोष्ठी सह बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ मौसम की खेती के लिए तैयार करना, उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में किसानों के बीच उड़द, अरहर, मूंग और धान के उन्नत बीज वितरित किए गए, ताकि वे मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।

इस अवसर पर सिंहभूम सांसद जोबा माझी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उनके साथ कई जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी तथा प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने किसानों को संबोधित किया और उन्हें आत्मनिर्भर खेती, योजनाबद्ध निवेश, कम पानी वाली फसलों तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सैकड़ों किसानों के बीच बांटे गए उड़द, अरहर, मूंग और धान के बीज
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसानों के बीच उन्नत बीजों का वितरण रहा। आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत सैकड़ों किसानों को उड़द, अरहर, मूंग और धान के प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए गए। इन बीजों के वितरण का उद्देश्य यह था कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ दलहनी फसलों की ओर भी आगे बढ़ें, जिससे उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें और खेती कम जोखिम वाली बन सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि दलहनी फसलें न केवल कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती हैं। ऐसे में खरीफ मौसम में किसानों को धान के साथ-साथ उड़द, अरहर और मूंग जैसी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी बीज वितरण को उपयोगी पहल बताते हुए कहा कि यदि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहे, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए बदलनी होगी खेती की रणनीति : जोबा माझी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद जोबा माझी ने किसानों को वर्तमान मौसम परिस्थितियों के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मौसम की अनिश्चितता और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए किसानों को अपनी खेती की रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत है। केवल पारंपरिक तरीके से खेती करने के बजाय अब ऐसी फसलों और तकनीकों को अपनाना होगा, जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दे सकें।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर साफ दिखाई दे रहा है। कभी बारिश समय पर नहीं होती, तो कभी अत्यधिक वर्षा से फसलें प्रभावित हो जाती हैं। ऐसे में किसान यदि समय रहते अपनी फसल योजना बदलें, पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल चुनें और उन्नत बीजों के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करें, तो नुकसान की संभावना कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा। सांसद ने किसानों से अपील की कि वे खेती को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि एक संगठित और योजनाबद्ध व्यवसाय के रूप में देखें।
मैं Farmer परिवार से हूं, किसानों की पीड़ा और मेहनत को समझती हूं
अपने संबोधन के दौरान जोबा माझी ने किसानों से भावनात्मक जुड़ाव भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं किसान परिवार से आती हैं और आज भी खेती-किसानी से उनका जुड़ाव बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं खुद किसान परिवार से हूं और आज भी खेतों में काम करती हूं। धान की खेती से लेकर सब्जियों की खेती तक का अनुभव मुझे है। इसलिए किसानों की मेहनत, उनकी परेशानियों और चुनौतियों को मैं बहुत अच्छी तरह समझती हूं।”
उन्होंने कहा कि किसान का जीवन संघर्षों से भरा होता है। मौसम की मार, बाजार की अनिश्चितता, लागत का बढ़ना और समय पर संसाधन न मिलना जैसी कई चुनौतियां किसान झेलते हैं। इसके बावजूद किसान पूरे देश का पेट भरने का काम करता है। इसलिए किसान होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि गर्व की बात है। सांसद के इस वक्तव्य ने कार्यक्रम में मौजूद किसानों के बीच आत्मीयता का माहौल बनाया और उन्हें यह महसूस कराया कि उनकी समस्याओं को समझने वाला नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।
Farmer से सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील
जोबा माझी ने किसानों से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित कृषि योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से सशक्त और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के माध्यम से बीज, प्रशिक्षण, कृषि उपकरण, सिंचाई, कृषि ऋण, फसल विविधीकरण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यदि किसान इन योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग करें, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में किसान योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए जरूरी है कि किसान कृषि विभाग, आत्मा कार्यालय और संबंधित अधिकारियों से संपर्क बनाए रखें। योजनाओं की जानकारी लें, आवेदन प्रक्रिया समझें और समय पर लाभ प्राप्त करें। उन्होंने अधिकारियों से भी कहा कि योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका फायदा उठा सकें।
कृषि ऋण लेते समय बरतें सावधानी, जरूरत भर ही लें कर्ज
कार्यक्रम के दौरान सांसद ने किसानों को कृषि ऋण के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसान उतना ही ऋण लें, जितनी वास्तव में आवश्यकता हो। बिना योजना के या अनावश्यक रूप से अधिक कर्ज लेना भविष्य में आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है। इससे किसान परिवार तनाव और परेशानी का शिकार हो सकता है।
जोबा माझी ने कहा कि खेती में निवेश जरूरी है, लेकिन यह निवेश सोच-समझकर होना चाहिए। किसान यदि अपनी जमीन, फसल, पानी, बाजार और लागत का सही आकलन करके निवेश करेंगे, तो उन्हें लाभ मिलेगा। लेकिन केवल ऋण उपलब्ध है इसलिए कर्ज लेना उचित नहीं है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे खेती की जरूरत के अनुसार ही ऋण लें, उसका उपयोग सही कार्य में करें और समय पर भुगतान की योजना भी बनाएं। यह दृष्टिकोण खेती को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद करेगा।

सामूहिक खेती से कम होगी लागत, बढ़ेगी आय
सांसद जोबा माझी ने किसानों को सामूहिक खेती की दिशा में आगे बढ़ने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसान समूह बनाकर खेती करेंगे, तो उनकी लागत कम होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और बाजार तक पहुंच भी आसान होगी। सामूहिक खेती के माध्यम से बीज, खाद, मशीनरी, सिंचाई और विपणन जैसी कई जरूरतों को साझा किया जा सकता है, जिससे छोटे किसानों को विशेष लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि आज के समय में खेती को लाभकारी बनाने के लिए सहयोग आधारित मॉडल की जरूरत है। यदि किसान अकेले काम करेंगे, तो लागत और जोखिम दोनों अधिक होंगे। लेकिन यदि वे समूह, स्वयं सहायता समूह, किसान क्लब या किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से काम करें, तो उन्हें बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। सामूहिक खेती से किसानों की बाजार में सौदेबाजी क्षमता भी बढ़ेगी और वे अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।
नई कृषि तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर दिया जोर
जोबा माझी ने अपने संबोधन में किसानों से नई कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अब खेती केवल अनुभव के भरोसे नहीं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के सहयोग से आगे बढ़ेगी। यदि किसान मिट्टी परीक्षण, उन्नत बीज, जैविक एवं संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण, फसल चक्र, रोग प्रबंधन और आधुनिक उपकरणों का उपयोग करेंगे, तो उनकी खेती अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनेगी।
उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, गोष्ठियों और प्रदर्शन कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिए। इससे उन्हें नई जानकारी मिलेगी और वे बदलते समय के अनुरूप अपनी खेती को ढाल सकेंगे। विशेष रूप से कम पानी वाली फसलें, दलहन उत्पादन, मिश्रित खेती और सब्जी उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकता है।
किसान गोष्ठी बनी संवाद और जागरूकता का प्रभावी मंच
चक्रधरपुर में आयोजित यह खरीफ किसान गोष्ठी केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किसानों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद का प्रभावी मंच भी बनी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को खरीफ मौसम की चुनौतियों, फसल चयन, बीज की गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं, ऋण प्रबंधन और खेती में सामूहिक भागीदारी जैसे विषयों पर उपयोगी जानकारी दी गई। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिली कि खेती में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही योजना, सही फसल और सही तकनीक से भी जुड़ी होती है।
ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में कृषि जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे किसानों को नई जानकारी मिलती है, वे अपनी समस्याएं सामने रख पाते हैं और सरकार की योजनाओं के बारे में सीधे जानकारी हासिल कर पाते हैं। खासकर खरीफ सीजन की शुरुआत में इस तरह की गोष्ठियां किसानों को बेहतर तैयारी करने का अवसर देती हैं।
बड़ी संख्या में किसान और जनप्रतिनिधि रहे उपस्थित
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। प्रमुख रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी कांचन मुखर्जी, विधायक प्रतिनिधि पीरू हेम्ब्रम, प्रखंड प्रमुख ज्योति सिजुई, उप प्रमुख विनय प्रधान, जिला परिषद सदस्य मीना जोंको, लक्ष्मी हासदा, पूर्व मुखिया विजय सिंह सामाड, प्रदीप महतो, बीटीएम अभय कुमार, एटीएम पंकज कुमार, राजकुमार महतो, प्रदीप शर्मा, रमेश कोड़ाह सहित कई लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक प्रतिनिधित्व दिया और किसानों के साथ प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधि स्तर पर बेहतर संवाद का अवसर प्रदान किया।
चक्रधरपुर में आयोजित खरीफ Farmer गोष्ठी सह बीज वितरण कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बदलते मौसम, घटते जलस्तर और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच किसानों को अब आत्मनिर्भर, वैज्ञानिक और योजनाबद्ध खेती की ओर बढ़ना होगा। सांसद जोबा माझी ने किसानों को न केवल आत्मनिर्भर खेती का संदेश दिया, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, जरूरत भर ऋण लेने, सामूहिक खेती को अपनाने और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की दिशा में प्रेरित भी किया।
उड़द, अरहर, मूंग और धान के उन्नत बीजों का वितरण किसानों के लिए खरीफ सीजन की एक सकारात्मक शुरुआत माना जा सकता है। यदि किसान इन बीजों के साथ वैज्ञानिक सलाह, सरकारी योजनाओं और सामूहिक प्रयासों को जोड़ते हैं, तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। चक्रधरपुर का यह कार्यक्रम किसानों के लिए केवल बीज वितरण का आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य की बेहतर खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।














