
जमशेदपुर। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा आयोजित जुलाई 2026 मासिक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। संस्था के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित इस समारोह में देशभर के साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गजेंद्र हरिहरनों ‘दीप’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी एवं राष्ट्रीय दैनिक न्यूज धमाका के प्रधान संपादक एवं संचालक रघुवंशमणि सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पवनेश मिश्र ने किया। संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति सिंह ने समारोह की जानकारी देते हुए बताया कि साहित्य, सृजन और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए।
रमापति मौर्य को मिला ‘कल्प शिल्प विभूषण’ सम्मान
समारोह में साहित्यिक योगदान के लिए रमापति मौर्य को प्रतिष्ठित ‘कल्प शिल्प विभूषण’ सम्मान से अलंकृत किया गया। वहीं मणिका वर्मा को रचनात्मक प्रतिभा और नवाचार के लिए ‘कल्प सृजन कौशल सम्राट’ सम्मान प्रदान किया गया।

इन साहित्यकारों को भी मिला सम्मान
इस अवसर पर विभिन्न साहित्यिक विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले रचनाकारों को सम्मानित किया गया। इनमें—
- डॉ. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य विद्यासागर’ – कल्प सृजन भूषण
- पंडित अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’ – कल्प कवि कुल कलश
- सूर्यपाल नामदेव ‘चंचल’ – कल्प वैचारिक शिखर
- विजय रघुनाथराव डांगे – कल्प शब्द साधक सम्मान
मंच संचालन एवं संयोजन में उल्लेखनीय योगदान के लिए—
- कीर्ति त्यागी – कल्प भेंटवार्ता
- अतुल कुमार खरे – कल्प कथा मंजूषा
- अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’ – कल्प प्रगीत आनंद विशेष अलंकरण
से सम्मानित किए गए।
दैनिक कल्प सर्जना से जुड़े रचनाकारों का भी हुआ अभिनंदन
संस्था द्वारा संचालित ‘दैनिक कल्प सर्जना’ कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष योगदान देने वाले पटल प्रभारियों को ‘विशेष कल्प सर्जना ध्वजवाहक सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ. जया शर्मा ‘प्रियंवदा’, ज्योति प्यासी, प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’, गरिमा वार्ष्णेय, सूर्यपाल नामदेव ‘चंचल’, जितेंद्र शास्त्री तथा अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’ शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त सान्द्रा लुटवान गणेश को ‘कल्प सृजन कौशल मुकुट’ तथा कंचना मिश्रा को ‘कल्प सृजन कौशल प्रासाद’ प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
रघुवंशमणि सिंह ने दी साहित्य साधना को नई ऊर्जा
मुख्य अतिथि रघुवंशमणि सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “समूचा कल्पकथा परिवार अपनी साहित्य साधना के कारण हम सभी के हृदय में बसता है। यह संस्था साहित्य और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।”
वंदे मातरम् के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
समारोह के अंत में ‘वंदे मातरम्’ के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के अवसर पर अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सामूहिक वंदे मातरम् का गायन किया गया। इसके पश्चात आयोजकों ने सभी अतिथियों, सम्मानित साहित्यकारों और देशभर से जुड़े साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।
















