
पूर्वी सिंहभूम: जिले में प्रशासनिक कार्यों की प्रगति, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, मतदाता सूची inspected अभियान और राजस्व-भूमि संबंधी मामलों की जमीनी हकीकत जानने के उद्देश्य से उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने मानगो अंचल कार्यालय तथा बोड़ाम प्रखंड एवं अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया। रविवार, 6 जुलाई 2026 को हुए इस निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने केवल कार्यालयी कार्यों की औपचारिक समीक्षा ही नहीं की, बल्कि आमजन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, लंबित मामलों, विकास योजनाओं की गुणवत्ता, लोक शिकायतों के निष्पादन और कार्य संस्कृति तक का बारीकी से जायजा लिया।

यह निरीक्षण प्रशासनिक जवाबदेही, कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे सरकारी योजनाओं, निर्वाचन संबंधी कार्यों और राजस्व मामलों में तेजी लाएं, ताकि जनता को समय पर लाभ मिल सके और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी बन सकें।
SIR-2026 अभियान की समीक्षा गणना प्रपत्रों के शत-प्रतिशत वितरण और संग्रहण पर जोर
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सबसे पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 अभियान की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत वितरण और संग्रहण समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन, शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है, इसलिए किसी भी पात्र मतदाता तक पहुंचने में लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बूथ स्तर तक यह सुनिश्चित किया जाए कि हर पात्र मतदाता को गणना प्रपत्र उपलब्ध हो और उसका भरा हुआ प्रपत्र समय पर वापस प्राप्त किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटाइजेशन कार्य में भी तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि एकत्रित आंकड़ों को समय पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा सके और आगे की निर्वाचन प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि SIR-2026 केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। ऐसे में इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
हर पात्र मतदाता तक पहुंच बनाने पर उपायुक्त का विशेष बल
उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने निरीक्षण के दौरान यह भी कहा कि SIR-2026 अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन कितनी गंभीरता से प्रत्येक पात्र मतदाता तक पहुंच बनाता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी योग्य मतदाता इस प्रक्रिया से छूटे नहीं।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बीएलओ, प्रखंड और अंचल स्तर के पदाधिकारी तथा संबंधित निर्वाचन कर्मी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और जिन क्षेत्रों में प्रपत्रों के वितरण या संग्रहण की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश देते हुए उपायुक्त ने कहा कि समयबद्ध डेटा एंट्री और रिकॉर्ड प्रबंधन से ही पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सकेगी। इससे मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी।
राजस्व एवं भूमि संबंधी लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने राजस्व और भूमि संबंधी मामलों की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने लंबित दाखिल-खारिज, परिमार्जन, सीमांकन, अतिक्रमण और अन्य राजस्व मामलों की स्थिति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को इन मामलों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि राजस्व और भूमि से जुड़े मामले सीधे आम लोगों के जीवन, संपत्ति और अधिकारों से जुड़े होते हैं। ऐसे में इन मामलों में अनावश्यक देरी लोगों की परेशानी बढ़ाती है और प्रशासन की छवि को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जिन मामलों का निपटारा लंबे समय से लंबित है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। साथ ही, प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित पक्षों को समय पर सूचना मिले तथा उनकी शिकायतों का समाधान संतोषजनक तरीके से हो।
दाखिल-खारिज सीमांकन और अतिक्रमण मामलों को प्राथमिकता देने की हिदायत
उपायुक्त ने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देश दिया कि दाखिल-खारिज, सीमांकन और अतिक्रमण जैसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े विवाद अक्सर लंबे समय तक लोगों को परेशान करते हैं और कई बार यही विवाद सामाजिक तनाव का कारण भी बनते हैं। इसलिए ऐसे मामलों का निष्पादन संवेदनशीलता, निष्पक्षता और समयबद्धता के साथ होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज के मामलों में फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और सीमांकन जैसे मामलों में मौके पर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया को तेज किया जाए। अतिक्रमण के मामलों में भी नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। उपायुक्त का जोर इस बात पर था कि राजस्व प्रशासन केवल रिकॉर्ड संभालने तक सीमित न रहे, बल्कि जनता से जुड़े मामलों में सक्रिय और उत्तरदायी भूमिका निभाए।
विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, तय समयसीमा में कार्य पूरा करने का निर्देश
मानगो और बोड़ाम क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों से योजनाओं की स्थिति, कार्य प्रगति, लाभार्थियों तक पहुंच और जमीनी क्रियान्वयन के बारे में जानकारी ली। समीक्षा के बाद उन्होंने निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि सड़क, भवन, पेयजल, आवास, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास और अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और प्रभावी तरीके से हो। उन्होंने अधिकारियों को नियमित फील्ड निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए कहा कि केवल कागजी प्रगति रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर कार्य की गुणवत्ता, उपयोगिता और लाभार्थियों की संतुष्टि की भी जांच की जानी चाहिए।
योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित फील्ड निरीक्षण पर जोर
उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फील्ड विजिट को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण करेंगे, तभी उन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलेगी। इससे कार्यों में कमी, लापरवाही या तकनीकी त्रुटियों की पहचान समय रहते हो सकेगी और सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि कोई योजना किसी गांव, वार्ड या पंचायत के लिए स्वीकृत हुई है, तो उसका लाभ उसी क्षेत्र के पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए। लाभार्थियों के चयन से लेकर कार्य पूर्ण होने तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह होनी चाहिए। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे योजनाओं की निगरानी को केवल फाइलों तक सीमित न रखें, बल्कि जमीनी सत्यापन को प्राथमिकता दें।
बोड़ाम प्रखंड परिसर में जर्जर भवन का निरीक्षण, मरम्मतीकरण के निर्देश
बोड़ाम प्रखंड परिसर के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परिसर में स्थित एक जर्जर भवन का भी निरीक्षण किया। भवन की स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मतीकरण कार्य कराने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि कार्यालय परिसर सुरक्षित, व्यवस्थित और कार्य के अनुकूल होना चाहिए, ताकि वहां आने वाले आम लोगों और कार्यरत कर्मियों को किसी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि जर्जर भवन न केवल प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम पैदा करते हैं। ऐसे में ऐसे भवनों की समय पर मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी है। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि जिला प्रशासन केवल योजनाओं और फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यालय परिसरों की आधारभूत संरचना और कार्यस्थल की सुरक्षा को भी गंभीरता से ले रहा है।
अभिलेख संधारण, साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं की भी हुई समीक्षा
inspected के दौरान उपायुक्त ने कार्यालयों में अभिलेखों के संधारण, साफ-सफाई, नागरिक सुविधाओं और कार्य संस्कृति का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि कार्यालयों में रिकॉर्ड किस प्रकार रखे जा रहे हैं, जनता के लिए बैठने, जानकारी प्राप्त करने और आवेदन देने जैसी मूलभूत सुविधाएं किस स्तर पर उपलब्ध हैं, और कार्यालय परिसर में स्वच्छता की स्थिति कैसी है।
उपायुक्त ने अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि कार्यालयों को व्यवस्थित, साफ-सुथरा और जनहितैषी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय जनता के लिए सेवा केंद्र हैं, इसलिए वहां आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। अभिलेखों का उचित संधारण न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाता है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। इसी तरह साफ-सफाई और नागरिक सुविधाएं कार्यालय की कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
आमजन के साथ संवेदनशील व्यवहार और शिकायतों के त्वरित समाधान का निर्देश
inspected के दौरान उपायुक्त ने एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी दिया कि प्रशासनिक कामकाज का सबसे अहम पक्ष आम जनता के साथ व्यवहार और उनकी समस्याओं का समाधान है। उन्होंने पदाधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि वे आमजन के साथ संवेदनशील व्यवहार करें और उनकी समस्याओं का त्वरित एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करें।
उपायुक्त ने कहा कि जनता सरकारी कार्यालयों में अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आती है। ऐसे में यदि उन्हें सम्मानजनक व्यवहार, स्पष्ट जानकारी और समय पर कार्रवाई नहीं मिलती, तो प्रशासन पर उनका भरोसा कमजोर होता है। इसलिए सभी पदाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि लोक शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, आवेदकों को अनावश्यक रूप से चक्कर न लगवाए जाएं और जहां भी संभव हो, मौके पर ही समाधान का प्रयास किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही ही सुशासन की पहचान है।
inspected के दौरान मौजूद रहे अपर उपायुक्त, बीडीओ और सीओ
इस inspected के दौरान अपर उपायुक्त श्री अनुराग तिवारी भी उपस्थित रहे। इसके अलावा संबंधित प्रखंड एवं अंचल के बीडीओ और सीओ भी मौके पर मौजूद थे। उपायुक्त ने सभी अधिकारियों से अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी ली और जहां जरूरत महसूस हुई, वहां स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए। अधिकारियों की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि निरीक्षण के दौरान उठाए गए मुद्दों पर तत्काल प्रशासनिक प्रतिक्रिया हो और आवश्यक निर्देश सीधे संबंधित पदाधिकारियों तक पहुंचे।
इस तरह का संयुक्त निरीक्षण जिला प्रशासन की उस कार्यशैली को दर्शाता है, जिसमें शीर्ष स्तर के अधिकारी जमीनी स्तर तक जाकर न केवल समीक्षा करते हैं, बल्कि समस्याओं की पहचान कर तत्काल समाधान की दिशा भी तय करते हैं। इससे प्रखंड और अंचल स्तर पर कार्यरत अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ती है।
प्रशासनिक सक्रियता समयबद्ध निष्पादन और जनहित को प्राथमिकता देने का संदेश
मानगो अंचल कार्यालय तथा बोड़ाम प्रखंड एवं अंचल कार्यालय के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने जिस तरह SIR-2026 अभियान, राजस्व एवं भूमि संबंधी मामलों, विकास योजनाओं, लोक शिकायतों, कार्यालयी कार्य संस्कृति और नागरिक सुविधाओं की समीक्षा की, उससे यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन जमीनी स्तर पर कामकाज की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है।
inspected के दौरान दिए गए निर्देशों का मूल संदेश यही है कि हर योजना, हर फाइल और हर प्रशासनिक प्रक्रिया का केंद्र आमजन होना चाहिए। मतदाता सूची पुनरीक्षण से लेकर दाखिल-खारिज और विकास योजनाओं तक, हर क्षेत्र में समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ ही, कार्यालयों को अधिक व्यवस्थित, संवेदनशील और जनोन्मुख बनाने पर भी विशेष बल दिया गया है।





















